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हार के बाद इस्तीफा देने वाले भंवर जितेन्द्र सिंह राजस्थान में राहुल गांधी के आंख और कान हैं!

Last Updated:May 06, 2026, 17:12 IST

Bhanwar Jitendra Singh News : अलवर के पूर्व राजघराने के सदस्य और पूर्व केन्द्रीय मंत्री भंवर जितेन्द्र सिंह एक बार फिर से चर्चा में है. इसकी वजह है असम के विधानसभा चुनाव. कांग्रेस लीडर राहुल गांधी के खासमखास भंवर जितेन्द्र सिंह के पास ही असम चुनाव की जिम्मेदारी थी. लेकिन वहां पार्टी सत्ता में आना तो दूर अपनी पुरानी पॉजिशन भी हासिल नहीं कर पाई. इससे व्यथित हुए सिंह ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है. भंवर जितेन्द्र सिंह अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमे से इतर राजस्थान में राहुल गांधी के आंख और कान माने जाते हैं. असम चुनाव: इस्तीफा देने वाले भंवर जितेन्द्र सिंह राहुल गांधी के आंख और कान हैंZoomभंवर जितेन्द्र सिंह एक बार अलवर से सांसद और दो बार विधायक रह चुके हैं.

जयपुर. पश्चिम बंगाल, असम, पुदुचेरी, तमिलनाडु और केरल में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के कांग्रेस को फिर से बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. केरल को छोड़कर कांग्रेस को कहीं भी सफलता नहीं मिली. केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को बहुमत मिला है. लेकिन असम में उसकी उम्मीदों को जबर्दस्त झटका लगा है. कांग्रेस को असम से काफी आस थी. लेकिन वहां वह बढ़त छोड़कर अपनी पुरानी पॉजिशन भी हासिल नहीं कर पाई. असम में कांग्रेस की हुई करारी हार के बाद वहां के चुनाव प्रभारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता भंवर जितेन्द्र सिंह ने अपने पद इस्तीफा दे दिया. सिंह सीधे तौर पर गांधी परिवार से जुड़े हैं. वे गांधी परिवार के भरोसेमंद लोगों की अग्रिम पंक्ति में शामिल हैं. राहुल गांधी भंवर जितेन्द्र सिंह पर पर खासा भरोसा करते हैं.

भंवर जितेन्द्र सिंह राजस्थान के अलवर के पूर्व राजघराने से आते हैं. वे दो बार अलवर विधानसभा सीट से विधायक और एक बार अलवर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं. सांसद बनने के बाद वे केन्द्र सरकार में मंत्री भी रहे. लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में वे बीजेपी से हार गए थे. रॉयल फैमली से संबंध रखने के कारण सिंह का इलाके में अच्छा दबदबा है. वे राहुल गांधी की कोर टीम का हिस्सा हैं. राजस्थान में कांग्रेस साफ तौर पर जहां अशोक गहलोत और सचिन पायलट के खेमों में बंटी है. वहीं जितेन्द्र सिंह दोनों की खेमों में किसी भी खेमे में नहीं है. लेकिन माना जाता है कि फिर भी गहलोत के प्रति उनका थोड़ा सॉफ्ट कॉर्नर है. इसके पीछे कई राजनीतिक वजह हैं. अलवर से आने वाले राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को भी मुख्य भूमिका में लाने का श्रेय सिंह को जाता है. राजस्थान में साल 2018 में कांग्रेस जब सत्ता में आई थी तब सीएम की कुर्सी को लेकर तनाव हो गया था. उस संकट को हल करने में भी सिंह ने भूमिका निभाई थी.

पार्टी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए तो छोड़ दिया पद
अलवर की राजनीति में करीब ढाई दशक से ज्यादा समय से सक्रिय जितेन्द्र सिंह की राजनीति अलग तरह की है. वे पार्टी के क्राउड पुलर लीडर की बजाय मैनेजमेंट टीम के अहम सदस्य के तौर पर जाने जाते हैं. सहज और सौम्य स्वभाव के धनी सिंह को राजस्थान में राहुल गांधी की आंख और कान माना जाता है. गांधी परिवार का खासा भरोसा होने के कारण सिंह का राजस्थान की राजनीति में एक अलग ही कद है. राहुल की कोर टीम का हिस्सा होने के कारण ही सिंह को असम जैसे राज्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन वे पार्टी की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाए. असम में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन से आहत हुए सिंह ने चुनाव परिणाम के तत्काल बाद इसकी पूरी जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजे अपने इस्तीफ में उन्होंने कहा कि वे पार्टी की उम्मीदें पूरी नहीं कर पाए लिहाजा वे पद छोड़ रहे हैं.

पायलट खेमे में खुशी की लहर हैदूसरी तरफ राजस्थान कांग्रेस में पायलट खेमे में खुशी की लहर है. इसकी वजह है केरल में यूडीएफ की सफलता. केरल में राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने अहम भूमिका निभाई थी. पायलट ने वहां 55 से ज्यादा सीटों के लिए चुनाव प्रचार किया था. केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले फ्रंट को बहुमत मिलने से पायलट का पार्टी में दबदबा और बढ़ा है. क्राउड पुलर की छवि वाले नेता पायलट ने वहां भी अपना राजनीतिक चार्तुय दिखाया और सफलता के सहभागी बने. वहीं असम में इससे बिल्कुल उलटा हो गया. असम के परिणामों से व्यथित सिंह ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ दिया.

जल्द मिल सकती है कोई दूसरी जिम्मेदारीबहरहाल राजस्थान में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं. लोकसभा चुनावों में भी काफी समय बाकी है. राजनीति के जानकार मानते हैं कि ताजा घावों का असर अलग ही होता है. लिहाजा संभव है सिंह कुछ समय के लिए आराम लें. लेकिन पार्टी के नेता राहुल की कोर कमेटी के सदस्य होने कारण सिंह को संगठन में जल्द ही कोई और अहम जिम्मेदार मिल सकती है.

About the AuthorSandeep Rathore

संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…और पढ़ें

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