Rajasthan

Gardening Tips: सिरोही में सफल हुई आलूबुखारा की ऑर्गेनिक खेती, घर के बगीचे में भी संभव इसकी खेती

Last Updated:June 20, 2026, 22:51 IST

सिरोही जिले के तपोवन में अरावली की तलहटी में पहाड़ी फलों की तरह माने जाने वाले आलूबुखारा की सफल ऑर्गेनिक खेती की जा रही है. यहां 15 से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिन्हें बलुई दोमट मिट्टी और जैविक तरीकों से तैयार किया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, उचित देखभाल, छंटाई, मल्चिंग और नीम आधारित जैविक उपायों से इस फल की अच्छी पैदावार घर के बगीचे में भी संभव है. लगभग 3 साल में फल देना शुरू करने वाला यह पेड़ परिपक्व होने पर 50 किलोग्राम तक उत्पादन दे सकता है.

देश के पहाड़ी इलाकों में होने वाले आलूबुखारा के पेड़ अब राजस्थान में भी उगाए जा रहे हैं. सिरोही जिले के तपोवन में अरावली की तलहटी में आलूबुखारा की ऑर्गेनिक फार्मिंग हो रही है. इस तकनीक से आप आपके घर के गार्डन में भी आलूबुखारा की गार्डनिंग कर सकते हैं. आलू बुखारा की पेड़ों की देखभाल के बारे में यहां कार्यरत बीके अमनभाई ने जानकारी दी. तपोवन के बीके अमन भाई ने बताया कि तपोवन में हो रही फलों की खेती में आलूबुखारा की भी ऑर्गेनिक खेती हो रही है. यहां 15 से अधिक आलूबुखारा के पौधे 3 वर्ष पहले लगाए गए थे. इस फल की खेती पहाड़ी इलाकों में होती है, इस वजह से सिरोही में अरावली की पहाड़ियों और आसपास के इलाकों में ये फल उगाया जा सकता हैं. इसके लिए अच्छे जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है.

पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए उसके 2–3 फीट तक बढ़ने पर अक्टूबर या नवंबर महीने में जैविक पोषण देना जरूरी है. हर माह पेड़ की जड़ों में जीवामृत डालना चाहिए, इससे मिट्टी में गुड बैक्टीरिया बढ़ते हैं और पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं. पौधे के आसपास नमी बनाए रखने के लिए मलचिंग तकनीक का उपयोग फायदेमंद होता है. वहीं पौधे को ऑर्गेनिक पोटेशियम देने के लिए लकड़ी की राख और कैल्शियम के लिए चूने के पानी का उपयोग कर सकते हैं.

आलूबुखारा की रोपाई के 3 साल में फल देना शुरू कर देता है और 5 साल में पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाता है. पूरी तरह विकसित पेड़ करीब 50 किलोग्राम तक फल देता है. जब पेड़ पर फल बैंगनी रंग का होने लगता है और नरम होने लगता है, तब उसकी तुड़ाई करना चाहिए.

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