कांग्रेस ने ऐसा धोखा दिया, अब DMK साथ भी नहीं बैठना चाहती; ओम बिरला को पत्र लिख लोकसभा में मांगी अलग सीट

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कांग्रेस ने ऐसा धोखा दिया, DMK साथ नहीं बैठना चाहती; लोकसभा में अलग सीट मांगी
Last Updated:May 08, 2026, 19:29 IST
तमिलनाडु इलेक्शन में कांग्रेस ने डीएमके के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. लेकिन रिजल्ट के बाद कांग्रेस ने अपना पालीटिकल गेम एकदम बदल दिया. कांग्रेस ने एक्टर विजय की पार्टी टीवीके को अपना सपोर्ट दे दिया. इस एक्शन से डीएमके के भीतर गुस्सा भड़क गया. डीएमके ने कांग्रेस पर पॉलीटिकल धोखे का आरोप लगाया है.
कनिमोझी ने पत्र में डीएमके सांसदों के बैठने के लिए अलग ब्लॉक की मांग की है. (फाइल फोटो)
चेन्नई. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बीच द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने लोकसभा में अपने सांसदों के लिए अलग सीटिंग व्यवस्था की मांग की है. डीएमके संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पार्टी सांसदों के लिए सदन में अलग ब्लॉक आवंटित करने का अनुरोध किया है.
अपने पत्र में कनिमोझी ने कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन समाप्त होने के बाद दोनों दलों के राजनीतिक संबंधों में बड़ा बदलाव आया है. ऐसे में डीएमके सांसदों का कांग्रेस सांसदों के साथ पहले जैसी बैठक व्यवस्था में बने रहना उचित नहीं है. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि डीएमके संसदीय दल के लिए अलग सीटिंग व्यवस्था की जाए ताकि पार्टी सांसद प्रभावी ढंग से अपनी संसदीय जिम्मेदारियां निभा सकें.
यह घटनाक्रम तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के बीच सामने आया है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने डीएमके गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) को समर्थन दे दिया.
कांग्रेस के इस कदम पर डीएमके नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस पर “राजनीतिक विश्वासघात” का आरोप लगाया था. नवनिर्वाचित डीएमके विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की बैठकों में भी कांग्रेस की खुले तौर पर आलोचना की गई थी. डीएमके नेताओं का कहना था कि कांग्रेस ने अहम राजनीतिक समय पर अपना रुख बदल लिया.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में अलग सीटिंग व्यवस्था की मांग प्रतीकात्मक होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है. यह दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है, जो लंबे समय तक तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति में सहयोगी रहे हैं.
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस घटनाक्रम का राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता पर असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्रीय दल भविष्य के संसदीय चुनावों को लेकर अपनी रणनीति फिर से तय कर रहे हैं. फिलहाल कांग्रेस और लोकसभा सचिवालय की ओर से कनिमोझी के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष का कार्यालय संसदीय प्रक्रियाओं और सदन के नियमों के तहत इस अनुरोध पर विचार करेगा.
About the AuthorRakesh Ranjan Kumar
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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