Agriculture News I sikar news I जमीन नहीं, मिट्टी नहीं… सिर्फ 80 वर्गफीट में तैयार होगा रोजाना 60 किलो हरा चारा

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चारा संकट के बीच सीकर में नई पहल, 50 किसानों को सिखाई जाएगी हाइड्रोपोनिक तकनीक
Last Updated:August 12, 2026, 11:59 IST
Sikar News: सीकर में लगातार घटते जलस्तर और चारा संकट के बीच हाइड्रोपोनिक तकनीक किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है. NABARD ने इजराइल की तर्ज पर 37 लाख रुपए के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसके तहत खंडेला और श्रीमाधोपुर के 50 किसानों को जोड़ा जाएगा. महज 80 वर्गफीट के शेड में वर्टिकल ट्रे के जरिए रोज करीब 60 किलो हरा चारा तैयार करने का लक्ष्य है. खास बात यह है कि इस तकनीक में पारंपरिक चारा उत्पादन की तुलना में करीब 90% तक पानी की बचत हो सकती है.
उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती में हरा चारा पैदा करने के लिए करीब एक बीघा यानी लगभग 27,225 वर्गफीट जमीन की जरूरत पड़ सकती है. इसके मुकाबले हाइड्रोपोनिक प्रणाली में इसी स्तर का उत्पादन महज 80 वर्गफीट क्षेत्र में लेने का लक्ष्य रखा गया है. खेती योग्य जमीन की कमी और पशुपालन पर निर्भर छोटे किसानों के लिए यह तकनीक खास तौर पर उपयोगी हो सकती है. खेत का बड़ा हिस्सा चारे की खेती में लगाने की मजबूरी भी कम होगी.
सीकर जैसे भूजल दबाव वाले क्षेत्रों में इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत माना जा रहा है. परियोजना के अनुसार हाइड्रोपोनिक खेती में पारंपरिक चारा उत्पादन की तुलना में पानी की खपत करीब 90 प्रतिशत तक कम हो सकती है. यही वजह है कि इसे डार्क जोन क्षेत्रों के लिए संभावनाओं वाली तकनीक माना जा रहा है. सीमित पानी में लगातार हरा चारा तैयार होने से पशुपालकों को चारा खरीदने पर होने वाले खर्च में भी राहत मिलने की उम्मीद है.
एमएल मीणा ने बताया कि हाइड्रोपोनिक विधि से तैयार हरे चारे में प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा. ताजा और पौष्टिक चारे की नियमित उपलब्धता से दुधारू पशुओं के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद है. इससे पशुपालकों को सालभर हरे चारे की व्यवस्था करने में मदद मिल सकती है. हालांकि वास्तविक उत्पादन और पशुओं पर इसके प्रभाव का आकलन पायलट प्रोजेक्ट के दौरान किसानों के खेतों पर परिणामों के आधार पर किया जाएगा.
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अभी यह पायलट प्रोजेक्ट फिलहाल सीकर जिले के खंडेला और श्रीमाधोपुर में शुरू किया जाएगा. इसमें 50 किसानों को शामिल किया जाएगा. यह प्रोजेक्ट सीकर में हाइड्रोपोनिक चारा उत्पादन का शुरुआती मॉडल तैयार करेगा. चयनित किसानों को कृषि वैज्ञानिकों और हाइड्रोपोनिक विशेषज्ञों की ओर से तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा. नाबार्ड के उप महाप्रबंधक एमएल मीणा के अनुसार प्रोजेक्ट का उद्देश्य कम पानी और कम जमीन में हरे चारे की पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को प्रशिक्षित करना है. पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सफल रहे तो यह तकनीक काफी लाभदायक हो सकती है.
First Published :
August 12, 2026, 11:59 IST



