क्या सरकारी अस्पतालों की लापरवाही ले रही है माताओं की जान? नागौर, बीकानेर और जोधपुर में प्रसूता मौतों पर भारी बवाल

Last Updated:June 24, 2026, 10:04 IST
Rajasthan Maternal Death Case: राजस्थान के बीकानेर, नागौर और पावटा में प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने पर भारी बवाल मचा हुआ है. बीकानेर में मृतका के पति ने आत्मदाह की कोशिश की, जबकि नागौर में 50 लाख मुआवजे की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन जारी है और वार्ता विफल हो गई है. पावटा अस्पताल में 8 प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के बाद ड्रग स्टोर पर होल्ड नोटिस जारी किया गया है और दो प्रसूताएं एम्स में भर्ती हैं. परिजन न्याय के लिए धरने पर अड़े हैं.
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नागौर, बीकानेर और पावटा प्रसूता मौत मामले पर बवाल ( AI Image )
Rajasthan Maternal Death Case: राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य और चिकित्सा व्यवस्थाओं की पोल खोलती बेहद विचलित करने वाली खबरें प्रदेश के तीन प्रमुख जिलों से सामने आई हैं. बीकानेर, नागौर और जोधपुर के पावटा में प्रसूताओं की मौत और अचानक तबीयत बिगड़ने के मामलों ने पूरे प्रदेश की जनता और प्रशासन को हिलाकर रख दिया है. प्रसव जैसी सामान्य और जीवनदायी प्रक्रिया के दौरान हो रही इन मौतों ने न केवल सरकारी अस्पतालों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आमजन के भरोसे को भी तगड़ा झटका दिया है. इन घटनाओं के विरोध में पीड़ित परिवारों का गुस्सा फूट पड़ा है. न्याय, उचित जांच और मुआवजे की मांग को लेकर परिजनों के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए हैं. कहीं मोर्चरी के बाहर तीन दिनों से शव रखकर प्रदर्शन किया जा रहा है, तो कहीं पीड़ित खुदकुशी करने को मजबूर हैं, जिससे पूरे प्रदेश में कानून-व्यवस्था और प्रशासन के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूता शारदा की मौत के बाद पिछले तीन दिनों से मोर्चरी के बाहर धरना चल रहा है. कल देर शाम इस मामले ने उस समय बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया जब मृतका के पति मुकेश ने अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. हालांकि, वहां मौजूद लोगों और सतर्क नागरिकों ने उसे समय रहते रोक लिया जिससे एक बड़ा हादसा टल गया. मृतका के पति मुकेश का आरोप है कि प्रशासन परिजनों की सहमति के बिना जबरन शव का पोस्टमार्टम करवाना चाहता है. मुकेश ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) राजेश नायक पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन ने उनके माता-पिता को घर से जबरन उठाया है. परिजन उचित मुआवजे और न्याय की मांग को लेकर मोर्चरी पर अड़े हुए हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे शव को स्वीकार नहीं करेंगे.
नागौर: कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और चक्का जाम की चेतावनीनागौर के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) विंग में सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) के बाद हुई प्रसूता की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी के बाहर परिजनों, कांग्रेस और आरएलपी (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी) के कार्यकर्ताओं का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा. आंदोलनकारियों ने जेएलएन अस्पताल से लेकर कलेक्ट्रेट तक एक विशाल पैदल कैंडल मार्च निकाला और कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया.
इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए प्रशासन और परिजनों के बीच दो दौर की वार्ता हुई, लेकिन दोनों ही बार बातचीत पूरी तरह विफल रही. परिजनों ने प्रशासन के सामने पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें:
मृतका के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा.
परिवार के एक सदस्य को संविदा पर सरकारी नौकरी.
मेडिकल बोर्ड के गठन द्वारा शव का निष्पक्ष पोस्टमार्टम.
पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक या प्रशासनिक जांच.
दोषी डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई.
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर भारी संख्या में पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है. परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि सुबह तक मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे क्षेत्र में उग्र चक्का जाम किया जाएगा.
पावटा: अस्पताल के सब-स्टोर पर रोक, दो प्रसूताओं की हालत गंभीरजोधपुर के पावटा जिला अस्पताल में 8 प्रसूताओं की हालत बिगड़ने के मामले में चौथे दिन भी जांच प्रक्रिया जारी रही. इस गंभीर लापरवाही के बाद ड्रग कंट्रोल ऑफिसर ने बड़ा एक्शन लेते हुए पावटा अस्पताल के सब-स्टोर में दवाओं की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाते हुए ‘होल्ड नोटिस’ जारी कर दिया है. आशंका जताई जा रही है कि प्रसूताओं को दी गई दवाओं या एनेस्थीसिया की गुणवत्ता में कोई भारी कमी थी. पावटा अस्पताल से जोधपुर एम्स (AIIMS) में रेफर की गई दो प्रसूताओं में से एक की स्थिति में अब आंशिक सुधार बताया जा रहा है, और उनका ऑक्सीजन सपोर्ट धीरे-धीरे कम किया जा रहा है. वहीं, दूसरी मरीज की हालत अभी भी गंभीर लेकिन स्थिर बनी हुई है, जिन्हें वर्तमान में नेजल ऑक्सीजन सपोर्ट और डायलिसिस पर रखा गया है. इसके अलावा, बाकी बची 6 प्रसूताओं का इलाज पावटा अस्पताल में ही जारी है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है.
क्या प्रशासन की लापरवाही ले रही है माताओं की जान?इन तीनों मामलों ने राजस्थान की चरमराती चिकित्सा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल (?) खड़े कर दिए हैं. क्या प्रसव जैसी सामान्य प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही और दवाओं का घटिया स्तर ही इन प्रसूताओं की मौत का मुख्य कारण है? क्या प्रशासन केवल मामले को दबाने के लिए परिजनों पर जबरन पोस्टमार्टम का दबाव बना रहा है? सरकार और स्वास्थ्य विभाग को इन संवेदनशील मामलों में तुरंत हस्तक्षेप कर दोषियों को सजा देनी होगी, ताकि भविष्य में किसी और मासूम मां को अपनी जान न गंवानी पड़े.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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