Rajasthan

जहां हर हथौड़े की चोट सुनाती है इतिहास, जयपुर का ठठेरों का रास्ता बना विरासत की पहचान

X
title=

ठठेरों का रास्ता: जहां ठक-ठक की आवाज बन गई रोजगार की पहचान

 

arw img

जयपुर के ऐतिहासिक चारदीवारी क्षेत्र में स्थित ठठेरों का रास्ता आज भी सदियों पुरानी ठठेरा कला की जीवंत पहचान बना हुआ है. यहां के कारीगर पीढ़ी दर पीढ़ी तांबा, पीतल और कांसे के बर्तन तथा धार्मिक और सजावटी सामान हाथों से तैयार कर रहे हैं. महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय बसाए गए इन कारीगरों ने करीब 150 वर्षों से इस परंपरा को संजोकर रखा है. हालांकि मशीनीकरण और घटती मांग के कारण इस कला से जुड़े कारीगरों की संख्या लगातार कम हो रही है, फिर भी कई परिवार अपनी विरासत और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए इस पारंपरिक हुनर को जीवित रखे हुए हैं.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj