Rajasthan

JJM केस में महेश जोशी को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका; ACB और कोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल

Last Updated:June 18, 2026, 10:59 IST

Jal Jeevan Mission Scam: जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी. हालांकि कोर्ट ने माना कि एसीबी और विशेष न्यायाधीश के स्तर पर गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर चूक हुई है और गिरफ्तारी के आधार बताने से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. इसके बावजूद न्यायिक हिरासत में होने के कारण हैबियस कॉर्पस याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती. कोर्ट ने जोशी को अन्य कानूनी विकल्पों के जरिए राहत मांगने की छूट दी है.

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महेश जोशी को हाईकोर्ट से झटका! हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज, ACB की चूक पर सवालZoomजल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली

जयपुर. जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी को राहत नहीं मिली है. राजस्थान हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली हैबियस कॉर्पस याचिका खारिज कर दी है. हालांकि अदालत ने यह भी माना कि एसीबी और विशेष न्यायाधीश के स्तर पर प्रक्रिया संबंधी गंभीर चूक हुई है. मामले की सुनवाई जस्टिस उमाशंकर व्यास और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने की. इस संबंध में विस्तृत आदेश बुधवार को अपलोड किया गया.

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपी को गिरफ्तारी के आधार और कारणों की जानकारी देने से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया. अदालत ने माना कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का अनुपालन आवश्यक है, लेकिन इस मामले में उस स्तर पर कमियां सामने आई हैं.इसके बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए गिरफ्तारी को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता, क्योंकि महेश जोशी वर्तमान में न्यायिक आदेशों के तहत हिरासत में हैं.

इस वजह से हैबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी व्यक्ति को सक्षम न्यायालय के आदेश के आधार पर न्यायिक अभिरक्षा में रखा गया हो, तब हैबियस कॉर्पस याचिका का दायरा सीमित हो जाता है. कोर्ट ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में हिरासत को केवल हैबियस कॉर्पस याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती. यदि किसी पक्ष को न्यायिक आदेश या गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसके लिए कानून में अन्य वैधानिक उपाय उपलब्ध हैं. इसलिए इस याचिका को स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता.

कानूनी प्रावधानों के तहत राहत के लिए आगे की कार्यवाही कर सकते हैं

खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास संबंधित आदेशों को उचित कानूनी मंच पर चुनौती देने का अधिकार अब भी सुरक्षित है. अदालत ने कहा कि वह उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत राहत के लिए आगे की कार्यवाही कर सकते हैं. गौरतलब है कि जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी के बाद यह याचिका दायर की गई थी. याचिका में गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए तत्काल रिहाई की मांग की गई थी. हालांकि हाईकोर्ट ने न्यायिक हिरासत के आधार पर इस मांग को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी. अब मामले में आगे की कानूनी रणनीति और संभावित अपीलों पर सबकी नजर रहेगी.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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