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स्वाद में है कड़वा लेकिन सेहत के लिए है अमृत, जानिए करेले के 7 बड़े फायदे जो शायद ही होंगे आपको मालूम

Last Updated:June 28, 2026, 09:20 IST

स्वाद में कड़वा होने के बावजूद करेला पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह डायबिटीज, पाचन, लिवर, इम्यूनिटी और वजन नियंत्रण में सहायक हो सकता है. हालांकि, इसे दवा का विकल्प नहीं माना जाता और नियमित सेवन से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है.

<strong>गोंडा:</strong> करेला एक ऐसी हरी सब्जी है, जिसका नाम सुनते ही कई लोग इसके कड़वे स्वाद की वजह से मुंह बना लेते हैं. हालांकि, स्वाद में कड़वा होने के बावजूद करेला पोषक तत्वों और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है. आयुर्वेद में इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सब्जियों में गिना गया है. वर्षों से इसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता रहा है. विशेष रूप से मधुमेह, पाचन संबंधी समस्याओं और त्वचा की देखभाल में इसे उपयोगी माना जाता है.

लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति के अनुसार करेला शरीर में पित्त और कफ को संतुलित करने में मददगार माना जाता है. इसमें विटामिन सी, विटामिन ए, आयरन, पोटैशियम, फाइबर और कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है.

डायबिटीज में लाभकारी माना जाता है: करेले की सबसे अधिक चर्चा इसके मधुमेह (डायबिटीज) में संभावित लाभ को लेकर होती है. इसमें चारेंटिन (Charantin) और पॉलीपेप्टाइड-पी (Polypeptide-P) जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिन पर वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं. ये रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि, करेला मधुमेह की दवा का विकल्प नहीं है. यदि कोई व्यक्ति डायबिटीज की दवा ले रहा है, तो उसे करेला या उसका जूस नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए.

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पाचन तंत्र को रखे स्वस्थ: करेले में भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसका नियमित और संतुलित सेवन कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह पाचन अग्नि को संतुलित रखने में भी मदद करता है.

लिवर के लिए भी फायदेमंद: आयुर्वेद में करेला लिवर के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है. यह शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया को सहयोग दे सकता है. कुछ अध्ययनों में भी इसके एंटीऑक्सीडेंट गुणों का उल्लेख मिलता है, लेकिन लिवर की किसी गंभीर बीमारी में केवल करेला पर निर्भर रहना उचित नहीं है.

वजन घटाने में सहायक: वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भी करेला उपयोगी माना जाता है. इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है. इससे पेट देर तक भरा हुआ महसूस हो सकता है और बार-बार भूख लगने की संभावना कम होती है. स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के साथ करेला वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है.

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार: करेले में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं. नियमित रूप से संतुलित मात्रा में करेला खाने से शरीर को संक्रमणों से लड़ने में सहायता मिल सकती है.

त्वचा के लिए भी लाभकारी: आयुर्वेद में करेला त्वचा के लिए भी उपयोगी माना गया है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं. कई लोग त्वचा की देखभाल के लिए भी करेला अपने आहार में शामिल करते हैं.

आयुर्वेद में करेला का महत्व: विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार करेला स्वाद में तिक्त (कड़वा) होता है और इसकी प्रकृति शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने वाली मानी जाती है. इसका उपयोग शरीर की शुद्धि, पाचन सुधारने और कफ-पित्त के संतुलन के लिए किया जाता है. कई आयुर्वेदिक तैयारियों में भी करेला या उसके अर्क का उपयोग किया जाता है.

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