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घर-घर में मिलता है ये चमत्कारी पौधा! त्वचा, बाल और खेती… हर जगह है इसकी डिमांड, जानिए फायदे

Last Updated:June 24, 2026, 12:18 IST

एलोवेरा, जिसे घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है, एक ऐसा औषधीय पौधा है जिसका उपयोग सदियों से स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए किया जाता रहा है. इसकी पत्तियों में मौजूद जेल त्वचा और बालों की देखभाल में काफी लोकप्रिय है. गोंडा के वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार एलोवेरा में कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जिसके कारण इसकी मांग घरेलू उपयोग से लेकर औषधीय और कॉस्मेटिक उद्योगों तक बनी रहती है.

गोंडा: एलोवेरा एक ऐसा औषधीय पौधा है, जिसे सदियों से स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए उपयोग किया जाता रहा है. इसे घृतकुमारी के नाम से भी जाना जाता है. अपने औषधीय गुणों के कारण एलोवेरा आज घरों, खेतों और बगीचों में आसानी से देखने को मिल जाता है. इसकी मोटी और हरी पत्तियों के अंदर पाया जाने वाला जेल कई तरह के उपयोगों के लिए प्रसिद्ध है. आयुर्वेद में भी एलोवेरा को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव के अनुसार एलोवेरा में विटामिन ए, सी, ई, बी 12, फोलिक एसिड, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. हालांकि किसी भी बीमारी के इलाज के लिए इसका उपयोग करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है.

एलोवेरा का सबसे अधिक उपयोग त्वचा की देखभाल में किया जाता है. इसकी पत्तियों से निकलने वाला जेल त्वचा को ठंडक पहुंचाने का काम करता है. गर्मी के मौसम में धूप के कारण त्वचा पर होने वाली जलन में लोग एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करते हैं. कई लोग इसे चेहरे पर भी लगाते हैं, जिससे त्वचा को नमी मिलती है और त्वचा ताजा महसूस होती है. इसी वजह से बाजार में मिलने वाले कई ब्यूटी और स्किन केयर उत्पादों में एलोवेरा का उपयोग किया जाता है.

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बालों की देखभाल में भी एलोवेरा काफी लोकप्रिय है. ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग एलोवेरा जेल को बालों में लगाते हैं. माना जाता है कि इससे बालों को पोषण मिलता है और रूखेपन की समस्या कम हो सकती है. कुछ लोग इसे प्राकृतिक हेयर मास्क के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. यही कारण है कि कई हर्बल शैंपू और हेयर प्रोडक्ट्स में एलोवेरा प्रमुख घटक के रूप में शामिल होता है.

आयुर्वेद में एलोवेरा को पाचन तंत्र के लिए भी लाभकारी माना गया है. कुछ लोग सीमित मात्रा में इसका सेवन करते हैं. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि एलोवेरा का सेवन हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता, इसलिए बिना डॉक्टर के सलाह इसका अधिक सेवन नहीं करना चाहिए.

एलोवेरा की खेती भी किसानों के लिए लाभदायक मानी जाती है. इसकी मांग औषधीय, कॉस्मेटिक और हर्बल उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में बनी रहती है. कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ एलोवेरा की खेती भी कर रहे हैं. इसकी खेती में अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और यह कई प्रकार की मिट्टियों में उगाया जा सकता है. यही वजह है कि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है.

ग्रामीण क्षेत्रों में एलोवेरा को घरेलू उपयोग के लिए भी लगाया जाता है. कई परिवार अपने घरों के आंगन या बगीचे में इसके पौधे लगाते हैं. जरूरत पड़ने पर इसकी पत्तियों का उपयोग किया जाता है. कम देखभाल और आसान उपलब्धता के कारण यह लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है.

विशेषज्ञ जमुना प्रसाद यादव का कहना है कि एलोवेरा में कई लाभकारी गुण जरूर पाए जाते हैं, लेकिन इसे किसी गंभीर बीमारी का निश्चित इलाज नहीं माना जाना चाहिए. स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे जरूरी है. एलोवेरा का उपयोग केवल सहायक उपाय के रूप में किया जाना चाहिए.

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