Ajmer | अखनूर में मुठभेड़, अग्निवीर युवराज सिंह शहीद, गांव में पसरा मातम!

Last Updated:May 06, 2026, 18:46 IST
Agniveer Yuvaraj Singh Ajmer: अखनूर में मुठभेड़ के दौरान अग्निवीर युवराज सिंह शहीद, अजमेर के लगैतखेड़ा गांव में शोक, 15 दिन बाद छुट्टी पर घर आने वाले थे. युवराज सिंह की कहानी सिर्फ एक जवान की नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे की थी जो अपने परिवार का सहारा बनने जा रहे थे. लोगों ने बताया कि युवराज सिंह सिर्फ एक जवान ही नहीं था, वह नेशनल स्तर का कबड्डी खिलाड़ी भी रह चुका था
अजमेर. ब्यावर जिले के एक छोटे से गांव से आई खबर ने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया है. जवाजा क्षेत्र के लगैतखेड़ा गांव का 24 साल का जवान युवराज सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे. जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान वह शहीद हो गए. गांव में जहां कभी उसके घर के बाहर हंसी की आवाजें सुनाई देती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है. हर कोई यही कह रहा है- इतनी जल्दी क्यों चला गया.
युवराज सिंह की कहानी सिर्फ एक जवान की नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे की थी जो अपने परिवार का सहारा बनने जा रहे थे. वह अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए और महज तीन महीने बाद उसकी सेवा स्थाई होने वाली थी. घर में इस बात की खुशी थी कि अब उनका भविष्य सुरक्षित होने वाला है. लेकिन इससे पहले ही खबर आई कि वह देश के लिए लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए.
अखनूर में मुठभेड़, जवान ने डटकर मुकाबला कियाजानकारी के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर के अखनूर इलाके में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान युवराज सिंह ने बहादुरी से सामना किया. हालात आसान नहीं थे, लेकिन वे पीछे हटने के बजाय मुकाबला किए. इसी दौरान वह शहीद हो गए. सेना के साथियों के बीच भी उनकी बहादुरी की चर्चा हो रही है, हालांकि गांव तक सिर्फ एक खबर पहुंची, कि उनका बेटा अब नहीं रहा.
गांव के लोग बताते हैं कि युवराज शुरू से ही मजबूत इरादों वाला था. खेलकूद में आगे रहता था और सेना में जाने का सपना देखता था. जब उसकी भर्ती हुई तो पूरे गांव ने जश्न मनाया था. अब वही गांव गम में डूबा हुआ है.
खिलाड़ी भी था, घर आने की तैयारी भी चल रही थीलोगों ने बताया कि युवराज सिंह सिर्फ एक जवान ही नहीं था, वह नेशनल स्तर का कबड्डी खिलाड़ी भी रह चुका था. मैदान में उसकी पकड़ और ताकत की चर्चा होती थी. खेल के जरिए उसने अपना नाम बनाया और फिर देश सेवा का रास्ता चुना. परिवार को उस पर गर्व था, और अब भी है, लेकिन दर्द कम नहीं हो रहा.
सबसे ज्यादा तकलीफ देने वाली बात यह है कि वह 15 दिन बाद छुट्टी पर घर आने वाले थे. परिवार वाले उनकी राह देख रहे थे. घर में शादी को लेकर भी बातें चल रही थीं. धीरे-धीरे तैयारी की सोच बन रही थी. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. अब गांव में हर घर में बस उसी की बात हो रही है. कोई उसकी बचपन की यादें बता रहा है, तो कोई उसके खेल के किस्से. माता-पिता की हालत समझी जा सकती है, जिन्होंने बेटे को देश सेवा के लिए भेजा, लेकिन अब वो तिरंगे में लिपटकर लौटेगा.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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Location :
Ajmer,Ajmer,Rajasthan



