काकड़दा में कैमरे में कैद हुआ मोर और नीलगायों का मनमोहक नजारा, प्रकृति प्रेमियों के लिए बना खास आकर्षण

Last Updated:June 28, 2026, 06:35 IST
Jhalawar Wildlife Tourism: झालावाड़ के काकड़दा क्षेत्र में नीलगायों और राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौजूदगी से प्रकृति की रौनक बढ़ गई है. खुले जंगलों और पहाड़ी इलाकों में नीलगायों (रोज़ड़े) के झुंड और मोरों के सुंदर दृश्य कैमरे में कैद हुए हैं. स्थानीय निवासी दिनेश नागर के अनुसार शाम को ऐसे नजारे रोज दिखते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि जैव विविधता को बनाए रखने के लिए मानव और वन्यजीवों में संतुलन जरूरी है ताकि यह समृद्ध प्राकृतिक आवास और पर्यावरण हमेशा सुरक्षित रह सके.
झालावाड़ जिले के काकड़दा क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता इन दिनों वन्यजीवों की मौजूदगी से और भी आकर्षक नजर आ रही है, जहां खुले जंगल, झाड़ियां और पहाड़ी इलाकों के बीच नीलगायों के झुंड और राष्ट्रीय पक्षी मोर के मनमोहक दृश्य कैमरों में कैद हुए हैं. ये तस्वीरें इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक आवास की खूबसूरती को बखूबी बयां करती हैं, जिसके बारे में स्थानीय निवासी दिनेश नागर ने बताया कि इस इलाके में शाम के समय रोजाना ऐसे ही अद्भुत नजारे देखने को मिलते हैं.
शांत वातावरण के बीच खुले मैदान में विचरण करता चार नीलगायों का यह झुंड पूरी तरह सहज नजर आ रहा है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि क्षेत्र में अब भी उनके लिए अनुकूल प्राकृतिक वातावरण मौजूद है, वहीं एक अन्य तस्वीर में बेहद करीब से कैमरे में कैद हुईं दो नीलगायों की सतर्क निगाहें जंगल में उनकी स्वाभाविक और खूबसूरत जीवनशैली को दर्शाती हैं.
एक तस्वीर में चारों नीलगाय जंगल की ओर बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं जो वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार और उनके समूह में रहने की प्रवृत्ति को दर्शाता है, वहीं स्थानीय लोग इन्हें “रोज़ड़े” के नाम से भी जानते हैं जिनकी गतिविधियां खासकर बरसात के मौसम में इस इलाके में और अधिक देखने को मिलती हैं.
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वहीं राष्ट्रीय पक्षी मोर की तस्वीरें भी बेहद आकर्षक हैं, जहां एक फोटो में वह ऊंची दीवार पर बैठकर अपने रंग-बिरंगे पंखों की अद्भुत छटा बिखेरता नजर आ रहा है तो दूसरी तस्वीर में उसका शानदार नीला गला, आकर्षक कलगी और चमकदार पंख प्रकृति की अनुपम सुंदरता का बखूबी एहसास कराते हैं.
काकड़दा क्षेत्र में वन्यजीवों की यह मौजूदगी केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बल्कि पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी दर्शाती है क्योंकि यदि जंगल, जल स्रोत और प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे तो ऐसे सुंदर जीव-जंतु आने वाली पीढ़ियों को भी देखने को मिलेंगे, और यही वजह है कि वन्यजीव विशेषज्ञ भी मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने को आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता मानते हैं.
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