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इंडियन टीम पर भारी पड़ा राजस्थान का छोरा! जय मुंदड़ा ने पहली ही सीरीज में ढहा दिया भारत का अजेय किला

जयपुर. क्रिकेट में अक्सर कहा जाता है कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती. राजस्थान के टोंक से निकलकर आयरलैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम तक पहुंचने वाले तेज गेंदबाज जय मुंदड़ा ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है. भारत के खिलाफ टी20 सीरीज में जय मुंदड़ा का प्रदर्शन केवल आयरलैंड की जीत की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और मेहनत की मिसाल भी बन गया. जिस खिलाड़ी ने कभी टोंक की गलियों में क्रिकेट खेलना शुरू किया था, उसी ने अब विश्व चैंपियन भारतीय टीम के खिलाफ ऐसा प्रदर्शन किया कि भारत का करीब तीन साल से चला आ रहा 16 द्विपक्षीय टी20 सीरीज और टूर्नामेंट का अजेय अभियान खत्म हो गया.

आयरलैंड ने भारत के खिलाफ टी20 सीरीज 2-0 से अपने नाम कर इतिहास रच दिया. पहली बार भारत के खिलाफ टी20 सीरीज जीती. इस ऐतिहासिक सफलता के सबसे बड़े नायकों में राजस्थान के जय मुंदड़ा रहे. उन्होंने पूरी सीरीज में भारतीय बल्लेबाजों को परेशान किया, दोनों मैचों में कुल पांच विकेट झटके और शानदार प्रदर्शन के दम पर ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार अपने नाम किया. निर्णायक मुकाबले में उनकी घातक गेंदबाजी ने आयरलैंड की जीत की नींव रखी.

पहली ही गेंद पर संजू सैमसन को आउट कर सूर्खियों में आए

बेलफास्ट में खेले गए निर्णायक मुकाबले में भारत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी. आयरलैंड ने 20 ओवर में 8 विकेट पर 154 रन बनाए. 155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को शुरुआत में ही बड़ा झटका लगा. जय मुंदड़ा ने अपने पहले ही ओवर की पहली गेंद पर संजू सैमसन को एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया. यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का सबसे यादगार पल बन गया. भारतीय टीम 20 ओवर में 9 विकेट पर 153 रन ही बना सकी और मुकाबला एक रन से हार गई.

कैसे शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

जय मुंदड़ा का क्रिकेट सफर राजस्थान के टोंक से शुरू हुआ. बचपन में वे तेज गेंदबाज नहीं, बल्कि स्पिन गेंदबाज थे. टोंक में उनके पहले कोच इफ्तिखार अली ने उनकी प्रतिभा को निखारा. बाद में जयपुर में कोच मोहन गुर्जर ने उनकी लंबाई और शारीरिक क्षमता को देखते हुए तेज गेंदबाजी अपनाने की सलाह दी. जय ने कोच की बात मानी और यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ.

कोरोना काल में बदली जिंदगी

कोरोना महामारी के दौरान क्रिकेट लगभग ठप हो गया था. इसी दौरान जय ने पढ़ाई के लिए आयरलैंड जाने का फैसला किया. शुरुआती दिनों में उनका पूरा ध्यान शिक्षा पर था, लेकिन क्रिकेट से उनका रिश्ता कभी नहीं टूटा. उन्होंने स्थानीय क्रिकेट क्लब से जुड़कर लगातार मेहनत की, घरेलू प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया और धीरे-धीरे आयरलैंड की चयनकर्ताओं की नजरों में आ गए. बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह मिली.

आयरलैंड टीम में कैसे मिला मौका

जय मुंदड़ा ने बताया कि उनके पास अभी आयरलैंड की नागरिकता नहीं है. आईसीसी के नियमों के तहत यदि कोई खिलाड़ी किसी देश में निर्धारित अवधि तक रहकर वहां का घरेलू क्रिकेट खेलता है, तो वह उस देश की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकता है. इसी नियम के तहत उन्हें आयरलैंड की ओर से खेलने का अवसर मिला. लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए उन्होंने टीम में अपनी जगह मजबूत कर ली.

पिता को याद कर भावुक भी हो गए थे  जय मूंदड़ा

भारत के खिलाफ पहली ही गेंद पर संजू सैमसन का विकेट लेने के बाद जय बेहद भावुक हो गए थे.  उस पल उन्हें सबसे पहले अपने दिवंगत पिता की याद आई. उन्होंने कहा था कि “काश! पापा मुझे आयरलैंड की जर्सी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए देख पाते. सबसे ज्यादा खुशी शायद उन्हें ही होती.” जय के  मुताबिक उनके पिता चाहते थे कि वे पढ़ाई के लिए विदेश जाएं और जीवन में आगे बढ़ें. वही सपना आज उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक ले आया.

भारत के लिए खेलने का सपना भी देखा

जय मुंदड़ा का कहना है कि हर क्रिकेटर बड़े मंच पर खेलने का सपना देखता है. भारत के लिए खेलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वे आयरलैंड के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दे रहे हैं. हालांकि भविष्य में अवसर मिला तो आईपीएल में खेलना उनकी बड़ी इच्छा है.

जय मूंदड़ा ने भारत के अजेय रहने का सपना किया चकनाचूर 

भारत के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही. मार्च में टी20 विश्व चैंपियन बनने के बाद टीम की यह पहली द्विपक्षीय टी20 सीरीज थी. सूर्यकुमार यादव के बाद श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम पहली बार किसी सीरीज में उतरी थी, लेकिन जय मुंदड़ा की कहर बरफाती गेंदों ने आयरलैंड को 2-0 से सीरीज जीतने ममद कर नया इतिहास रच दिया. इस हार के साथ भारत का लगातार 16 द्विपक्षीय टी20 सीरीज और टूर्नामेंट तक चला आ रहा अजेय अभियान भी समाप्त हो गया.

टोंक जैसे छोटे शहर से निकले जय मुंदड़ा ने साबित किया कि  प्रतिभा को पहचान और अवसर मिल जाए तो वह दुनिया के किसी भी मंच पर अपनी छाप छोड़ सकती है. टोंक की पिचों से शुरू हुआ उनका सफर अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नई पहचान बना चुका है. भारत के खिलाफ उनका प्रदर्शन न केवल आयरलैंड की ऐतिहासिक जीत का आधार बना, बल्कि राजस्थान के इस युवा तेज गेंदबाज को विश्व क्रिकेट में नई पहचान भी दिला गया.

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