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CPM लीडर के आरोपों से हुई नवीन बाबू की मौत? कई अनसुलझे सवाल, केरल में नई कैबिनेट बनते ही फिर से होगी जांच

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CPM लीडर के आरोपों से हुई नवीन बाबू की मौत? नई कैबिनेट बनते ही फिर से जांच

Last Updated:May 09, 2026, 01:25 IST

नवीन बाबू की रहस्यमयी मौत के मामले में कई सवाल मौजूद हैं. पुरानी पुलिस इन्वेस्टिगेशन से लोगों का भरोसा उठ चुका है. मौत से पहले सीपीएम लीडर पीपी दिव्या ने नवीन बाबू पर घूसखोरी का आरोप लगाया था. विदाई समारोह में बिना बुलाए पहुंचकर भारी बवाल काटा गया था. यह सारे आरोप प्रशांतन नाम के एक शख्स ने लगाए थे. इन आरोपों के बाद ही नवीन बाबू की मौत का खौफनाक कांड हुआ था.

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CPM लीडर के आरोपों से हुई नवीन बाबू की मौत? नई कैबिनेट बनते ही फिर से जांचZoomकन्नूर के पूर्व एडीएम नवीन बाबू के मौत की जांच फिर से शुरू हो सकती है.

तिरुवनंतपुरम. केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ की प्रचंड चुनावी जीत के बाद पूर्व कन्नूर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) नवीन बाबू की रहस्यमयी मौत का मामला एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में लौटता दिख रहा है. संकेत मिल रहे हैं कि नई सरकार इस मामले में सीबीआई जांच या निष्पक्ष पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम से नई जांच करा सकती है. इस मुद्दे ने तब और तूल पकड़ लिया जब केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के महासचिव और रन्नी से नवनिर्वाचित विधायक पझकुलम मधु ने कहा कि नई कैबिनेट के गठन के तुरंत बाद इस मामले को प्राथमिकता के साथ उठाया जाएगा.

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “जिस दिन यह घटना हुई थी, उसी दिन से मैं परिवार के साथ खड़ा हूं. अब नई सरकार बनने जा रही है, तो हम इस मामले को मजबूती से उठाएंगे. कांग्रेस नीत यूडीएफ लगातार सीबीआई जांच की मांग करती रही है. सरकार के शपथ लेने के बाद मैं और अन्य नेता इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे.”

पझकुलम मधु उन नेताओं में शामिल रहे हैं जिन्होंने नवीन बाबू को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन का नेतृत्व किया था. उनका कहना है कि मामले में अब भी कई सवालों के जवाब नहीं मिले हैं और पहले की जांच भरोसा पैदा करने में विफल रही. नवीन बाबू की मौत के बाद उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब सीपीआई(एम) की वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पीपी दिव्या ने एक विदाई समारोह के दौरान उन पर रिश्वत लेने के आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से निशाना साधा था. यह आरोप प्रशांतन नामक व्यक्ति ने लगाए थे. बताया गया था कि दिव्या बिना निमंत्रण के कार्यक्रम में पहुंची थीं.

यूडीएफ और नवीन बाबू के परिवार ने लगातार आरोप लगाया है कि जांच एजेंसियों ने दिव्या और प्रशांतन के बीच संबंधों या कथित रिश्वत के लिए जुटाए गए पैसों के स्रोत की गंभीरता से जांच नहीं की. मामले से जुड़े विवादित पेट्रोल पंप को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इसमें बेनामी लेनदेन और प्रभावशाली राजनीतिक संबंधों की भूमिका हो सकती है.

कांग्रेस नेताओं का मानना है कि पूरे प्रकरण के ‘असल मास्टरमाइंड’ का पता केवल विस्तृत जांच से ही चल सकता है. विधानसभा चुनाव में वाम मोर्चे की करारी हार के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवीन बाबू मामला नई यूडीएफ सरकार की शुरुआती बड़ी परीक्षाओं में से एक बन सकता है. सीपीआई(एम) के लिए यह मामला अब भी एक असहज छाया बना हुआ है, जिसे सत्ता परिवर्तन के बाद फिर से सार्वजनिक बहस के केंद्र में लाया जा सकता है.

About the AuthorRakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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Thiruvananthapuram,Kerala

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