Rajasthan

Unique Medical Case: टीबी समझकर होता रहा इलाज, 7 साल बाद महिला के फेफड़े से निकली एक इंच लंबी सुपारी

Last Updated:June 16, 2026, 21:39 IST

Unique Medical Case: बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल चिकित्सा प्रक्रिया के जरिए 58 वर्षीय महिला के फेफड़े से करीब एक इंच लंबी सुपारी निकालकर उसे नया जीवन दिया. महिला पिछले सात वर्षों से लगातार खांसी, निमोनिया और सांस लेने में परेशानी से जूझ रही थी. कई शहरों में इलाज के बावजूद बीमारी का कारण सामने नहीं आया, लेकिन ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से चिकित्सकों ने फेफड़े में फंसी सुपारी को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया.महिला के खांसी-निमोनिया का रहस्य 7 साल बाद खुला, फेफड़े से निकली लंबी सुपारीZoom

बीकानेर. सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग ने एक जटिल और दुर्लभ चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 58 वर्षीय महिला को नया जीवन दिया है. रामदेवरा निवासी यह महिला पिछले सात वर्षों से लगातार खांसी, बार-बार निमोनिया, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी. कई शहरों के अस्पतालों में उपचार कराने और अनेक चिकित्सकों से परामर्श लेने के बावजूद उसकी बीमारी का सही कारण सामने नहीं आ पाया था. जानकारी के अनुसार, महिला ने जोधपुर, फलोदी सहित कई स्थानों पर उपचार कराया. उसकी सीटी स्कैन रिपोर्ट विशेषज्ञ राय के लिए मुंबई भी भेजी गई थी, जहां चिकित्सकों ने टीबी होने की आशंका जताई थी. इसके आधार पर आगे जांच और उपचार भी किया गया, लेकिन महिला की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. समय के साथ उसकी परेशानी बढ़ती गई और वह लंबे समय से शारीरिक व मानसिक कष्ट झेल रही थी. इसी दौरान रिश्तेदारों से जानकारी मिलने पर महिला पीबीएम अस्पताल के श्वसन रोग विभाग पहुंची. यहां विभागाध्यक्ष एवं वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. गुंजन सोनी ने उसकी विस्तृत जांच की.

फेफड़े में एक विदेशी वस्तु होने का संदेहजांच के दौरान चिकित्सकों को महिला के फेफड़े में एक विदेशी वस्तु होने का संदेह हुआ. आगे की जांच में पता चला कि उसके फेफड़े में करीब एक इंच लंबी सुपारी फंसी हुई है. चिकित्सकों के अनुसार, यह सुपारी संभवतः कई वर्ष पहले श्वास नली के माध्यम से फेफड़े में पहुंच गई थी और वहीं फंस गई थी. यही वस्तु लगातार संक्रमण, खांसी और सांस संबंधी समस्याओं का कारण बन रही थी. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉ. गुंजन सोनी ने अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया करने का निर्णय लिया. ब्रोंकोस्कोपी एक ऐसी आधुनिक तकनीक है, जिसमें दूरबीननुमा उपकरण के माध्यम से श्वास नलियों और फेफड़ों के भीतर पहुंचकर जांच और उपचार किया जाता है. यह प्रक्रिया काफी जटिल थी क्योंकि सुपारी लंबे समय से फेफड़े में फंसी हुई थी और उसके आसपास ऊतक विकसित हो चुके थे. करीब डेढ़ घंटे तक चले इस चुनौतीपूर्ण उपचार के दौरान चिकित्सकों ने अत्यंत सावधानी के साथ सुपारी को छोटे-छोटे हिस्सों में क्रश किया और फिर उसे बाहर निकाला. सफल प्रक्रिया के बाद महिला को तत्काल राहत महसूस हुई.

चिकित्सकों के अनुसार, अब उसकी सांस लेने की क्षमता में सुधार हो रहा है और लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं से भी राहत मिलने लगी है. महिला के पति ने बताया कि वर्षों तक विभिन्न अस्पतालों के चक्कर लगाने के बाद भी बीमारी का सही कारण पता नहीं चल पाया था. ऐसे में पीबीएम अस्पताल और डॉ. गुंजन सोनी की टीम ने उनकी उम्मीदों को नया जीवन दिया है. उन्होंने पूरी चिकित्सा टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पत्नी को नया जीवनदान मिला है.  इस सफल चिकित्सा प्रक्रिया में डॉ. गुंजन सोनी के साथ डॉ. अंकित, डॉ. वसुंधरा, डॉ. मनुदेव, डॉ. प्रवेश, डॉ. दिनेश, डॉ. विजय, नर्सिंग स्टाफ मंजू और हेल्पर विनोद का महत्वपूर्ण योगदान रहा. पीबीएम अस्पताल की इस सफलता को चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है.

About the AuthorMonali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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