Rajasthan

न सवारी, न जवाब… खाली फ्लैट से 200 कैब बुक! जयपुर में ‘घोस्ट बुकिंग’ का रहस्यमयी खेल, ड्राइवर रह गए हैरान

Last Updated:May 03, 2026, 10:34 IST

Jaipur Ghost Cab Booking Case: जयपुर के वाटिका रोड स्थित गुलमोहर गार्डन में शनिवार को एक अजीब और रहस्यमयी मामला सामने आया, जहां एक खाली फ्लैट से मात्र 4 घंटे में 200 से अधिक कैब बुकिंग की गईं. उबर ऐप पर दिखाई गई लोकेशन फ्लैट नंबर W-166 थी, जहां लगातार कैब ड्राइवर पहुंचते रहे, लेकिन किसी को भी कोई यात्री नहीं मिला. सभी बुकिंग्स दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे के बीच की गईं, जिससे ड्राइवरों को समय और ईंधन दोनों का नुकसान हुआ. ड्राइवरों द्वारा संपर्क करने पर किसी भी नंबर से जवाब नहीं मिला और संबंधित फ्लैट भी पूरी तरह खाली पाया गया. यह मामला साइबर शरारत या संगठित फ्रॉड का संकेत माना जा रहा है, जिसमें फेक अकाउंट या लोकेशन स्पूफिंग तकनीक के इस्तेमाल की आशंका है.

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गुलमोहर गार्डन बना साइबर फ्रॉड का केंद्र, ड्राइवरों का समय और पैसा बर्बादZoomखाली फ्लैट से 200 कैब बुक

जयपुर:  राजधानी जयपुर में शनिवार को एक चौंकाने वाला मामला सामने आया. वाटिका रोड स्थित गुलमोहर गार्डन के एक खाली फ्लैट से अचानक कैब बुकिंग का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसने सभी को हैरान कर दिया. फ्लैट नंबर W-166 से दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक लगातार 200 से ज्यादा कैब बुक की गईं, लेकिन किसी भी ड्राइवर को मौके पर कोई यात्री नहीं मिला.

उबर ऐप पर दिखाई गई लोकेशन के आधार पर ड्राइवर लगातार गुलमोहर गार्डन पहुंचते रहे. हर बार पिकअप लोकेशन वही फ्लैट दिख रहा था, जबकि ड्रॉप लोकेशन अलग-अलग दर्ज की गई थीं. मौके पर तैनात सुरक्षा गार्ड के अनुसार, लगातार टैक्सियां आती रहीं लेकिन हर ड्राइवर को बिना सवारी लौटना पड़ा. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बुकिंग नंबरों पर कॉल करने के बावजूद किसी ने फोन रिसीव नहीं किया.

‘घोस्ट बुकिंग’ या साइबर फ्रॉड की आशंकाएक ही स्थान से इतनी बड़ी संख्या में लगातार बुकिंग होना सामान्य नहीं माना जा रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला साइबर शरारत या किसी संगठित फ्रॉड की ओर इशारा कर सकता है. आशंका जताई जा रही है कि फेक अकाउंट या लोकेशन स्पूफिंग तकनीक का इस्तेमाल कर यह बुकिंग की गई होगी.

कैब सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवालइस घटना ने कैब एग्रीगेटर कंपनियों के सिस्टम और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बिना मजबूत सुरक्षा व्यवस्था के इतने बड़े स्तर पर फर्जी बुकिंग होना तकनीकी खामी को उजागर करता है. इससे सैकड़ों ड्राइवरों को समय और डीजल का नुकसान उठाना पड़ा.

ड्राइवरों को आर्थिक नुकसान, जांच की मांगड्राइवरों ने बताया कि लगातार फर्जी बुकिंग के कारण उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हुआ है. कई ड्राइवर घंटों तक लोकेशन पर इंतजार करते रहे लेकिन कोई यात्री नहीं मिला. इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच की मांग तेज हो गई है.

जयपुर की यह ‘घोस्ट बुकिंग’ घटना सिर्फ एक तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि संभावित साइबर फ्रॉड का संकेत मानी जा रही है. अब सवाल यह है कि क्या कैब ऐप्स अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत कर पाएंगे या ऐसे मामले भविष्य में भी दोहराए जाते रहेंगे.

About the AuthorJagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें

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