लीची के फल समय से पहले सड़कर गिर रहे? जानिए इसकी बड़ी वजह और रोकथाम

Last Updated:May 16, 2026, 08:38 IST
शाहजहांपुर में लीची की फसल पर ‘फ्रूट फ्लाई’ यानी फल मक्खी का कहर मंडरा रहा है, जिससे फल सड़कर गिर रहे हैं. डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने किसानों को बागों में स्वच्छता रखने, प्रभावित फलों को मिट्टी में दबाने और ‘डेल्टामेथ्रिन 2.8% EC’ दवा का छिड़काव करने की वैज्ञानिक सलाह दी है.
शाहजहांपुर: किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब उद्यान की खेती भी कर रहे है. कई किसान हैं जो लीची की बागवानी कर रहे हैं लेकिन इन दिनों लीची की फसल पर कीटों का खतरा मंडरा रहा है. वर्तमान समय में लीची की फसल में फ्रूट फ्लाई यानी फल मक्खी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे फल खराब होकर गिरने लगते हैं. जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों को इस समस्या से निपटने और अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंधन और वैज्ञानिक उपाय अपनाने की सलाह दी है. अगर समय रहते इसका नियंत्रण नहीं किया गया, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि लीची में लगने वाली फ्रूट फ्लाई ठीक वैसी ही होती है जैसी आम की फसल में पाई जाती है। यह मक्खी फल के भीतर अंडे देती है, जिससे बाद में मैगट यानी कीड़ा विकसित होकर फल को अंदर से खोखला कर देता है. इससे बचाव के लिए प्रभावित और गिरे हुए फलों को इकट्ठा करके मिट्टी में गहरा दबा देना चाहिए. इसके साथ ही, रोकथाम के लिए डेल्टामेथ्रिन 2.8% EC )DELTAMETHRIN 2.8% EC) का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर देना चाहिए.
लीची की फसल पर फल मक्खी का हमला
शाहजहांपुर जिले में इन दिनों लीची के बागों में फ्रूट फ्लाई यानी फल मक्खी का आतंक देखा जा रहा है. यह कीट लीची की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है. यह मक्खी फलों के पकने के समय सबसे ज्यादा सक्रिय होती है. इसके प्रकोप के कारण लीची के फल समय से पहले ही सड़कर पेड़ों से गिरने लगते हैं, जिससे बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है.
कीट के पनपने की प्रक्रिया और नुकसान
डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने इस कीट के जीवन चक्र को समझाते हुए बताया कि फ्रूट फ्लाई फलों की ऊपरी त्वचा में छेद करके अपने अंडे उसके अंदर छोड़ देती है. अंडों से निकलने वाले मैगट लार्वा फल के गूदे को खाना शुरू कर देते हैं. धीरे-धीरे यह कीड़ा फल के अंदर ही पूरी तरह विकसित हो जाता है, जिससे फल अंदर से पूरी तरह खराब हो जाता है. बाहर से फल सामान्य दिखने के बावजूद अंदर से पूरी तरह नष्ट हो जाता है.
स्वच्छता और बुनियादी प्रबंधन है जरूरी
इस समस्या से निपटने के लिए उद्यान अधिकारी ने किसानों को सबसे पहले बागों में स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जो फल कीट के प्रभाव से ग्रसित होकर जमीन पर गिर चुके हैं, उन्हें कतई खुला न छोड़ें. ऐसे सभी प्रभावित फलों को तुरंत इकट्ठा करें और बाग से दूर किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाकर मिट्टी में गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें. ऐसा करने से कीट के आगे फैलने की प्रक्रिया पर रोक लगती है.
रासायनिक नियंत्रण और छिड़काव की विधि
कीट पर पूरी तरह काबू पाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से रासायनिक छिड़काव करने की जरूरत है. उद्यान विभाग ने इसके लिए डेल्टामेथ्रिन 2.8% EC दवा की सिफारिश की है. किसानों को इस दवा की 1 ml मात्रा को प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाकर अपनी लीची की फसल पर अच्छी तरह छिड़काव करना चाहिए. इस विधि को अपनाकर किसान फ्रूट फ्लाई की समस्या से अपनी फसल को पूरी तरह बचा सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.
About the AuthorVivek Kumar
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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