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SMS Hospital Jaipur | एसएमएस अस्पताल में रोबोटिक्स एक्सरसाइज सेंटर

Last Updated:May 16, 2026, 08:22 IST

Free Robotics Exercise SMS Hospital Jaipur: जयपुर के एसएमएस अस्पताल के 50 साल पुराने RRC सेंटर में प्रदेश का पहला फ्री रोबोटिक्स एक्सरसाइज सेंटर तैयार हो रहा है. बजट घोषणा के तहत करोड़ों की लागत से बन रहे इस एआई-बेस्ड सेंटर में मशीनों का इंस्टालेशन शुरू हो चुका है. अगले दो महीनों में स्ट्रोक, पैरालिसिस और स्पाइनल इंजरी के मरीजों को रोबोटिक असिस्टेड थेरेपी मिलने लगेगी. यह तकनीक सटीक एंगल और अधिक रिपीटेशन के जरिए मरीजों की नसों को जल्द एक्टिव कर रिकवरी तेज करेगी.

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अब रोबोट कराएंगे मरीजों को फ्री एक्सरसाइज, जानें कब से शुरू होगी सुविधाZoomएसएमएस अस्पताल में रोबोटिक्स एक्सरसाइज सेंटर

Free Robotics Exercise SMS Hospital Jaipur: जयपुर में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में लोगों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए लगातार नए नवाचार किए जा रहे हैं. इसीलिए लगातार अस्पताल में अलग-अलग बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इंस्टीट्यूट और अत्याधुनिक सेंटर शुरू किए जा रहे हैं. पिछले 2 सालों में सवाई मानसिंह अस्पताल में जेनेटिक टेस्टिंग लैब और टॉक्सिकोलॉजी लैब जैसी तमाम हाइटेक लैब्स की शुरुआत की गई है. इसी कड़ी में अब अस्पताल में लोगों के लिए जल्द ही रोबोट के माध्यम से एक्सरसाइज कराने की सुविधा मिलेगी.

इस नई सुविधा के लिए अस्पताल के 50 साल पुराने आरआरसी (RRC) सेंटर में रोबोटिक एक्सरसाइज सेंटर स्थापित किया जाएगा. एसएमएस हॉस्पिटल में रोबोट के साथ एक्सरसाइज करने का अनुभव पेशेंट्स के लिए न सिर्फ रुचिकर होगा, बल्कि एनर्जी और पैसे की बचत के लिहाज से भी खास रहेगा. रोबोटिक्स एक्सरसाइज से मांसपेशियों की जकड़न की परेशानी से जूझ रहे मरीज जल्दी चलना-फिरना शुरू कर पाएंगे और साथ ही उनकी क्वालिटी ऑफ लाइफ भी बेहतर होगी. यह रोबोटिक्स एक्सरसाइज सेंटर बजट घोषणा के तहत तैयार किया जा रहा है, जिसमें मरीजों के लिए करोड़ों की लागत की रोबोटिक्स मशीनें होंगी.

हर दिन आने वाले 400 से अधिक मरीजों की होगी बड़ी बचतसवाई मानसिंह अस्पताल में मरीजों को हर प्रकार की बीमारियों और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी हर समस्या का इलाज मिलता है. ऐसे ही अस्पताल में रोजाना करीब 300 से 400 पेशेंट्स मसल्स से जुड़े दर्द, स्पाइन सहित अन्य इंजरी के इलाज के लिए आते हैं. उन्हें डॉक्टर्स की सलाह पर फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज की हिदायत दी जाती है. इसके लिए रोबोटिक एक्सरसाइज यानी रोबोट असिस्टेड थेरेपी सबसे मददगार साबित होती है. इसके लिए मरीज अभी प्राइवेट फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज सेंटरों पर जाते हैं जहां हजारों रुपए का खर्च आता है. लेकिन अब एसएमएस अस्पताल में ही मशीनों के इंस्टालेशन का काम शुरू हो चुका है. लगभग 2 महीने में मरीजों को यहां रोबोटिक्स एक्सरसाइज की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी. इसका सबसे बड़ा फायदा फिजियोथेरेपी और रिहेबलिटेशन में स्ट्रोक, स्पाइनल इंजरी, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं, ऑर्थोपेडिक सर्जरी या पैरालिसिस पेशेंट्स को मिलेगा.

रोबोटिक्स एक्सरसाइज से कैसे मिलती है मरीजों को तेज राहत?फिजियोथेरेपी और रिहेबलिटेशन के मरीजों के लिए रोबोटिक्स एक्सरसाइज सबसे ज्यादा फायदेमंद है. इसमें स्ट्रोक या स्पाइनल इंजरी होने पर रोबोटिक्स एक्सरसाइज से रिकवरी तेज होगी. रोबोटिक्स एक्सरसाइज से रिपिटेशन बढ़ने से मांसपेशियां और नसें जल्दी एक्टिव होती हैं. इससे रिकवरी की स्पीड बढ़ती है, जबकि व्यक्ति के द्वारा एक्सरसाइज करवाने से जितने रिपीटेशन की ज़रूरत होती है, उतने रिपीटेशन नहीं हो पाते हैं. ना ही एक्सरसाइज के लिए जितना फोर्स चाहिए, उतना फोर्स मिल पाता है. सटीक एंगल और सही स्पीड पर एक्सरसाइज करवाने से गलत मूवमेंट की संभावना कम होती है, जिससे इंजरी का रिस्क घटता है. इसलिए रोबोटिक्स एक्सरसाइज बेहद जल्दी राहत देती है. साथ ही स्ट्रोक या पैरालिसिस के पेशेंट्स जो हाथ-पैर नहीं हिला पाते हैं, रोबोट उन्हें सहारा देकर चलने, पकड़ने और मूवमेंट दोबारा सीखने में मदद करता है.

एआई बेस्ड रोबो रखेगा हर सेशन का पूरा डेटा रिकॉर्डएसएमएस अस्पताल में रोबोटिक्स एक्सरसाइज के लिए आने वाले मरीजों को कई अन्य फायदे भी मिलेंगे. जैसे नियमित रोबोटिक थेरेपी से मसल स्ट्रेंथ बढ़ती है और शरीर का संतुलन बेहतर होता है. इससे चलने-फिरने की क्षमता में तेजी से सुधार होता है. रोबोट मरीज की क्षमता के अनुसार एक्सरसाइज का दबाव तय करते हैं, जिससे ओवर-एक्सर्शन नहीं होता है जिसके चलते दर्द व थकान कम रहती है. रोबोटिक्स एक्सरसाइज की खास मशीनें और रोबोट पूरी तरह एआई (AI) बेस्ड होते हैं. इसलिए रोबोट मूवमेंट, ताकत और सुधार के हर सेशन का डेटा रिकॉर्ड करता है. इस रिकॉर्ड का फायदा डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट को मिलता है, जिससे पेशेंट्स की प्रोग्रेस को ट्रैक करने में मदद मिलती है. रोबोटिक सिस्टम गेम-आधारित या इंटरेक्टिव होते हैं, जिसके चलते मरीजों का मोटिवेशन बढ़ने से वे नियमित थेरेपी से जुड़े रहते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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