जयपुर का 200 साल पुराना हिंद होटल क्यों हुआ बंद? जानिए शाही विरासत से जुड़े विवादों की पूरी कहानी

Last Updated:June 29, 2026, 09:25 IST
Jaipur Hind Hotel History: जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित ऐतिहासिक हिंद होटल कभी शाही मेहमाननवाजी और शानदार व्यंजनों के लिए पूरे शहर में प्रसिद्ध था. स्थानीय लोगों के अनुसार इसकी शुरुआत 200 वर्ष से अधिक पहले एक मिठाई की दुकान के रूप में हुई और 1951 में इसे हिंद होटल का स्वरूप दिया गया. लीज और अन्य विवादों के कारण वर्ष 2005 से यह होटल बंद पड़ा है. हालांकि इसकी भव्य वास्तुकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है. तीज और गणगौर जैसे आयोजनों पर इसकी बालकनी से विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष मंच सजाया जाता है, जिससे यह इमारत आज भी शहर की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है.
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जयपुर. राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक किलों, महलों और खूबसूरत इमारतों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है. यहां आज भी वर्षों पुरानी इमारतें अपनी बेजोड़ स्थापत्य कला और भव्यता के साथ खड़ी हैं. इन्हीं में कुछ ऐसी इमारतें भी हैं, जो कभी होटल और हवेलियां हुआ करती थीं. ऐसी ही एक इमारत है जयपुर के त्रिपोलिया बाजार स्थित हिंद होटल, जिसे शहर के सबसे पुराने होटलों में से एक माना जाता है. हालांकि, लीज और अन्य विवादों के चलते यह बहुचर्चित हिंद होटल लंबे समय से बंद पड़ा है. लोकल 18 ने हिंद होटल पहुंचकर इसकी खूबसूरत वास्तुकला और इतिहास को लेकर स्थानीय दुकानदारों से बातचीत की.
उनका कहना है कि एक समय यह होटल जयपुर में शाही व्यंजनों की दावतों से लेकर देश-विदेश के गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी के लिए प्रसिद्ध था. स्थानीय लोगों के अनुसार, 200 वर्ष से भी अधिक पहले लधूजी और सुंदरजी ने यहां एक साधारण मिठाई की दुकान शुरू की थी. बाद में वर्ष 1951 में इसे हिंद होटल के रूप में विकसित किया गया. उस दौर में जयपुर में इस स्तर के होटल बहुत कम हुआ करते थे, इसलिए यहां आना लोगों के लिए एक यादगार अनुभव माना जाता था. हालांकि वर्ष 2005 से यह होटल बंद है, लेकिन आज भी तीज और गणगौर के अवसर पर इसकी बालकनी से विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष मंच सजाया जाता है.
बेहद सुंदर वास्तुकला का नमूना है हिंद होटल
बाजार के बीचों-बीच स्थित हिंद होटल जयपुर के सबसे पुराने ही नहीं, बल्कि सबसे खूबसूरत होटलों में भी गिना जाता है. इसकी आकर्षक वास्तुकला आज भी दूर से लोगों का ध्यान खींचती है. होटल के ऊपरी हिस्से में हवेली शैली के सुंदर गुंबद और जालीदार झरोखों वाली बालकनियां बनी हुई हैं, जिन पर ‘हिंद होटल’ लिखा हुआ आज भी स्पष्ट दिखाई देता है. इस होटल से जुड़ी कई किंवदंतियां भी प्रचलित हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, होटल के पास दो प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जिनकी छत और दीवारें आपस में जुड़ी हुई हैं. मंदिर के पुजारियों का कहना है कि होटल का निर्माण मंदिर क्षेत्र की भूमि को शामिल कर किया गया था, जिसके कारण यह अधिक समय तक नहीं चल सका. वहीं, मंदिर के निकट होने के बावजूद होटल में मदिरा सेवन और अन्य गतिविधियों को लेकर स्थानीय लोगों में भी नाराजगी रही. बताया जाता है कि ऐसे कई विवादों के चलते अंततः होटल बंद हो गया.
लीज और अन्य विवादों के चलते अब बंद पड़ा है हिंद होटल
लोकल 18 से बातचीत में स्थानीय लोगों ने बताया कि एक समय जयपुर की विरासत और आतिथ्य सत्कार का प्रतीक रहा हिंद होटल बाद में लीज से जुड़े कथित कूटरचित दस्तावेजों और अन्य विवादों में घिर गया. इन मामलों में एफआईआर दर्ज हुई और लंबे समय तक मामला अदालत में चलता रहा. वर्तमान में होटल को बाहर से पूरी तरह सील कर दिया गया है और किसी भी व्यक्ति को इसके अंदर जाने की अनुमति नहीं है.
हालांकि कई वर्षों से बंद होने के बावजूद यह इमारत बाहर से आज भी बेहद आकर्षक दिखाई देती है और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. वहीं अंदर का हिस्सा अब काफी जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है. इसके बावजूद हिंद होटल की यह ऐतिहासिक इमारत आज भी जयपुर की समृद्ध विरासत की एक महत्वपूर्ण पहचान बनी हुई है. जयपुर घूमने आने वाले पर्यटक इसे देखने और इसकी खूबसूरत वास्तुकला की फोटोग्राफी करने के लिए आज भी यहां पहुंचते हैं.
About the Authordeep ranjan
दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें
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