Rajasthan

बच्चेदानी में संक्रमण, टांके और मवाद; कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत कैसे, कसूरवार कौन? AIIMS की रिपोर्ट में खुलासा

Last Updated:June 18, 2026, 09:25 IST

Kota Prasuta Death Case: कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत की जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है. रिपोर्ट में इलाज में लापरवाही, प्रशासनिक कमजोरियां और संक्रमण नियंत्रण में कमी को मौतों की बड़ी वजह बताया गया है. जांच में सामने आया कि प्रसूता शिरीन की संक्रमित बच्चेदानी में टांके लगाने से संक्रमण फैल गया और मल्टी ऑर्गन फेलियर हो गया. वहीं अन्य मामलों में पल्मोनरी एम्बोलिज्म, अत्यधिक रक्तस्राव और हृदय संबंधी समस्याएं कारण रहीं. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग उठाई है.

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संक्रमण, मवाद और 5 मौतें... कोटा कांड का कसूरवार कौन? AIIMS रिपोर्ट में खुलासाZoomकोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पांच प्रसूताओं की मौत मामले में बरती गई लापरवाही

कोटा. कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मई माह में हुई पांच प्रसूताओं की मौत के मामले में हाई लेवल जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं और मौतों के पीछे इलाज में लापरवाही, संक्रमण नियंत्रण में कमी तथा प्रशासनिक स्तर पर कमजोर निगरानी को जिम्मेदार बताया गया है. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी  कोटा पहुंचे और उन्होंने मामले में सरकार पर सवाल उठाते हुए जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की.

दिल्ली एम्स के जांच रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रसूता शिरीन की बच्चेदानी में पहले से संक्रमण मौजूद था. इसके बावजूद संक्रमण का उपचार करने के बजाय बच्चेदानी में टांके लगा दिए गए. रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे बैक्टीरिया अंदर ही रह गए और मवाद बन गया. बाद में संक्रमण पूरे शरीर में फैल गया, जिसके चलते मल्टी ऑर्गन फेलियर की स्थिति पैदा हुई और महिला की मौत हो गई. शिरीन के पति मोहम्मद आशू ने भी पहले आरोप लगाया था कि एक डॉक्टर ने टांके लगाने की जरूरत नहीं बताई थी, जबकि दूसरी डॉक्टर ने टांके लगा दिए.

प्रशासनिक और सुपरविजन की कमी बना मौत का कारण

कोटा में 5 से 8 मई के बीच सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की मौत हुई थी. मामले की जांच के लिए एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के विशेषज्ञों की कमेटी गठित की गई थी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में प्रशासनिक और सुपरविजन की कमी को भी मौतों के लिए जिम्मेदार माना है. वहीं एम्स की जांच टीम ने ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण की आशंका जताई है. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना से एक दिन पहले 4 मई को एक निजी सेंटर पर कराई गई जांच में शिरीन की बच्चेदानी में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी थी.

ऐसी स्थिति में संक्रमण फैलने का खतरा काफी अधिक रहता है. अन्य मामलों में भी अलग-अलग कारण सामने आए हैं. प्रसूता पायल की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म के कारण हुई, जिसमें फेफड़े की धमनी में अचानक रुकावट आ गई थी. वहीं ज्योति की मृत्यु अत्यधिक रक्तस्राव से हुई. रिपोर्ट के अनुसार, इंजेक्शन देने के बाद भी उसकी ब्लीडिंग नियंत्रित नहीं हो सकी. एक अन्य प्रसूता प्रिया को हृदय संबंधी समस्या थी.

डेढ़ महीने बीत जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मामले को लेकर कहा कि डेढ़ महीने बीत जाने के बावजूद जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और पीड़ित परिवारों को अब तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है. उन्होंने सरकार से रिपोर्ट सार्वजनिक कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने और प्रभावित परिवारों को राहत देने की मांग की. गहलोत ने कहा कि सरकार के पास विभिन्न राहत कोष उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग ऐसे संवेदनशील मामलों में किया जाना चाहिए.

जांच रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद पांच प्रसूताओं की किडनी फेल होने के मामले की जांच रिपोर्ट में भी गंभीर खामियां सामने आई हैं. जोधपुर से गठित विशेषज्ञ समिति ने अस्पताल परिसर में गंदगी, ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण, फ्यूमिगेशन की कमी तथा गायनी विभाग के लिए अलग आईसीयू नहीं होने को प्रमुख कारण माना है. रिपोर्ट में करीब 80 वर्ष पुराने भवन की मरम्मत कराने की भी सिफारिश की गई है. हालांकि दवाओं और आईवी फ्लूड के सैंपलों की जांच रिपोर्ट अभी आना बाकी है, जिसे अंतिम रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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