कौन है ‘मास्टरमाइंड’… राजस्थान कैसे बना चर्चा का केंद्र? पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी

जयपुर: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 आखिरकार विवादों के बाद रद्द कर दी गई है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा को पेपर लीक के ठोस संकेत मिलने के बाद निरस्त करने का फैसला लिया. इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सुराग राजस्थान से मिला, जिसके बाद राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और बाद में CBI ने जांच तेज कर दी है.
जानकारी के अनुसार 9 और 10 मई को राजस्थान SOG को इनपुट मिला कि सोशल मीडिया और टेलीग्राम ग्रुप्स पर एक 150 पेज की PDF वायरल हो रही है. इस PDF में कुल 410 सवाल मौजूद थे. जब जांच एजेंसियों ने इन सवालों का मिलान असली NEET पेपर से किया, तो केमिस्ट्री और बायोलॉजी के करीब 120 से 140 सवाल हूबहू मैच पाए गए. यहीं से पूरे देश में सनसनी फैल गई और पेपर लीक की आशंका मजबूत हो गई.
राजस्थान बना जांच का सबसे बड़ा केंद्र
राजस्थान पुलिस की शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि पेपर राजस्थान से लीक नहीं हुआ था, लेकिन यहीं से यह नेटवर्क तेजी से फैला. SOG IG अजय पाल लांबा के अनुसार प्रश्नपत्र महाराष्ट्र के नासिक स्थित प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था. वहां से यह हरियाणा के नेटवर्क तक पहुंचा और फिर राजस्थान के सीकर, जयपुर, झुंझुनूं और चूरू तक फैल गया. सीकर देश का बड़ा कोचिंग हब माना जाता है. जांच एजेंसियों को पता चला कि यहां परीक्षा से पहले ही “पेपर सेट होने” की चर्चाएं चल रही थीं. कुछ छात्रों ने अपने परिचितों को पहले ही दावा कर दिया था कि उन्हें एग्जाम से पहले प्रश्नपत्र मिल जाएगा.
टेलीग्राम-व्हाट्सएप से चला पूरा खेल
पुलिस जांच में सामने आया कि “Private Mafia” जैसे टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए छात्रों और अभिभावकों से संपर्क किया गया. पेपर की कीमत 2 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक बताई गई. एजेंट निजी संपर्कों के जरिए छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचा रहे थे. जांच में यह भी सामने आया कि कुछ छात्रों तक यह पेपर परीक्षा से करीब 15 दिन पहले पहुंच चुका था, जिससे उन्हें बड़ी बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है.
कौन है ‘मास्टरमाइंड’
जांच एजेंसियों के अनुसार जयपुर निवासी मनीष यादव को इस पूरे नेटवर्क का मुख्य मास्टरमाइंड माना जा रहा है. वहीं सीकर के काउंसलर राकेश मंडावरिया ने पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया कि उसने 5 लाख रुपये में पेपर खरीदा और आगे सप्लाई किया था. अब तक 20 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है, जबकि 150 से अधिक छात्रों और अभिभावकों से पूछताछ जारी है.
गुरुग्राम गैंग और 30 लाख की डील.
मामले में एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि गुरुग्राम की एक गैंग ने 26 अप्रैल को जयपुर के जमवारामगढ़ निवासी दो भाइयों दिनेश और मांगीलाल को लगभग 30 लाख रुपये में पेपर उपलब्ध कराया था. बताया जा रहा है कि दोनों ने अपने बेटों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए यह डील की थी. इसके बाद 29 अप्रैल को वे सीकर पहुंचे, जहां कई अन्य छात्रों तक भी यह पेपर पहुंचाया गया.
CBI ने संभाली जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी है. दिल्ली से आई 12 सदस्यीय टीम जयपुर पहुंच चुकी है और राजस्थान SOG से केस की सभी फाइलें अपने हाथ में ले ली हैं. अब जांच एजेंसियों की नजर महाराष्ट्र के नासिक प्रिंटिंग प्रेस, हरियाणा नेटवर्क और राजस्थान कनेक्शन पर टिकी हुई है.
Re-NEET को लेकर क्या है अपडेट
NTA ने स्पष्ट किया है कि दोबारा आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए विद्यार्थियों को नया आवेदन भरने या अतिरिक्त फीस जमा करने की जरूरत नहीं होगी. पुराने रजिस्ट्रेशन डेटा के आधार पर ही नए एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे. सूत्रों के मुताबिक Re-NEET की नई तारीखों की घोषणा अगले 7 से 10 दिनों के भीतर की जा सकती है. वहीं राजस्थान के कई संवेदनशील परीक्षा केंद्रों को बदला जा सकता है.
छात्रों में नाराजगी और चिंता
परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों का कहना है कि दोबारा परीक्षा उनके लिए मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ाने वाली होगी. वहीं कोचिंग संचालकों ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का समर्थन करते हुए भविष्य में ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली लागू करने की मांग की है.



