Soyabeen Ki Kheti | Agriculture News | भीलवाड़ा में सोयाबीन फसल, बदलते मौसम में बचाव के उपाय

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सोयाबीन की खेती करने वालों के लिए अलर्ट, बारिश-धूप के बीच ये गलती पड़ेगी भारी
Last Updated:June 18, 2026, 16:20 IST
Soyabeen Ki Kheti : भीलवाड़ा में खरीफ सीजन के लिए 3 लाख 98 हजार हेक्टेयर बुवाई लक्ष्य रखा है. कृषि विभाग ने सोयाबीन में पानी निकासी, बीज उपचार, रोग और कीट नियंत्रण पर जोर दिया. बताया कि मौसम में लगातार हो रहे बदलाव को देखते हुए किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए. समय पर रोग और कीट प्रबंधन, उचित पोषण तथा पानी निकासी की व्यवस्था अपनाकर किसान सोयाबीन की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.
भीलवाड़ा. भीलवाड़ा जिले में सोयाबीन प्रमुख खरीफ फसलों में से एक मानी जाती है. जिले के अधिकांश क्षेत्रों में किसान अपने खेतों में इसकी बुवाई करते हैं. अब प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने के साथ ही किसान खरीफ फसलों की बुवाई और देखभाल में जुट गए हैं. ऐसे में सोयाबीन की फसल में बारिश और तेज धूप के बीच बदलते मौसम के दौरान विशेष सावधानी बरतना जरूरी है. यदि किसान समय रहते जरूरी प्रबंधन करें तो फसल को नुकसान से बचाने के साथ-साथ उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है.
भीलवाड़ा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने बताया कि जिले के किसान प्रमुख रूप से खरीफ सीजन में मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, तिल, कपास और सोयाबीन की बुवाई करते हैं. कृषि विभाग ने इस सीजन में 3 लाख 98 हजार हेक्टेयर भूमि में बुवाई का लक्ष्य तय किया है. लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से सोयाबीन की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है. अधिक समय तक पानी भरा रहने से जड़ सड़न और फफूंदजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में किसानों को खेत में पानी निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी जल्द बाहर निकल सके और पौधों की बढ़वार प्रभावित न हो.
बदलते मौसम में निगरानी बहुत जरूरीमौसम में लगातार हो रहे बदलाव को देखते हुए किसानों को फसल की नियमित निगरानी करनी चाहिए. समय पर रोग और कीट प्रबंधन, उचित पोषण तथा पानी निकासी की व्यवस्था अपनाकर किसान सोयाबीन की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. विनोद कुमार जैन ने बताया कि बुवाई से पहले बीज उपचार करना भी जरूरी है, जिससे प्रारंभिक अवस्था में लगने वाले रोगों और कीटों से फसल की सुरक्षा हो सके. इसके साथ ही संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों का प्रयोग करने से पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और उनकी वृद्धि बेहतर होती है.
रोग से बचाने के लिए करें ये कामबारिश के बाद तेज धूप निकलने पर सोयाबीन की फसल में विभिन्न कीट और रोग सक्रिय हो सकते हैं. पीला मोजेक, तना मक्खी, गर्डल बीटल और पत्ती खाने वाले कीट फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं. किसानों को नियमित रूप से अपने खेतों का निरीक्षण करना चाहिए. किसी भी प्रकार के रोग या कीट का प्रकोप दिखाई देने पर तुरंत कृषि विभाग की सलाह लेकर उचित दवा का छिड़काव करना चाहिए. खरपतवार नियंत्रण भी अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. बुवाई के 20 से 30 दिनों के भीतर खेत को खरपतवार मुक्त रखने से पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व, नमी और प्रकाश मिलता है. इससे फसल मजबूत होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है. इसके अलावा पौधों में जिंक, सल्फर या अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी दिखाई देने पर आवश्यक पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए.
बुवाई के समय इन बातों का रखें ध्यानविनोद कुमार जैन ने कहा कि बुवाई के समय किसानों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. बुवाई करते समय बीज के साथ-साथ उर्वरक नहीं डालना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से बीज का अंकुरण प्रभावित हो सकता है और पौधों की वृद्धि अच्छी नहीं हो पाती. इसके अलावा सोयाबीन के बीज को अधिक गहराई में भी नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे अंकुरण में देरी होती है और पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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