दो महीने से मचा रखा था आतंक, आखिर वन विभाग के 3 घंटे की मशक्कत के बाद पकड़ में आया उत्पात मचाने वाला वानर

Last Updated:June 20, 2026, 22:15 IST
भीलवाड़ा की कोटड़ी तहसील के नंदराय गांव में पिछले करीब दो महीने से उत्पात मचा रहे बंदर को वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने करीब तीन घंटे के अभियान के बाद सुरक्षित पकड़ लिया. बंदर आए दिन घरों में घुसकर सामान नुकसान करता था और लोगों पर हमला करने की कोशिश करता था, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल था. दीपक बाबेल की सूचना पर पहुंची वन विभाग की टीम ने वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू सोसायटी के सहयोग से अभियान चलाकर बंदर को सुरक्षित पिंजरे में कैद किया और बाद में उसे जंगल में छोड़ दिया.
भीलवाड़ा. कोटड़ी तहसील के नंदराय गांव में पिछले डेढ़-दो महीने से एक बंदर ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा था. बंदर आए दिन गांव के मकानों में घुसकर सामान खराब कर देता था और लोगों पर हमला करने की कोशिश भी करता था. इसके कारण ग्रामीणों में डर का माहौल था. बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था. कई ग्रामीणों को अपनी जान-माल की सुरक्षा की चिंता सताने लगी थी, गांव के निवासी दीपक बाबेल ने इस समस्या की जानकारी वन विभाग को दी. सूचना मिलने के बाद वन विभाग की रेस्पांस टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू सोसायटी की टीम को मौके पर भेजा. टीम के सदस्य नारायण लाल बेरवा के नेतृत्व में रेस्क्यू की तैयारी की गई और नंदराय गांव पहुंचकर अभियान शुरू किया गया. करीब 3 घंटे तक चल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीम ने सुरक्षित रूप से बंदर को पिंजरे में कैद कर लिया है जिसके बाद वन विभाग की निगरानी में उसे वन क्षेत्र में छोड़ दिया.
खूंखार बंदर को रेस्क्यू करने वाले नारायण बैरवा ने बताया कि वन विभाग के माध्यम से सूचना मिली की नंद राय गांव में बंदर का आतंक फैला हुआ है जिसके बाद हम हमारी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. रेस्क्यू टीम ने पूरे धैर्य और सावधानी के साथ बंदर को पकड़ने का प्रयास किया. यह अभियान करीब तीन घंटे तक चला, इस दौरान टीम ने किसी भी ग्रामीण या बंदर को नुकसान पहुंचे बिना सुरक्षित तरीके से उसे पकड़ लिया. लंबे प्रयास के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन सफल रहा. इसके बाद बंदर को गांव की आबादी से काफी दूर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया, ताकि वह दोबारा गांव की ओर न आए और प्राकृतिक वातावरण में रह सके. बंदर के रेस्क्यू के बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली.
निवासी दीपक बाबेल ने बताया कि लंबे समय से बंदर के कारण वे काफी परेशान थे और अब गांव में फिर से सामान्य माहौल बन गया है. रेस्क्यू टीम में नारायण लाल बेरवा, धर्मराज और कैलाश बेरवा शामिल रहे. नारायण लाल बेरवा ने बताया कि बंदर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव है, उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी जंगली जानवर को पकड़ने, पालने या उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें. ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि प्रशिक्षित टीम सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर सके. इससे वन्यजीवों की भी सुरक्षा होती है और लोगों की जान-माल भी सुरक्षित रहती है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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