नसीराबाद के ब्यावर मार्ग पर 30 करोड़ की लागत से 7 साल में बना ओवरब्रिज, उद्घाटन से पहले ही लगने लगे मरम्मत के पैबंद

Last Updated:June 19, 2026, 12:02 IST
Nasirabad Overbridge Scam: नसीराबाद के ब्यावर मार्ग पर रेलवे स्टेशन के पास 30 करोड़ रुपये की लागत से 7 साल में बना रेलवे ओवरब्रिज उद्घाटन से पहले ही बदहाल हो गया है. वर्ष 2015 में स्वीकृत और 2019 से कछुआ चाल से बन रहे इस पुल की सड़क कुछ ही दिनों में जगह-जगह से उखड़ गई है, जिस पर अब पैचवर्क किया जा रहा है. लंबे निर्माण काल के दौरान बदहाल वैकल्पिक मार्ग के कारण कई जानलेवा हादसे भी हुए. क्षेत्रवासियों ने मानसून से पहले पुल के क्षतिग्रस्त होने पर नाराजगी जताते हुए इस मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
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भ्रष्टाचार और कछुआ चाल की भेंट चढ़ा प्रोजेक्ट: नसीराबाद में उद्घाटन से पहले ही उखड़ा 30 करोड़ का ओवरब्रिज
Nasirabad: राजस्थान के अजमेर जिले के नसीराबाद से विकास कार्यों में भारी लापरवाही और घटिया निर्माण गुणवत्ता का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. नसीराबाद के ब्यावर मार्ग पर रेलवे स्टेशन के निकट 30 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बनकर तैयार हुआ रेलवे ओवरब्रिज (ROB) अपने आधिकारिक उद्घाटन से पहले ही बदहाली का शिकार हो गया है. वर्षों की लंबी प्रतीक्षा, कछुआ चाल से हुए निर्माण और जनता की भारी परेशानी के बाद तैयार हुआ यह ओवरब्रिज अब अपनी कथित घटिया निर्माण सामग्री और भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण तीखे सवालों के घेरे में आ गया है.
नसीराबाद के ब्यावर मार्ग पर बढ़ते यातायात के दबाव और बार-बार बंद होने वाले रेलवे फाटक की समस्या से निजात दिलाने के लिए वर्ष 2015 में इस ओवरब्रिज निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई थी. इसके चार साल बाद, वर्ष 2019 में धरातल पर निर्माण कार्य शुरू हुआ. लेकिन विडंबना देखिए कि आधुनिक तकनीक के दौर में भी इस पुल को पूरा होने में लगभग 7 वर्ष का लंबा समय लग गया. निर्माण एजेंसी और ठेकेदार की कछुआ चाल के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार लेट होता गया. इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रवासियों ने दर्जनों बार विरोध प्रदर्शन किए और आंदोलन की चेतावनियां दीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी.
जानलेवा साबित हुआ वैकल्पिक मार्ग, कइयों ने गंवाई जान
7 साल के इस लंबे निर्माण काल के दौरान सबसे बड़ा दर्द उस वैकल्पिक मार्ग ने दिया, जिसे यातायात सुचारू रखने के लिए अस्थायी तौर पर बनाया गया था.
गड्ढे और धूल का साम्राज्य: यह मार्ग लंबे समय तक गहरे गड्ढों, कीचड़ और उड़ती धूल-मिट्टी का केंद्र बना रहा.
हादसों का सफर: इस बदहाल सड़क के कारण पिछले कुछ वर्षों में ब्यावर मार्ग पर अनगिनत सड़क दुर्घटनाएं हुईं. इन हादसों में जहां दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल होकर अपाहिज हो गए, वहीं कुछ बदनसीब लोगों को असमय ही अपनी जान तक गंवानी पड़ी.
मानसून से पहले ही उखड़ी सड़क, पोल खोल रहे पैबंदग्रामीणों और वाहन चालकों को उम्मीद थी कि ओवरब्रिज पर यातायात शुरू होने के बाद उनकी मुश्किलें खत्म हो जाएंगी, लेकिन उद्घाटन से पहले ही उनके अरमानों पर पानी फिर गया. ओवरब्रिज चालू होने के महज कुछ ही दिनों के भीतर इसकी चमचमाती सड़क जगह-जगह से उखड़ने लगी है. डामर की परतें हटने से पुल पर गहरे गड्ढे उभर आए हैं, जिन्हें छिपाने के लिए ठेकेदार अब आनन-फानन में पैबंद (पैचवर्क) लगाने का काम कर रहा है. करोड़ों के इस प्रोजेक्ट पर उद्घाटन से पहले ही मरम्मत के ये बदसूरत पैबंद लगना निर्माण कार्य में हुए भ्रष्टाचार की जीती-जागती कहानी बयां कर रहे हैं.मानसून में बड़े हादसे की आशंका, हजारों लोगों की जिंदगी दांव परक्षेत्रवासियों का आक्रोश इस बात को लेकर है कि जब मानसून की पहली बारिश से पहले ही ओवरब्रिज का यह हाल है, तो भारी बरसात के बाद इसके हालात कितने भयावह हो जाएंगे. लोगों को डर है कि आने वाले दिनों में यह पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होकर किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.गौरतलब है कि इस ओवरब्रिज के जरिए प्रतिदिन:नसीराबाद हाउसिंग बोर्ड, राजकीय महाविद्यालय, नांदला, बाघसुरी, भवानीखेड़ा, राजोसी, बुबानिया, मांगलियावास तथा ब्यावर सहित दर्जनों गांवों के हजारों वाहन चालक और राहगीर अपनी जान हथेली पर रखकर आवागमन करते हैं. ऐसे में यह लापरवाही सीधे तौर पर जनसुरक्षा से खिलवाड़ है.
उच्च स्तरीय जांच और ठेकेदार पर कठोर कार्रवाई की मांगजनता के टैक्स के 30 करोड़ रुपये पानी में बहते देख अब नसीराबाद क्षेत्र के लोगों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की पुरजोर मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि गुणवत्ता से समझौता करने वाले दोषी इंजीनियरों, निगरानी रखने वाले अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी के विरुद्ध एफआईआर (FIR) दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए. विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का यह खेल न केवल निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली, बल्कि सरकार की निगरानी व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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