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जितना हथियारों का इम्‍पोर्ट, उसके बेहद करीब पहुंचा भारत का घरेलू उत्‍पादन, अब सरहद की हिफाजत औरों के सहारा नहीं!

नई दिल्ली. कभी दुनिया के सामने हथियारों के लिए हाथ फैलाने वाला भारत आज रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की उस दहलीज पर खड़ा है, जिसकी कल्पना तक करना कभी नामुमकिन था. रक्षा मंत्रालय और आधिकारिक फैक्ट शीट से सामने आए ताजा जादुई आंकड़ों ने पूरी दुनिया के रणनीतिकारों को चौंका दिया है. भारत ने इस साल अपनी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद (Capital Acquisition) के लिए जहां ₹1.85 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट तय किया है, वहीं दूसरी तरफ देश का घरेलू स्वदेशी रक्षा उत्पादन (Domestic Defense Production) भी ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है.

यह महज कोई वित्तीय आंकड़ा नहीं बल्कि भारत की सैन्य संप्रभुता का शंखनाद है. इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि भारत को अपनी सरजमीं की रक्षा और आधुनिकीकरण के लिए जितने मूल्य के हथियारों की आवश्यकता है, लगभग उतने ही मूल्य का सैन्य साजो-सामान अब खुद भारत के कारखानों में मेक इन इंडिया के तहत तैयार हो रहा है. सुपरपावर देशों की हथियारों वाली दादागिरी का दौर अब इतिहास बन चुका है क्योंकि भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों को खुद पूरा करने के साथ-साथ दुनिया के 80 से अधिक देशों को हथियार बेच भी रहा है.

ऐतिहासिक रक्षा कायाकल्प की 5 मुख्य बातें

• आत्मनिर्भरता का सटीक संतुलन: सेना की नई हथियार खरीद का बजट जहां ₹1.85 लाख करोड़ है, वहीं देश का स्वदेशी रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के करीब पहुंच चुका है जो रक्षा इतिहास में एक अभूतपूर्व संतुलन है.

• उत्पादन में 283% की महा-छलांग: वर्ष 2014-15 में भारत का स्वदेशी रक्षा उत्पादन महज ₹46,429 करोड़ था जो पिछले एक दशक के नीतिगत सुधारों के कारण करीब पौने तीन गुना बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर आ गया है.

• घरेलू उद्योगों के लिए ₹1.39 लाख करोड़ लॉक: सरकार ने हथियार खरीद के कुल बजट का 75% हिस्सा (₹1.39 लाख करोड़) केवल भारतीय कंपनियों, एमएसएमई और निजी उद्योगों से खरीद के लिए आरक्षित कर दिया है.

• रक्षा निर्यात में 56 गुना की तेजी: घरेलू उत्पादन मजबूत होने का असर निर्यात पर भी दिखा है. वर्ष 2013-14 में जो रक्षा निर्यात सिर्फ ₹686 करोड़ था, वह अब बढ़कर ₹38,424 करोड़ हो चुका है.

• डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं में निजी एंट्री: रक्षा अनुसंधान (R&D) का बजट 112% बढ़ाकर ₹29,100.25 करोड़ किया गया है. साथ ही डीआरडीओ ने अपनी 24 प्रयोगशालाओं के दरवाजे निजी क्षेत्र के परीक्षणों के लिए खोल दिए हैं.

नेट बायर से नेट प्रोड्यूसर बनता भारतइस आंकड़े का बारीक विश्लेषण करें तो स्पष्ट होता है कि भारत की पुरानी रक्षा नीति और वर्तमान नीति में एक वैचारिक क्रांति आई है. पहले भारत अपनी रक्षा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा सीधे विदेशी कंपनियों से इम्पोर्ट करता था, जिससे देश का खजाना भी खाली होता था और युद्ध के समय विदेशी प्रतिबंधों का खतरा भी रहता था. अब ₹1.85 लाख करोड़ की खरीद के मुकाबले ₹1.78 लाख करोड़ का घरेलू उत्पादन यह साबित करता है कि हम हल्के लड़ाकू विमान (तेजस), ब्रह्मोस मिसाइलें, पिनाका तोपें, एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और आधुनिक रडार खुद अपनी धरती पर बना रहे हैं. सबसे बड़ा गेम-चेंजर कदम हथियार खरीद बजट का 75% हिस्सा घरेलू कंपनियों के लिए रिजर्व करना है. इससे भारतीय निजी क्षेत्र (जैसे टाटा, कल्याणी, एलएंडटी) को सुनिश्चित ऑर्डर मिल रहे हैं, जिससे उनकी इकोनॉमी ऑफ स्केल बेहतर हो रही है. यही वजह है कि भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के नए शिखर को छू गया है जो 2047 के ‘विकसित भारत’ के विजन की एक बेहद मजबूत नींव रख रहा है.

सवाल-जवाबहथियार खरीद के बजट और भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन के आंकड़ों के बीच क्या खास समानता देखी जा रही है?ताजा बजटीय आंकड़ों के अनुसार, भारत सरकार ने सेनाओं के लिए नए हथियारों की खरीद (Capital Acquisition) पर जहां ₹1.85 लाख करोड़ खर्च करने का प्रावधान किया है, वहीं देश का घरेलू स्वदेशी रक्षा उत्पादन भी बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. यानी भारत अब अपनी जरूरत के लगभग बराबर मूल्य का रक्षा सामान खुद घर में बनाने लगा है.रक्षा आधुनिकीकरण बजट का 75% हिस्सा भारतीय उद्योगों के लिए आरक्षित करने से क्या फायदा होगा?हथियार खरीद के बजट से ₹1.39 लाख करोड़ केवल घरेलू और निजी भारतीय उद्योगों के लिए लॉक कर देने से विदेशी आयात पर निर्भरता खत्म होगी. इससे घरेलू एमएसएमई और निजी प्लेयर्स को बड़े निवेश का भरोसा मिलेगा, देश में रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे और रक्षा क्षेत्र में सहायक उद्योगों का एक मजबूत जाल तैयार होगा.स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास और परीक्षण के लिए डीआरडीओ (DRDO) के स्तर पर क्या बड़े सुधार किए गए हैं?रक्षा अनुसंधान एवं विकास के लिए आवंटन को 112 प्रतिशत बढ़ाकर ₹29,100.25 करोड़ किया गया है, जिसका 25% हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए खुला है. इसके साथ ही, पारदर्शिता लाने के लिए डीआरडीओ ने अपनी 24 प्रयोगशालाओं की विश्वस्तरीय परीक्षण सुविधाओं को ‘रक्षा परीक्षण पोर्टल’ के जरिए सीधे निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध करा दिया है.

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