Rajasthan

पंखों पर भील पेंटिंग का जादू

Last Updated:May 06, 2026, 10:43 IST

Udaipur Artist Mangilal Bhil Feather Art: उदयपुर के मांगीलाल भील मोर पंखों पर पारंपरिक भील पेंटिंग्स बनाकर अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं. बचपन में परिवार से सीखी चित्रकारी को उन्होंने पंखों पर उतारकर नया प्रयोग किया है. उनकी कला में आदिवासी संस्कृति और गवरी नृत्य के पात्रों की झलक दिखती है. राज्यपाल से सम्मानित होने के बाद अब मांगीलाल नेशनल अवॉर्ड की तैयारी में जुटे हैं. उनकी यह पहल उदयपुर की आदिवासी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रही है.

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उदयपुर. आपने कैनवास, दीवारों और कागज पर बनी कई तरह की पेंटिंग्स देखी होंगी, लेकिन क्या कभी पक्षियों के पंखों पर उकेरी गई कला देखी है. उदयपुर के रहने वाले मांगीलाल भील अपनी इसी अनोखी कला के चलते इन दिनों चर्चा में हैं. वे मोर और अन्य पक्षियों के पंखों पर बेहद बारीकी से भील पेंटिंग्स बनाकर परंपरा और नवाचार का खूबसूरत संगम पेश कर रहे हैं. उनकी यह कला न केवल देखने में अद्भुत है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति को सहेजने का एक नया माध्यम भी बन गई है.

मांगीलाल भील बताते हैं कि उन्हें इस कला की प्रेरणा अपने परिवार से ही मिली. बचपन में उनकी दादी और नानी घर की दीवारों और आंगन में पारंपरिक चित्रकारी किया करती थीं. उन्हीं को देखकर उनके मन में भी कला के प्रति रुचि जागी. एक दिन घर के पीछे पहाड़ी पर उन्हें मोरनी का एक पंख मिला, जिसे देखकर उनके मन में नया प्रयोग करने का विचार आया. बस यहीं से उन्होंने कागज और दीवार के बजाय पंखों पर पेंटिंग बनाने की शुरुआत कर दी. शुरुआत में यह सिर्फ एक प्रयोग था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया.

भील संस्कृति और गवरी के पात्रों का अनूठा संगममांगीलाल ने अपनी इस कला को ‘भील पेंटिंग’ का नया रूप दिया है, जिसमें वे आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को पंखों पर जीवंत करते हैं. उनकी पेंटिंग्स में मुख्य रूप से पशु-पक्षी, हिंदू देवी-देवता और आदिवासी अंचल की झलक देखने को मिलती है. खासतौर पर मेवाड़ के प्रसिद्ध गवरी नृत्य के अलग-अलग पात्रों को उन्होंने बेहद खूबसूरती और बारीकी से अपने चित्रों में उतारा है. पंख जैसे नाजुक और छोटे माध्यम पर इतनी स्पष्टता से चित्र बनाना उनकी कड़ी मेहनत और हुनर को दर्शाता है.

राज्यपाल से मिला सम्मान, अब नेशनल अवॉर्ड पर नजरमांगीलाल की इस अनोखी कला को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी है. उनकी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें राज्यपाल द्वारा सम्मानित किया जा चुका है, जिससे उनका हौसला और बढ़ा है. अब मांगीलाल नेशनल अवॉर्ड पाने की तैयारी में जुटे हुए हैं. इसके लिए उन्होंने गवरी के विभिन्न पात्रों की एक विशेष श्रृंखला भी तैयार की है, जिसे वे बड़े मंच पर प्रस्तुत करना चाहते हैं. स्थानीय कला प्रेमियों का कहना है कि मांगीलाल ने पारंपरिक भील पेंटिंग को एक नया आयाम दिया है, जो आने वाले समय में विश्व पटल पर अपनी अलग छाप छोड़ेगी.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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Udaipur,Udaipur,Rajasthan

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