जौनपुर वालों के पीछे पड़ा ऐसा मच्छर…दिन में हमला ज्यादा, मुंह से फेंक देगा खून, करोगे इतनी उल्टी

Last Updated:August 19, 2026, 22:55 IST
How to Identify Dengue Mosquito : बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है. डेंगू एक वायरल फीवर है, जो मुख्य रूप से एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. कई लोग सोचते हैं कि यह मच्छर सिर्फ रात में काटता है, लेकिन ऐसा नहीं है. जौनपुर के चिकित्सक डॉ. ऋषभ यादव लोकल 18 से बताते हैं कि मानसून सीजन में थोड़ी सी लापरवाही घातक हो सकती है. लगातार उल्टी, उल्टी में खून आना, पेशाब या मल में खून दिखाई देना और शरीर पर छोटे-छोटे लाल चकत्ते रेड फ्लैग साइन हो सकते हैं. दिन के समय की गई लापरवाही आपको डेंगू के जबड़े में पहुंचा सकती है.
जौनपुर. बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ने के बीच लोगों को अब सिर्फ रात में ही नहीं, बल्कि दिन में भी मच्छरों से बचाव के लिए सतर्क रहने की जरूरत है. डेंगू एक वायरल फीवर है, जो मुख्य रूप से एडीज मच्छर के काटने से फैलता है. जौनपुर के चिकित्सक डॉ. ऋषभ यादव लोकल 18 से बताते हैं कि एडीज मच्छर दिन में अधिक सक्रिय रहता है. ऐसे में दिन के समय लापरवाही भारी पड़ सकती है और लोग डेंगू की चपेट में आ सकते हैं. डीआर मेमोरियल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ यादव के मुताबिक, डेंगू से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि मच्छरों को पनपने से रोका जाए. घर और आसपास पानी जमा न होने दें. जहां पानी जमा हो, उसे तुरंत निकालें और पानी के बर्तनों को अच्छी तरह ढककर रखें. मच्छरदानी का इस्तेमाल करने के साथ ही दिन में भी पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनने चाहिए. यह सोचकर लापरवाह न हों कि मच्छर सिर्फ रात में काटता है, क्योंकि एडीज मच्छर दिन में भी हमला करता है.
तुरंत करें ये काम
डॉ. ऋषभ बताते हैं कि डेंगू में सामान्य तौर पर तेज बुखार, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं. लगातार या अत्यधिक उल्टी होना, उल्टी में खून आना, पेशाब या मल में खून दिखाई देना और शरीर पर छोटे-छोटे लाल चकत्ते या पेटीचियल हेमरेज होना रेड फ्लैग साइन हो सकते हैं. सांस से जुड़ी गंभीर परेशानी या अत्यधिक खांसी जैसी समस्या होने पर भी मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए. ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.
दर्द की दवा पड़ सकती है भारी
डॉ. ऋषभ कहते हैं कि डेंगू के दौरान शरीर और जोड़ों में तेज दर्द होने पर कई लोग खुद से दर्द की दवाएं लेना शुरू कर देते हैं. ऐसा न करें. कुछ दर्द निवारक दवाएं, जैसे एसेक्लोफेनाक और डाइक्लोफेनाक, डेंगू की स्थिति में नुकसान पहुंचा सकती हैं. प्लेटलेट कम होने और गैस्ट्रिक समस्या के कारण खून बहने का खतरा बढ़ सकता है और गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है. बुखार या शरीर में दर्द होने पर ओवर-द-काउंटर दवाएं खुद से लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से लेना बेहतर है. डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों से बचना और आसपास साफ-सफाई बनाए रखना है.
About the AuthorPriyanshu Gupta
प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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Jaunpur,Uttar Pradesh
First Published :
August 19, 2026, 22:55 IST



