अरहर की करनी है खेती, तो यहां जानिए बुवाई का सबसे सही समय और बेस्ट वैरायटी

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अरहर की करनी है खेती, तो यहां जानिए बुवाई का सबसे सही समय और बेस्ट वैरायटी
Last Updated:June 23, 2026, 08:42 IST
मुरादाबाद के किसान उन्नत किस्मों जैसे सम्राट, स्टार 444 और पूसा विशाल के साथ वैज्ञानिक विधि अपनाकर अरहर की खेती से कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई तक बुवाई का सही समय माना जाता है. ट्रेंच विधि और गन्ने के साथ सह-फसल अपनाकर 60-65 दिनों में अच्छी पैदावार और 6 से 10 कुंतल प्रति एकड़ तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है.
मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) के किसान उन्नत किस्मों (जैसे- सम्राट, स्टार 444, या पूसा विशाल) का चुनाव करके, बीज उपचार के बाद बुवाई करें और ट्रेंच विधि से गन्ने के साथ सह-फसल अपनाकर कम लागत में 60-65 दिनों के भीतर बंपर मुनाफा कमा सकते हैं. इसके अलावा किसान सिंगल भी इसकी खेती को करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. इसकी खेती को करने के लिए वैज्ञानिक विधि का प्रयोग अवश्य करें जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलेगा.
जून के लास्ट जुलाई की शुरुआत में करें बुवाई
मुरादाबाद में अरहर की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक की जा सकती है. मानसून की शुरुआती बारिश के बाद बुवाई करना सबसे बेहतर रहता है. इसके अंदर अच्छी जल निकासी वाली भूमि और बलुई दोमट मिट्टी चाहिए होती है. खेत में पानी नहीं रुकना चाहिए क्योंकि अरहर जल भराव सहन नहीं कर सकती है. इस तरह की मिट्टी का हम लोग चयन करते हैं. इसके साथ ही अगर हम एकड़ में खेती कर रहे हैं तो हमें 6 से 8 किलो बीज प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है.
यदि हम किसी और क्रॉप के साथ इसकी खेती कर रहे हैं. तो 4 से 5 किलो बीज प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है. इसकी लाइन से लाइन की दूरी रखते हुए बुवाई करनी होती है. जिससे निराई गुड़ाई करने में मदद मिलती है. इसके लिए 4 से 5 टन गोबर की खाद को खेत में डालकर तैयार कर लेंगे और 8 से 10 किलो नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है और 20 से 40 किलो फास्फोरस की आवश्यकता होती है. यह प्रति एकड़ में आवश्यकता रहती है. क्योंकि अरहर दलहनी फसल है. नाइट्रोजन की आवश्यकता रहती है. इसलिए अधिक यूरिया की आवश्यकता पड़ती है.
अच्छा होता है मुनाफा
इसमें रोगों की बात की जाए तो अलग-अलग रोग लग जाते हैं. जिसकी वजह से खेत की लगातार निगरानी करते रहें और दवा का प्रयोग कर दें. जिससे बीमारी ना लगे. 6 से 10 कुंटल प्रति एकड़ तक की उपज हमारे किसान साथियों को मिल जाती है. लगभग इसकी खेती करने के लिए हमें 10 से 15000 रुपए प्रति एकड़ का खर्चा आता है. इससे हम 6 से 10 कुंतल के बीच में फायदा लेते हैं तो किसानों की आय में काफी वृद्धि होगी और खेत की ताकत भी बढ़ जाएगी और पैदावार भी अच्छी निकल कर आएगी. इस प्रकार किसान अच्छा मुनाफा भी कमा सकेगा. और किसान अपनी आएगी भी वृद्धि कर सकेगा.
About the AuthorVivek Kumar
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
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