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Earthquake News: भारत के पड़ोस में कांपी धरती, आधी रात बाद तिब्बत में जोरदार भूकंप, नींद से जगकर भागे लोग

Last Updated:May 08, 2026, 07:13 IST

Earthquake News: भारत के पड़ोस तिब्बत में आज यानी शुक्रवार तड़के 4.1 तीव्रता का भूकंप आया. इस भूकंप से किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है. इस भूकंप का केंद्र 38 किलोमीटर गहराई पर था. भूकंप के झटकों से लोग घरों से बाहर निकल आए.भारत के पड़ोस में कांपी धरती, आधी रात बाद तिब्बत में जोरदार भूकंप, डर गए लोगZoomतिब्बत में 4.1 तीव्रता का भूकंप (फाइल फोटो)

Earthquake News Today: भारत के पड़ोस में एक बार फिर धरती कांपी है. तिब्बत में आज तड़के सुबह जोरदार भूकंप आया. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के अनुसार, यह भूकंप आज यानी शुक्रवार तड़के करीब 3.10 बजे तिब्बत में आआ. इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.1 थी. भूकंप के झटके से लोगों की नींद खुल गई. कोई बड़ा खतरा जान लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. भूकंप की तीव्रता भले कम थी, मगर झटके ने लोगों को अच्छे से हिला दिया.

एनसीएस के मुताबिक, भूकंप का केंद्र तिब्बत में 35.385 डिग्री उत्तर अक्षांश और 85.112 डिग्री पूर्व देशांतर पर था. इस भूकंप की गहराई धरती से 38 किलोमीटर अंदर थी. राहत की बात है कि इस भूकंप में किसी तरह के जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है. भले ही यह भूकंप सतही था, मगर यह काफी खतरनाक होते हैं. जी हां सतही (शैलो) भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में ज्यादा खतरनाक होते हैं. इसका कारण यह है कि सतही भूकंप की तरंगें सतह तक कम दूरी तय करती हैं, जिससे जमीन ज्यादा जोर से हिलती है, संरचनाओं को ज्यादा नुकसान होता है और जान-माल का नुकसान भी अधिक होता है.

तिब्बती पठार में टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण भूकंपीय गतिविधि देखी जाती है. तिब्बत और नेपाल एक प्रमुख भूगर्भीय फॉल्ट लाइन पर स्थित हैं, जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन प्लेट मिलती हैं, जिससे यहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं. यह क्षेत्र टेक्टोनिक उठाव के कारण भूकंपीय रूप से सक्रिय है, जो कभी-कभी हिमालय की चोटियों की ऊंचाई को भी बदल सकता है.

तिब्बती पठार को इसकी ऊंचाई भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के टकराव से क्रस्ट के मोटा होने के कारण मिली है, जिससे हिमालय का निर्माण हुआ. पठार के भीतर फॉल्टिंग स्ट्राइक-स्लिप और नॉर्मल मैकेनिज्म से जुड़ी है. पठार पूर्व-पश्चिम दिशा में फैला है, जिसे उत्तर-दक्षिण दिशा में ग्रैबन, स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग और जीपीएस डेटा से समझा जा सकता है.

उत्तर क्षेत्र में स्ट्राइक-स्लिप फॉल्टिंग प्रमुख टेक्टोनिक शैली है, जबकि दक्षिण में उत्तर-दक्षिण दिशा में नॉर्मल फॉल्ट्स पर पूर्व-पश्चिम विस्तार प्रमुख है. तिब्बत में सबसे बड़े भूकंप, जिनकी तीव्रता 8.0 या उसके आसपास होती है, स्ट्राइक-स्लिप फॉल्ट्स पर आते हैं. नॉर्मल-फॉल्टिंग भूकंप अपेक्षाकृत छोटे होते हैं; 2008 में, पठार में 5.9 से 7.1 तीव्रता के पांच नॉर्मल-फॉल्टिंग भूकंप आए थे.

About the AuthorShankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें

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