Animal Husbandry: बारिश में पशुपालकों के लिए काम की खबर! पशुओं के पैरों की इस छोटी लापरवाही से घट सकता है दूध, जानिए देसी बचाव

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बारिश में पशुओं के पैरों की इस छोटी लापरवाही से घट सकता है दूध, जानिए बचाव
Last Updated:June 22, 2026, 07:19 IST
Cattle Care in Rainy Season: बारिश के मौसम में कीचड़ और नमी के कारण गाय-भैंसों के खुर मुलायम होकर फटने लगते हैं, जिससे ‘फुट रॉट’ (खुर सड़न) और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. इससे पशु लंगड़ाने लगते हैं और दूध उत्पादन घट जाता है. भीलवाड़ा के पशु चिकित्सकों के अनुसार, पशुओं को सूखे व ऊंचे स्थानों पर बांधना चाहिए. खुरों को साफ रखने के लिए नीम का पानी, फिटकरी का पानी और हल्दी-सरसों तेल का लेप लगाना बेहद फायदेमंद देसी उपाय है. गंभीर संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और चारे को भीगने से बचाएं.
बरसात का मौसम शुरू होते ही पशुपालकों की चिंता भी काफी बढ़ जाती है, क्योंकि लगातार बारिश, कीचड़ और नमी के कारण गाय-भैंसों के पैरों में कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं. दरअसल, लंबे समय तक गीली जमीन पर रहने से पशुओं के खुर मुलायम पड़ जाते हैं, जिनमें धीरे-धीरे दरारें आने लगती हैं और इसके बाद वहां बैक्टीरिया व फंगस का संक्रमण तेजी से फैलता है. इस संक्रमण की वजह से कई बार पशु लंगड़ाने लगता है तथा उसे खड़ा होने और चलने में तेज दर्द महसूस होता है, जिससे समय पर सटीक इलाज नहीं मिलने पर पशुओं का दूध उत्पादन भी कम हो जाता है और वे कमजोर पड़ने लगते हैं.
पशु चिकित्सकों के अनुसार बारिश के दिनों में पशुओं में सबसे ज्यादा खतरा फुट रॉट (खुर सड़ने की बीमारी), खुरों में घाव, सूजन और कीड़े लगने का रहता है. यदि गोशाला में लगातार पानी जमा रहता है या पशु दिनभर कीचड़ में खड़े रहते हैं, तो उनमें संक्रमण होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. यही वजह है कि पशुओं को हमेशा साफ, सूखी और थोड़ी ऊंची जगह पर ही बांधना चाहिए. इसके साथ ही गोशाला में पानी की निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए और समय-समय पर वहां की अच्छी तरह सफाई करना भी बेहद जरूरी है.
ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के पैर के रोगों से बचाव के लिए कई देसी उपाय भी काफी लाभदायक माने जाते हैं. इसके तहत पशुपालक सप्ताह में एक-दो बार नीम की पत्तियों को उबालकर ठंडे किए गए पानी से पशुओं के पैर धो सकते हैं, जबकि हल्दी और सरसों के तेल का लेप छोटे घावों पर लगाने से संक्रमण को कम करने में मदद मिलती है. वहीं फिटकरी मिले गुनगुने पानी से खुर साफ करने से बैक्टीरिया पनपने की संभावना काफी घट जाती है. हालांकि, यदि घाव गहरा हो, उसमें से मवाद आने लगे या पशु लगातार लंगड़ा रहा हो, तो घरेलू उपचार के बजाय तुरंत डॉक्टर या प्रशिक्षित पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
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बरसात के मौसम में पशुओं के खुरों की नियमित कटाई (ट्रिमिंग) भी बेहद जरूरी है क्योंकि बड़े और टेढ़े-मेढ़े खुरों में अधिक गंदगी जमा होती है, जिससे संक्रमण जल्दी फैलता है. इसके साथ ही पशुओं को संतुलित आहार, सूखा चारा, हरा चारा, साफ पानी और खनिज मिश्रण (मिनरल मिक्सचर) नियमित देना चाहिए ताकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत बनी रहे. पशुपालकों को बारिश में भीगे हुए या सड़े-गले चारे को पशुओं को खिलाने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इससे पेट खराब होने सहित अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी काफी बढ़ जाता है.
बरसात के मौसम में पशुपालक यदि प्रतिदिन पशुओं के पैरों की बारीकी से जांच करें, गोशाला को हमेशा साफ व सूखा रखें और समय रहते छोटे घावों का प्राथमिक उपचार कर दें, तो पशुओं को बड़ी बीमारियों से आसानी से बचाया जा सकता है. पशुपालकों द्वारा बरती गई थोड़ी-सी यह सावधानी न केवल उनके पशुओं को पूरी तरह स्वस्थ रखेगी, बल्कि दूध उत्पादन में होने वाली कमी और इलाज पर होने वाले अतिरिक्त भारी-भरकम खर्च से भी उन्हें बड़ी राहत दिलाएगी.



