Soni Ji Ki Nasiya Ajmer | अजमेर सोनी जी की नसिया का इतिहास

Last Updated:May 16, 2026, 12:29 IST
Soni Ji Ki Nasiya Ajmer Golden Temple Mystery: अजमेर स्थित 165 वर्ष पुरानी ‘सोनी जी की नसिया’ अपनी भव्य शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है, जिसे 2500 कारीगरों ने 25 साल में बनाया था. इसके निर्माण के लिए मकराना की संगमरमर खदानें ही खरीद ली गई थीं. इसका मुख्य आकर्षण 1150 किलो सोने से बना ‘अयोध्या नगरी’ का मॉडल है, जिसमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की जीवन गाथा दिखाई गई है. इसे 1865 में स्थापित किया गया था और आज यह वैश्विक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है.
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Ajmer Golden Temple Mystery: राजस्थान के हृदय स्थल अजमेर शहर में स्थित ‘सोनी जी की नसिया’ जैन धर्म का एक अत्यंत प्रसिद्ध, ऐतिहासिक और बेहद भव्य तीर्थ स्थल है. करीब 165 वर्ष पुरानी यह नसिया अपनी अनूठी स्थापत्य कला, गहरे धार्मिक महत्व और अलौकिक स्वर्णिम सजावट के कारण देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. यह अद्वितीय धार्मिक धरोहर न केवल जैन संस्कृति की समृद्ध और महान परंपरा को दर्शाती है, बल्कि राजस्थान की अद्भुत शिल्पकला और वास्तुकला का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करती है.
सोनी जी की नसिया की देखरेख से जुड़े प्रबंधकों और सदस्यों ने बताया कि इस भव्य नसिया का निर्माण तत्कालीन प्रसिद्ध सरसेठ श्री रायबहादुर मूलचंद जी सोनी द्वारा कराया गया था. इसके निर्माण कार्य की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 2500 कुशल कारीगरों ने लगातार 25 वर्षों तक दिन-रात मेहनत की थी, जिसके बाद यह अद्भुत धरोहर इस सुंदर आकार में सामने आ सकी. नसिया के निर्माण में मकराना के सबसे उत्कृष्ट संगमरमर पत्थरों का उपयोग किया गया है. इसकी सबसे खास बात यह रही कि पत्थरों को खुले बाजार से खरीदने के बजाय सेठ साहब ने आवश्यकता पड़ने पर मकराना की पूरी खदानें ही खरीद ली थीं. यही कारण है कि नसिया की यह ऐतिहासिक इमारत आज भी अपनी बेजोड़ मजबूती और अद्वितीय भव्यता के लिए विश्वभर में पहचानी जाती है.
1150 किलो सोने से बनी है यहां की ‘अयोध्या नगरी’सोनी जी की नसिया का सबसे बड़ा और अलौकिक आकर्षण इसके भीतर बनी ‘अयोध्या नगरी’ का स्वर्णिम दृश्य है. इस अद्भुत और कलात्मक मॉडल के निर्माण में लगभग 1150 किलोग्राम (किलो) शुद्ध सोने का उपयोग किया गया है. इस स्वर्ण नगरी के भीतर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जीवन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण प्रसंगों को अत्यंत सुंदर और सजीव ढंग से दर्शाया गया है. इस मॉडल में भगवान ऋषभदेव के जन्म, उनकी शिक्षा-दीक्षा, राजसी जीवन और वैराग्य धारण करने की बेहद मनमोहक झलकियां देखने को मिलती हैं. इस दिव्य और भव्य मॉडल को तैयार करने में भी करीब 30 विशेष कारीगरों ने 20 वर्षों तक निरंतर बारीकी से कार्य किया था.
अल्बर्ट हॉल में प्रदर्शन के बाद अजमेर में की गई थी स्थापितइतिहास के पन्नों को पलटें तो जब यह अद्भुत स्वर्णिम मॉडल पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ था, तब इसकी भव्यता को देखने के लिए इसे सबसे पहले जयपुर के प्रसिद्ध अल्बर्ट हॉल संग्रहालय में आम जनता के दर्शनार्थ तीन दिनों तक प्रदर्शित किया गया था. इसके बाद वर्ष 1865 में इसे ससम्मान अजमेर लाकर सोनी जी की नसिया के मुख्य गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया. आज यह ऐतिहासिक स्थल अजमेर की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान बन चुका है, जिसे देखने और इसके स्वर्णिम इतिहास को करीब से महसूस करने के लिए सालभर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का तांता लगा रहता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Location :
Ajmer,Ajmer,Rajasthan



