ब्रेन डेथ के बाद शरीर कब तक काम करता है? कैस किया जाता है ऑर्गन डोनेशन, डॉक्टर से समझें

Last Updated:August 12, 2026, 10:05 IST
Brain Death And Organ Donation: ब्रेन डेथ को मेडिकल तौर पर मृत्यु माना जाता है और लेकिन ये वो कंडीशन है जब ऑर्गन डोनेशन के बारे में सोचा जा सकता है जो दूसरे मरीज के लिए जीवनदायनी साबित हो सकती है. यहां समझिए ब्रेन डेथ होने के बाद ऑर्गन डोनेशन कैसे होता है.
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ब्रेन डेथ एक ऐसा मेडिकल टर्म है, जिसे लेकर लोगों के मन में अक्सर कई तरह की गलतफहमियां होती हैं. बहुत से लोग इसे कोमा की स्थिति समझ लेते हैं और मानते हैं कि मरीज कभी भी होश में आ सकता है. हालांकि, चिकित्सा विज्ञान में ब्रेन डेथ और कोमा दोनों बिल्कुल अलग स्थितियां हैं. ब्रेन डेथ का मतलब है कि व्यक्ति के मस्तिष्क ने पूरी तरह और स्थायी रूप से काम करना बंद कर दिया है.
साकेत स्थित मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में न्यूरोसर्जरी तथा यूनिट हेड – न्यूरो इंटरवेंशन के वाइस चेयरमैन एवं एचओडी डॉ.(प्रो.)दलजीत सिंह बताते हैं कि इस स्टेज में मरीज के ठीक होने या वापस जीवन में लौटने की कोई संभावना नहीं रहती. हालांकि दिल धड़कता हुआ दिखाई दे सकता है और छाती का उठना-गिरना भी नजर आ सकता है. लेकिन ये सब सिर्फ वेंटिलेटर और अन्य लाइफ सपोर्ट सिस्टम की मदद से संभव होता है.
ब्रेन डेथ और कोमा में क्या अंतर है?एक्सपर्ट बताते हैं कि कोमा की स्थिति में दिमाग पूरी तरह बंद नहीं होता. मरीज बेहोश रहता है, लेकिन मस्तिष्क की कुछ गतिविधियां जारी रहती हैं और इलाज से सुधार की संभावना भी हो सकती है. वहीं, ब्रेन डेथ में दिमाग और ब्रेनस्टेम दोनों स्थायी रूप से काम करना बंद कर देते हैं. ब्रेनस्टेम शरीर की कई जरूरी क्रियाओं जैसे सांस लेना और दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है. इसलिए ब्रेन डेथ के बाद व्यक्ति को मृत माना जाता है.
कैसे की जाती है ब्रेन डेथ की पुष्टि?ब्रेन डेथ घोषित करने के लिए एक सख्त मेडिकल प्रक्रिया अपनाई जाती है. यह किसी एक डॉक्टर का फैसला नहीं होता. डॉक्टर सबसे पहले यह जांचते हैं कि ब्रेनस्टेम के रिफ्लेक्स पूरी तरह खत्म हो चुके हैं या नहीं. इसके बाद एपनिया टेस्ट किया जाता है, जिससे पता लगाया जाता है कि मरीज बिना किसी मशीन की सहायता के सांस ले सकता है या नहीं. कुछ मामलों में EEG या ब्रेन ब्लड फ्लो स्कैन जैसी जांचें भी की जाती हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दिमाग में कोई गतिविधि नहीं बची है. अंतिम निर्णय से पहले दो अलग-अलग डॉक्टर अलग-अलग समय पर जांच करके इसकी पुष्टि करते है.
ब्रेन डेथ के बाद अंगदान कैसे संभव होता है?ब्रेन डेथ के बाद कुछ समय तक मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है. इस दौरान दिल धड़कता रहता है और शरीर के अंगों तक खून तथा ऑक्सीजन पहुंचती रहती है. इसी वजह से अंग स्वस्थ और प्रत्यारोपण के योग्य बने रहते हैं. यही वह महत्वपूर्ण समय होता है जब अंगदान किया जा सकता है. यदि परिवार सहमति देता है, तो डॉक्टर दिल, फेफड़े, लिवर, किडनी और पैंक्रियास जैसे अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं.
अंगदान क्यों जरूरी?जब किसी व्यक्ति की ब्रेन डेथ हो जाती है, तब चिकित्सा विज्ञान उसके जीवन को वापस नहीं ला सकता. लेकिन उसके स्वस्थ अंग दूसरे मरीजों के जीवन को बचा सकते हैं. यही कारण है कि अंगदान को जीवनदान के सबसे बड़े रूपों में से एक माना जाता है. हालांकि ये एक परिवार के लिए बहुत कठिन फैसला होता है, लेकिन ये अन्य परिवारों के लिए नई उम्मीद और नई जिंदगी का कारण बन सकता है.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 12, 2026, 10:05 IST



