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Thai magur fish health risks: भारत में बैन ये मछली, खाने से हो सकता है कैंसर

Last Updated:June 25, 2026, 19:33 IST

Thai Catfish Side Effects: थाई मागुर भारत में बैन है. इसे खाने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. हालांकि देश में कई लोग अभी भी इसका अवैध पालन और बिक्री करते हैं, क्योंकि ये मछली बहुत ही आसानी से तेजी से बढ़ती है.

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तेजी से बढ़ती है...खूब बिकती है, फिर भी भारत में बैन ये मछली, वजह चौंका देगी Zoom

मछली को सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. आमतौर पर ये माना जाता है कि मछली खाने से आंखें जल्दी नहीं खराब होती हैं. लेकिन कई मछलियां दिमाग और दिल के लिए जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर होती है, जिससे सेवन सेहतमंद साबित होता है.

देश में रोहू, कतला, इलिश, चिंगड़ी जैसी लोकप्रिय मछलियों के अलावा भी कई तरह की मछलियां खाई जाती हैं. लेकिन कुछ मछलियां ऐसी होती हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं. थाई मागुर ऐसी ही एक मछली है.

थाई मागुर मछली कैसी होती है. यह मछली गहरे रंग की होती है, इसके मुंह के पास लंबी मूंछ जैसी संरचनाएं होती हैं और यह कम ऑक्सीजन वाले पानी में भी जीवित रह सकती है. इसे भारत में बैन भी किया गया है. यह एक विदेशी प्रजाति की कैटफिश है, जिसे क्लेरियास गैरीपिनस या अफ्रीकी कैटफिश भी कहा जाता है. यह बहुत तेजी से बढ़ती है और कठिन परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रह सकती है.

हेल्थ के लिए नुकसानदायकमछली पालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह मछली केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक मानी जाती है. कुछ अध्ययनों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस मछली के सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.यही वजह है कि लोगों को इसके प्रति जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जाते हैं.

भारत में बैन ये मछलीसाल 2000 में भारत में इस मछली के पालन पर प्रतिबंध लगाया गया था. इसका मुख्य कारण यह था कि यह मांसाहारी और आक्रामक स्वभाव की होती है. यह स्थानीय मछलियों के भोजन और आवास पर कब्जा कर लेती है, जिससे देशी मछलियों की संख्या प्रभावित होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्राकृतिक जलाशयों में फैल जाए, तो नदियों, तालाबों और झीलों के पारिस्थितिक संतुलन को नुकसान पहुंचा सकती है. थाई मागुर की एक और समस्या यह है कि इसे कई जगहों पर खराब या सड़ा हुआ मांस खिलाकर पाला जाता है. इसके अलावा, यह कुछ परजीवियों और रोगों को भी फैलाने की क्षमता रखती है, जो अन्य मछलियों और जलीय जीवों के लिए खतरा बन सकते हैं.

About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

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