NEET UG Paper Leak Case: पिता ने लुटाए लाखों, लीक पेपर भी हाथ में था.. पर बेटा 720 में से सिर्फ 107 नंबर ही ला सका

Last Updated:May 16, 2026, 08:27 IST
NEET UG Paper Leak Case: नीट पेपर लीक मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. आरोपी दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि के लिए 10 लाख रुपये में पेपर खरीदा था. भारी-भरकम रकम खर्च करने के बावजूद बेटा 720 में से महज 107 नंबर ही ला सका. सीबीआई की जांच में नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं.NEET UG Paper Leak Case: नीट यूजी पेपर लीक विवाद की जांच सीबीआई के हाथों में है
नई दिल्ली (NEET UG Paper Leak Case). देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी 2026 को लेकर चल रही सीबीआई जांच में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. इस बार जांच की आंच राजस्थान के सीकर जिले तक पहुंच गई है, जहां एक पिता की अपने बेटे को ‘शॉर्टकट’ से डॉक्टर बनाने की कोशिश ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है. सीबीआई के अनुसार, आरोपी दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल को नीट यूजी परीक्षा पास कराने के लिए करीब 10 लाख रुपये में लीक प्रश्नपत्र खरीदा था.
हैरानी की बात तो यह है कि पेपर पहले मिल जाने के बावजूद ऋषि का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. जांच एजेंसियों के मुताबिक, ऋषि 720 अंकों के नीट यूजी पेपर में केवल 107 नंबर ही ला सका. सोशल मीडिया पर ऋषि की कथित मार्कशीट वायरल होने के बाद यह मामला और गरमा गया है, जिसमें वह ग्रेस मार्क्स के सहारे 12वीं की परीक्षा में भी जैसे-तैसे पास हुआ था. इससे पता चलता है कि किस तरह पैसों के दम पर काबिल बच्चों का भविष्य छीनने की कोशिश की गई, लेकिन अंत में ‘नकल’ भी काम नहीं आई.
सीकर का फ्लैट और टेलीग्राम का खेल
सीबीआई की पूछताछ में दिनेश बिवाल ने कबूल किया है कि उसने यह पूरी साजिश सीकर के एक फ्लैट से रची थी. जांच में पता चला है कि यह फ्लैट पेपर लीक नेटवर्क का ‘कंट्रोल रूम’ बना हुआ था. यहां से टेलीग्राम और WhatsApp ग्रुप्स के जरिए प्रश्नपत्रों की पीडीएफ फाइल्स को कूरियर और एजेंट्स के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया जाता था. दिनेश खुद इस नेटवर्क में एक कड़ी की तरह काम कर रहा था, जो न केवल अपने बेटे बल्कि अन्य उम्मीदवारों तक भी सामग्री पहुंचाने में शामिल था.
10 लाख की डील और 107 नंबर का ‘धमाका’
आज तक और हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, जांच अधिकारियों का कहना है कि दिनेश बिवाल ने नीट पेपर के लिए लगभग 10 लाख रुपये का भुगतान किया था. उसे उम्मीद थी कि पेपर हाथ में होने से उसका बेटा टॉप मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की कर लेगा. लेकिन पिता के अरमानों पर पानी फिर गया. नीट यूजी लीक पेपर रटने के बाद भी छात्र का 107 नंबर लाना साबित करता है कि धांधली करने वाले गिरोह सिर्फ पैसे ऐंठने में माहिर हैं, उनका शिक्षा या योग्यता से कोई लेना-देना नहीं है.
2025 के रिकॉर्ड पर भी टिकी सीबीआई की नजर
दिनेश बिवाल पहली बार जांच के घेरे में नहीं आया है. साल 2025 में उसने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी, जिसमें दावा किया गया था कि उसके परिवार के 5 बच्चों ने एक साथ नीट परीक्षा क्लियर की है. अब सीबीआई इस बात की भी गहराई से जांच कर रही है कि क्या पिछले साल भी इसी तरह पेपर लीक के जरिए उन बच्चों का दाखिला कराया गया था. एजेंसी को शक है कि यह नेटवर्क पिछले कई सालों से सक्रिय है और हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है.
150 छात्र रडार पर, सबूत मिटाने की कोशिश
इस जांच में अब तक करीब 150 ऐसे छात्रों की पहचान की गई है जिनके संबंध इस गिरोह से हो सकते हैं. सीबीआई ने अदालत को सूचित किया है कि इस मामले में बड़े पैमाने पर डिजिटल सबूतों को मिटाने और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के संकेत मिले हैं. जांच का दायरा अब सीकर से निकलकर गुरुग्राम, नासिक और राजस्थान के अन्य हिस्सों तक फैल गया है. सीबीआई अब उस ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में है जिसने सबसे पहले परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाई थी.
About the AuthorDeepali PorwalSenior Sub Editor
Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें
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