फिर मुस्कुराने लगी है बेरियां… थार में पानी बचाने की अनोखी मुहिम, सदियों पुरानी धरोहर फिर बनी जीवनदायिनी

Last Updated:June 22, 2026, 08:18 IST
Barmer Beri Conservation Campaign: बाड़मेर के थार मरुस्थल में भीषण गर्मी और जल संकट के बीच पारंपरिक जल स्रोत ‘बेरीयों’ को पुनर्जीवित करने की मुहिम शुरू की गई है. इस अभियान के तहत सदियों पुरानी बेरियों की सफाई, मरम्मत और पुनर्निर्माण किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों और वन्यजीवों को सालभर पानी उपलब्ध हो सके. पर्यावरण प्रेमी नरपतसिंह राजपुरोहित और जयेश कुमार लालका के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान का विस्तार वर्ष 2026-27 में कई गांवों तक किया जाएगा. जल संकट वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है. इसका उद्देश्य जल संरक्षण की पारंपरिक विरासत को बचाना और भविष्य की जल सुरक्षा को मजबूत बनाना है.
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बाड़मेर. भीषण गर्मी और जल संकट से जूझ रहे थार के रेगिस्तान में पारंपरिक जल स्रोत बेरियों को नया जीवन देने की मुहिम शुरू हुई है. बाड़मेर में शुरू हुए इस अभियान के तहत सदियों पुरानी बेरियों का संरक्षण और पुनर्निर्माण किया जा रहा है ताकि लोगों के साथ-साथ वन्यजीवों को भी पानी उपलब्ध हो सके. थार क्षेत्र में बेरी लंबे समय से पेयजल का भरोसेमंद स्रोत रही है. समय के साथ कई बेरियां उपेक्षा और क्षति का शिकार हो गईं है. अब इस अभियान के तहत इन पारंपरिक जल स्रोतों की सफाई, मरम्मत और पुनर्निर्माण किया जा रहा है.
इसका मकसद यह है कि ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके और जल संरक्षण की पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित किया जा सके. पर्यावरण प्रेमी नरपतसिंह राजपुरोहित और जयेश कुमार लालका द्वारा बेरियों का जीर्णोद्धार करवाया जा रहा है. वर्ष 2026-27 के दौरान इस कार्यक्रम का विस्तार थार क्षेत्र के कई गांवों तक किया जाएगा. इसके तहत ऐसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है जहां जल संकट अधिक है और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है.
जल संरक्षण के साथ वन्यजीव संरक्षण भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा
पर्यावरण प्रेमी ने जल संरक्षण के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है. बाड़मेर जिले के ढगारी, बाड़मेरों की ढाणी, देगराय ओरण और भूका थानसिंह सहित अन्य क्षेत्र में वन्यजीवों एवं पक्षियों के लिए तीन नए जलकुंड बनाए है. इन जलकुंडों में वर्षभर पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है. ग्रीनमैन नरपतसिंह राजपुरोहित के मुताबिक थार की पारंपरिक ‘बेरीयां’ केवल जल स्रोत नहीं बल्कि मरुस्थलीय संस्कृति और जीवन की पहचान है. इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर साबित होगा.
कच्छ और थार जैसे शुष्क क्षेत्रों में पानी ही जीवन का आधार
उन्होंने कहा कि जलकुंड निर्माण, बेरी संरक्षण, वृक्षारोपण और वन्यजीव संरक्षण के माध्यम से पर्यावरण संतुलन को मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं वॉटर मैन जयेशकुमार लालका ने कहा कि कच्छ और थार जैसे शुष्क क्षेत्रों में पानी ही जीवन का आधार है. पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण जल सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी अत्यंत आवश्यक है. उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल जल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य स्थानीय समुदायों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देना भी है.About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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Location :
Barmer,Rajasthan



