शिवभक्ति का अनोखा अंदाज, 1000 KM पैदल कांवड़ और साथ दौड़ती लग्जरी स्कॉर्पियो, रह गए सब हैरान

Last Updated:August 10, 2026, 11:12 IST
Kanwar Yatra 2026: सावन के महीने में शिवभक्ति की तस्वीर देखने को मिल रही है, जहां शिवभक्त करीब 1000 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पैदल पूरी करते हैं. खास बात यह है कि इस यात्रा में भक्तों के साथ एक लग्जरी स्कॉर्पियो भी चलती है. यह अनोखी कांवड़ यात्रा पिछले करीब 15 वर्षों से जारी बताई जा रही है. श्रद्धालु लंबी दूरी तय करते हुए भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और समर्पण का परिचय देते हैं. रास्ते में भक्ति गीत, जयकारे और शिव नाम का जाप यात्रा को खास बनाते हैं. पैदल यात्रा के साथ लग्जरी वाहन का यह अनोखा संगम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
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सीकर। सावन के महीने में जब शिवभक्त भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कांवड़ लेकर निकलते हैं, तो आमतौर पर यात्रा कुछ किलोमीटर या कुछ दिनों की होती है. लेकिन सीकर के 20 शिवभक्तों की आस्था की कहानी इससे कहीं अलग है. ये भक्त गंगोत्री से पवित्र गंगाजल लेकर एक हजार किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्रा पूरी कर सीकर लौटे हैं. करीब एक महीने तक पहाड़ों, जंगलों, पथरीले रास्तों और तपती सड़कों से गुजरने के बाद जब कांवड़ियों का जत्था शहर पहुंचा है. अब इसी गंगाजल से हर्षनाथ पर्वत पर भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा.
कांवड़ यात्रा संघ के प्रमुख सुरेश कुमार सैनी अन्ना के नेतृत्व में शिवभक्तों का जत्था सीकर से गंगोत्री के लिए रवाना हुआ था. गंगोत्री पहुंचने के बाद सभी ने पवित्र गंगाजल कांवड़ में भरा और पैदल ही सीकर की ओर यात्रा शुरू की. करीब एक महीने में एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के बाद यह जत्था सीकर पहुंच गया है. पिपराली रोड चौराहे पर गौवत्स संत श्री चन्द्रमा दास महाराज के सानिध्य में शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा की गई. खास बात यह है कि कावड़ियों के साथ एक नई चमचमाती स्कॉर्पियो कर भी साथ चल रही थी. गाड़ी के आगे तिरंगा झंडा लगाया गया और उसके पास भगवान भोलेनाथ का त्रिशूल स्थापित किया गया. यह गाड़ी सीकर से गंगोत्री तक और फिर से वापस वहां से वापस सीकर आई है. गाड़ियों ने इस गाड़ी में भगवान शिव को स्थापित किया था.
15 साल से जारी है आस्था का यह सफरइस यात्रा की सबसे खास बात सिर्फ इसकी दूरी नहीं, बल्कि इसके पीछे चल रही वर्षों पुरानी परंपरा है. यात्रा संघ के प्रमुख सुरेश कुमार सैनी अन्ना पिछले करीब 15 वर्षों से लगातार गंगोत्री से पैदल कांवड़ लेकर सीकर पहुंच रहे हैं. हर साल हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हैं. यात्रा के दौरान शिवभक्त कई कठिन रास्तों से गुजरते हैं. जंगल, पथरीले रास्ते और गर्म सड़कें इस सफर का हिस्सा बनती हैं. यह यात्रा शिवभक्त नंगे पैर भी तय करते हैं.
मंगलवार को हर्षनाथ पर्वत पर होगा गंगाजल से अभिषेकसीकर पहुंचने के बाद अब इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव मंगलवार को होगा. हर्षनाथ पर्वत स्थित देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक हर्ष भैरूनाथ मंदिर में गंगोत्री से लाए गए पवित्र जल से भगवान हर्षनाथ का रुद्राभिषेक किया जाएगा. मंदिर के पुजारी विजय कुमार के अनुसार पौराणिक कथाओं में हर्ष पर्वत का संबंध भगवान शिव और अंधकासुर की कथा से बताया गया है. मान्यता है कि अंधकासुर के अत्याचार से परेशान देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी. भगवान शिव ने उसका वध किया. इसी धार्मिक परंपरा के कारण हर्षनाथ शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
गौ माता को समर्पित की यात्रायात्रा प्रमुख सुरेश कुमार सैनी अन्ना के अनुसार कांवड़ यात्रा केवल भगवान शिव के जलाभिषेक तक सीमित नहीं है. इस यात्रा के पीछे विश्व शांति, परिवार और समाज में सुख-शांति की कामना भी जुड़ी है. इसके साथ ही गोमाता को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने के संकल्प को लेकर भी शिवभक्त यह यात्रा कर रहे हैं. 1000 किलोमीटर की इस यात्रा को सुरेश कुमार सैनी ने गौ माता को समर्पित किया है. उन्होंने कहा कि गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा देना चाहिए. इस यात्रा में सुरेश सैनी ‘अन्ना’, विनोद सैनी, अभिषेक गुर्जर, पन्नालाल गुर्जर, मुकेश सैनी, गोपाल सैनी, गोगाराम सैनी, राकेश सैनी, पंकज सैनी, संजय सैनी, पहलाद सैनी, मनोहर सैनी, राहुल सैनी, मनीष शर्मा और रोहित सैनी सहित अन्य शिवभक्त शामिल रहे.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Sikar,Rajasthan
First Published :
August 10, 2026, 11:12 IST



