Super El Nino impact | Monsoon Rain Alert | सूखे बांध, बादल गुम… जिसका डर था वही हुआ, सुपर एल नीनो दिखाने लगा असर, मानसून तो अभी से डरा रहा

मानसून को लेकर जिस बात का डर जताया जा रहा था, वह सच होता दिख रहा है. भारत में सुपर एल नीनो (Super El Nino) अपना असर दिखाने लगा है और इस कारण मानसून की चाल भी सुस्त पड़ गई है. देश में अब तक सामान्य से करीब 40 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है. इसके चलते देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण घटकर उनकी कुल क्षमता के लगभग 27.5 फीसदी तक सिमट गया है. हालांकि मौजूदा जलस्तर पिछले 10 वर्षों के औसत से अभी बेहतर माना जा रहा है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों और जल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगर बारिश की कमी बनी रही तो आने वाले हफ्तों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि देश के इन 166 बड़े जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता लगभग 183.6 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है. यह देश में निर्मित कुल 257.8 BCM जल भंडारण क्षमता का 71 फीसदी से अधिक हिस्सा है. ऐसे में इन जलाशयों में पानी का स्तर गिरना सीधे तौर पर सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, उद्योगों और जलविद्युत उत्पादन को प्रभावित कर सकता है.
बारिश हुई कम तो बिजली होगी गुल
इन 166 जलाशयों में 20 प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं के बांध भी शामिल हैं. इनमें हिमाचल प्रदेश का गोबिंद सागर, पंजाब का थीन बांध, राजस्थान का राणा प्रताप सागर, ओडिशा का हीराकुंड, झारखंड का पंचेत हिल, गुजरात का उकाई और सरदार सरोवर तथा महाराष्ट्र का पेंच बांध प्रमुख हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि इन जलाशयों में पानी की कमी का असर केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिजली उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है. कई राज्यों में जलविद्युत परियोजनाएं जलाशयों के जलस्तर पर निर्भर करती हैं.
उत्तर और मध्य भारत में राहत, बाकी क्षेत्रों में चिंता
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार उत्तर भारत के 11 और मध्य भारत के 28 जलाशयों में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में बेहतर जल भंडारण दर्ज किया गया है. लेकिन पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी भारत के अधिकांश जलाशयों की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है.
पूर्वी क्षेत्र के 27, दक्षिणी क्षेत्र के 47 और पश्चिमी क्षेत्र के 53 जलाशयों में जल भंडारण का स्तर पिछले साल की तुलना में कमजोर पाया गया है. यही कारण है कि इन क्षेत्रों में खेती और पेयजल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है.
किन राज्यों में हालात बेहतर और कहां बढ़ी परेशानी
राज्यवार आंकड़ों के अनुसार असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जलाशयों में पिछले साल की तुलना में बेहतर जल भंडारण दर्ज किया गया है.
वहीं आंध्र प्रदेश, गोवा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में जलाशयों का जलस्तर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है. इन राज्यों में अगर मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी तो जल संकट की आशंका गहरा सकती है.
इस बार कमजोर मानसून का खतरा
पिछले वर्ष मानसून ने 8 दिन पहले केरल में दस्तक दे दी थी और जून के दौरान इसकी प्रगति भी काफी अच्छी रही थी. इसका फायदा जलाशयों को मिला और शुरुआती दौर में ही उनमें पर्याप्त पानी पहुंच गया था.
इसके उलट इस बार मानसून तीन दिन की देरी से केरल पहुंचा और इसके बाद भी इसकी प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही. मौसम विभाग के अनुसार कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर जलाशयों के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है.
खेती पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अगले कुछ सप्ताह में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों की बुवाई और सिंचाई पर असर पड़ सकता है. जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं होने की स्थिति में कई राज्यों को सिंचाई प्रबंधन के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ सकते हैं.
इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक उपयोग और जलविद्युत उत्पादन पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. ऐसे में अब सबकी नजर मानसून की आगे की प्रगति और जुलाई में होने वाली बारिश पर टिकी हुई है, जो देश के जल भंडार और कृषि क्षेत्र के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है.



