Rajasthan

मां की पीठ पर सैर करते दिखे नन्हे घड़ियाल, चंबल नदी में दिखा दुर्लभ नजारा

Last Updated:June 28, 2026, 09:53 IST

Dholpur Chambal River Ghariyal Record Hatching Update: धौलपुर से गुजरने वाली चंबल नदी में इस बार रिकॉर्ड दो हजार से अधिक नन्हे घड़ियालों का जन्म हुआ है. अंडों से बाहर आने के बाद ये बच्चे अपनी मां की पीठ और थूथन पर बैठकर अठखेलियां कर रहे हैं, जिसका मनमोहक दृश्य वन्यजीव प्रेमियों को लुभा रहा है. वन विभाग के अनुसार, अंडवा पुरैनी और बसई डांग जैसी नेस्टिंग साइटों पर कड़ी सुरक्षा के चलते सफल हैचिंग हुई है. मादा घड़ियाल सामूहिक रूप से बच्चों की देखभाल कर मातृत्व की अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं, जो चंबल संरक्षण की बड़ी सफलता है.

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Dholpur: राजस्थान के धौलपुर जिले से होकर बहने वाली चंबल नदी, जो कभी डाकुओं और बागियों के खौफ के लिए कुख्यात हुआ करती थी, आज वन्यजीवों के संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत और मनमोहक मिसाल पेश कर रही है. इन दिनों चंबल नदी के किनारे किसी उत्सव से कम नजर नहीं आ रहे हैं. यहां हजारों की संख्या में नन्हे घड़ियाल अंडों से सुरक्षित बाहर आ चुके हैं और पानी के भीतर अपनी मां के साथ अठखेलियां कर रहे हैं. इन नन्हे शावकों के पानी में तैरने के शुरुआती प्रयास और अपनी मां की थूथन व पीठ पर बैठकर नदी की सैर करने के दुर्लभ दृश्यों ने देश-दुनिया के वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों का दिल जीत लिया है. प्रकृति का यह अद्भुत नजारा चंबल के पारिस्थितिकी तंत्र में आए बेहतरीन सुधार को साफ बयां करता है.

चंबल वन्यजीव अभयारण्य से सामने आ रहे इन दृश्यों में सबसे ज्यादा हैरान और भावुक कर देने वाली बात यह है कि मादा घड़ियाल केवल अपने सगे बच्चों की ही नहीं, बल्कि नदी में मौजूद दूसरे घड़ियालों के बच्चों की भी उतनी ही शिद्दत से परवाह और सुरक्षा कर रही हैं. नदी के अलग-अलग कोनों में यह देखा गया है कि एक ही मादा घड़ियाल दर्जनों बच्चों को एक साथ अपनी विशाल पीठ पर लादकर नदी के एक किनारे से दूसरे सुरक्षित किनारे की ओर ले जा रही है. चूंकि ये नन्हे घड़ियाल अभी पूरी तरह से तैरना नहीं जानते, इसलिए उनकी मां उन्हें नदी की तेज और जानलेवा लहरों के बहाव से बचाने के लिए अपनी पीठ का सहारा देती है. वह धीरे-धीरे उन्हें शिकार करने और तैरने के गुर भी सिखा रही है. यही वजह है कि जीवन के शुरुआती हफ्तों में ये बच्चे अपनी मां की छत्रछाया से एक पल के लिए भी दूर नहीं जाते.

धौलपुर की नेस्टिंग साइटों पर रिकॉर्ड हैचिंग: ‘मदर कॉलिंग’ प्रक्रिया रही सफलवन विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, धौलपुर क्षेत्र में घड़ियालों के अंडों से बच्चों के बाहर निकलने का वार्षिक सिलसिला अब लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. इस बार जिले की विभिन्न संरक्षित नेस्टिंग साइटों पर एक साथ दो हजार से भी अधिक घड़ियाल शावकों की रिकॉर्ड और सफल हैचिंग दर्ज की गई है. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में घड़ियालों के कुनबे को बढ़ाने के लिए वन विभाग की टीमें पिछले कई महीनों से दिन-रात मेहनत कर रही थीं.

अंडों को जंगली सूअरों, आवारा मवेशियों, गीदड़ों और रेत माफियाओं से बचाने के लिए चौबीसों घंटे विशेष निगरानी रखी गई थी. जिला वन अधिकारी (DFO) आशीष व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि राजस्थान सीमा के अंतर्गत आने वाले अंडवा पुरैनी, कठूमरा, बसई डांग और शंकरपुरा जैसे चिन्हित संवेदनशील स्थानों पर मादा घड़ियालों ने भारी तादाद में अंडे दिए थे. प्राकृतिक रूप से ‘मदर कॉलिंग’ (मां की विशेष आवाज सुनना) की अद्भुत प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे सुरक्षित बाहर आ गए, जो चंबल संरक्षण अभियान के लिए एक ऐतिहासिक कामयाबी है.

चंबल की प्राकृतिक सेहत सुधरने का बड़ा संकेतपारिस्थितिकी के जानकारों के मुताबिक, घड़ियाल किसी भी मीठे पानी की नदी के शुद्ध और स्वस्थ होने के सबसे बड़े सूचक (इंडिकेटर) माने जाते हैं. चंबल नदी में इतनी भारी संख्या में बच्चों का सुरक्षित जन्म और उनका जीवित रहना इस बात का सीधा प्रमाण है कि नदी का पानी और वहां का वातावरण पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त और अनुकूल है. वन विभाग की टीमें बच्चों के बड़े होने तक उनकी सुरक्षा के लिए लगातार नदी के तटीय इलाकों में गश्त कर रही हैं, जिससे आने वाले सालों में चंबल में घड़ियालों की आबादी में और भी बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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