सड़कों पर बेचा पानी, वड़ा पाव खाकर काटे दिन, 1 फिल्म से हिला डाला बॉक्स ऑफिस, जीता नेशनल अवॉर्ड

Last Updated:May 17, 2026, 05:01 IST
कभी एक्टर सड़कों पर पानी की केन बेचता था. होटलों में काम करते हुए हीरो बनने के सपने देखता था. फिल्म मेकर्स की गाड़ी चलाते हुए सिनेमा की बारीकियां समझीं. स्पॉट बॉय बनकर फिल्मों की शूटिंग को समझा. करीब 10 साल स्ट्रगल करने के बाद एक्टर ने एक फिल्म बनाई, जिसने बॉक्स ऑफिस से 400 करोड़ रुपये कमाए और खुद नेशनल अवॉर्ड जीतकर स्टार बन गया.
नई दिल्ली: अगर आपके इरादे मजबूत हों, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है. किसी ने क्या कभी सोचा होगा कि एक मामूली स्पॉट बॉय नेशनल स्टार बन जाएगा? मगर आज लोग उसकी एक्टिंग की मिसाल देते हैं. इन सब की शुरुआत एक हीरो बनने के सपने से हुई. वरना सड़कों पर पानी बेचने वाले, होटलों में काम करने वाले लोग यूं ही खपते रहते हैं. वह सपने की ताकत ही थी कि साल 2022 में एक्टर एक ऐसी फिल्म लेकर आया, जिसने सिनेमा को देखने का नजरिया ही बदल दिया. दुनिया भर में फिल्म और उनके अभिनय की तारीफ हुई. आज उन्हें पूरा देश जानता है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने जो मेहनत और संयम बर्ता होगा, शायद कोई इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता. (फोटो साभार: Instagram@rishabshettyofficial)
साल 1983 में दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव केराडी में जन्मे ऋषभ शेट्टी का पालन-पोषण एक बहुत ही साधारण परिवार में हुआ था. बचपन से ही उन्हें अपने इलाके की लोक कला ‘यक्षगान’ और कहानियां सुनने-सुनाने का गहरा शौक था. यही वह शौक था, जिसने आगे चलकर उनके भीतर के कलाकार को जिंदा रखा और उन्हें सिनेमा की दुनिया की तरफ खींचा.
बेंगलुरु से बी.कॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद ऋषभ के पास बंधी-बंधाई नौकरी करने का पूरा मौका था. लेकिन उन्होंने एक आसान रास्ता चुनने के बजाय अभिनय की अनिश्चित डगर को चुना, जहां कामयाबी की कोई गारंटी नहीं थी. वह थिएटर करने लगे और बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में अपना खर्च चलाने के लिए जो भी काम मिला, उसे करने को तैयार हो गए.
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ऋषभ ने स्ट्रगल के दिनों में बेंगलुरु की तपती सड़कों पर 20 लीटर वाले मिनरल वाटर के कैन बेचने का काम शुरू किया. यह उनके उन शुरुआती कामों में से एक था, जो उन्होंने सिर्फ इसलिए किया ताकि वह अपने एक्टिंग के सपने को जिंदा रख सकें. पैसों की तंगी के बावजूद उनका हौसला कभी डगमगाया नहीं और वह लगातार मेहनत करते रहे.
ऋषभ ने होटलों में भी काम किया, जहां वह लंबी-लंबी शिफ्ट्स में जी-तोड़ मेहनत करते थे. होटल के काम से थकने के बाद भी वह फिल्मों और यक्षगान के अपने जुनून को कम नहीं होने देते थे. इसके अलावा, उन्होंने चाय का पाउडर बेचने, सोलर पैनल की मार्केटिंग करने से लेकर रियल एस्टेट तक में हाथ आजमाया और करीब एक दशक तक हर छोटी-बड़ी नौकरी की. (फोटो साभार: Instagram@rishabshettyofficial)
ऋषभ किस्मत आजमाने के लिए सपनों की नगरी मुंबई भी चले आए. वहां उन्होंने फिल्म मेकर्स के लिए एक ड्राइवर के रूप में गाड़ियां चलाईं और अंधेरी के दफ्तरों में ऑफिस बॉय का काम किया. उस दौर में उनके पास इतने पैसे भी नहीं होते थे कि वह भरपेट खाना खा सकें, इसलिए वे अक्सर सिर्फ वड़ा पाव खाकर पूरा दिन गुजार देते थे.
ऋषभ शेट्टी हर काम से कुछ न कुछ सीख रहे थे. उन्होंने बेंगलुरु के गवर्नमेंट फिल्म इंस्टीट्यूट से फिल्म डायरेक्शन का डिप्लोमा लिया और कन्नड़ सिनेमा में क्लैप बॉय, स्पॉट बॉय और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम करना शुरू किया. धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाएं मिलने लगीं. उन्होंने साल 2016 में आई सुपरहिट फिल्म ‘किरिक पार्टी’ से बतौर डायरेक्टर अपनी पहचान बनाई.(फोटो साभार: Instagram@rishabshettyofficial)
ऋषभ के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2022 में आया, जब उन्होंने ‘कांतारा’ फिल्म की कहानी लिखी, खुद उसे डायरेक्ट किया और लीड किरदार ‘शिवा’ को पर्दे पर जिंदा कर दिया. कर्नाटक की दैव संस्कृति पर आधारित इस फिल्म ने दुनियाभर में 400 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और ऋषभ को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला. आज वह अपनी पत्नी प्रगति और दो बच्चों के साथ एक खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@rishabshettyofficial)
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