Monsoon Poultry Farming: बारिश में मुर्गी पालन कर रहे हैं? ये छोटी-सी गलती बन सकती है लाखों के नुकसान की वजह

Last Updated:June 29, 2026, 08:13 IST
Bhilwara Poultry Farming Care Tips in Rainy Season: भीलवाड़ा के पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में बढ़ी नमी और गंदगी के कारण मुर्गियों में संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इससे बचाव के लिए पोल्ट्री शेड को सूखा रखना, वेंटिलेशन का ध्यान रखना और बीमार मुर्गियों को तुरंत अलग करना जरूरी है. बारिश के दिनों में मुर्गियों को साफ पानी, पौष्टिक आहार और कीटाणुनाशक से साफ किए गए बर्तनों में दाना देना चाहिए. समय पर टीकाकरण और नियमित निगरानी अपनाकर मुर्गी पालक भारी आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.
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बारिश में मुर्गी पालक भूलकर भी न करें ये गलतियां, संक्रमण से बचाएं पोल्ट्री फार्म
भीलवाड़ा: भीलवाड़ा सहित प्रदेशभर में मानसून की शुरुआत के साथ ही मुर्गी पालन करने वाले किसानों की जिम्मेदारी और चुनौतियां काफी बढ़ जाती हैं. बारिश के मौसम में हवा में बढ़ी हुई नमी (ह्यूमिडिटी), जलभराव के कारण होने वाली गंदगी और तापमान में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव की वजह से मुर्गियां बहुत जल्दी बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं. कई बार संक्रमण इतनी तेजी से फैलता है कि देखते ही देखते बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत हो जाती है, जिससे पोल्ट्री व्यवसायियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. हालांकि, थोड़ी सी सावधानी और सही प्रबंधन अपनाकर इस बड़े नुकसान से आसानी से बचा जा सकता है.
बारिश के दिनों में सबसे पहला ध्यान इस बात पर देना चाहिए कि पोल्ट्री शेड के भीतर या उसके आसपास कहीं भी पानी जमा न होने पाए. शेड के अंदर रखे जाने वाले बिछावन (लीटर) को पूरी तरह से सूखा रखना बेहद जरूरी है. यदि बिछावन गीला हो जाए, तो उसे बिना समय गंवाए तुरंत बदलते रहना चाहिए. अगर शेड में लगातार नमी बनी रहती है, तो वहां हानिकारक बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपने लगते हैं, जो मुर्गियों में जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं. इसके साथ ही, अमोनिया गैस को बाहर निकालने के लिए शेड में पर्याप्त हवा आने-जाने (वेंटिलेशन) की उचित व्यवस्था होनी चाहिए.
भीलवाड़ा के मुर्गी पालक लाडू लाल की सलाह: मुर्गियों की दैनिक निगरानी है जरूरीभीलवाड़ा के अनुभवी पोल्ट्री फार्म संचालक लाडू लाल ने बताया कि बारिश के इस संवेदनशील मौसम में मुर्गियों के व्यवहार पर रोजाना बारीक नजर रखना बेहद जरूरी है. यदि फार्म में कोई भी मुर्गी अचानक सुस्त दिखाई दे, दाना खाना-पानी पीना कम कर दे, उसे सांस लेने में किसी तरह की तकलीफ हो या दस्त (डायरिया) जैसी गंभीर समस्या नजर आए, तो इसे सामान्य बात समझकर कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
लाडू लाल के मुताबिक, लक्षण दिखते ही ऐसी बीमार मुर्गियों को तुरंत झुंड से अलग कर देना चाहिए ताकि स्वस्थ मुर्गियों में संक्रमण न फैले. इसके बाद तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेकर उनका उचित इलाज शुरू करना चाहिए. इसके अतिरिक्त, संक्रमण को रोकने के लिए बारिश के दिनों में पोल्ट्री फार्म पर बाहरी लोगों और अन्य वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह सीमित कर देना चाहिए, क्योंकि बाहर से आने वाले लोग भी अपने साथ अनजाने में वायरस या बैक्टीरिया ला सकते हैं.
मानसून के दौरान पोल्ट्री फार्मिंग में इन मुख्य बातों का रखें विशेष ध्यानबारिश के मौसम में पोल्ट्री व्यवसाय को सुरक्षित और मुनाफेदार बनाए रखने के लिए मुर्गी पालकों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों का कड़ाई से पालन करना चाहिए:
साफ पानी और संतुलित पोषण: मुर्गियों को हमेशा साफ, कीटाणुरहित और ताजा पानी ही पिलाना चाहिए, क्योंकि दूषित पानी अधिकांश बीमारियों की मुख्य जड़ होता है. इसके साथ ही उन्हें संतुलित और पौष्टिक आहार (फीड) दें. मानसून में मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाए रखने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह पर आहार में विटामिन और मिनरल सप्लीमेंट जरूर शामिल करें.
कीटाणुनाशक से नियमित सफाई: पोल्ट्री फार्म की नियमित रूप से गहरी सफाई करना अनिवार्य है. मुर्गियों के दाने के बर्तन (फीडर) और पानी के बर्तन (ड्रिंकर) को समय-समय पर अच्छी कीटाणुनाशक दवा से धोना चाहिए. फार्म में जमा होने वाले गीले कचरे और मुर्गियों की बीट (मल) को तुरंत हटाते रहें ताकि हानिकारक कीटाणु न पनपें.
समय पर टीकाकरण: मानसून के आगमन के साथ ही मुर्गियों में कई संक्रामक और वायरल बीमारियों का खतरा चरम पर होता है. इसलिए, मुर्गियों के टीकाकरण (वैक्सीनेशन) शेड्यूल में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी भारी पड़ सकती है. तय समय पर सभी जरूरी टीके अवश्य लगवाएं और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज शुरू कराएं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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