राज्यसभा के 8 नवनिर्वाचित सदस्यों ने ली शपथ, NDA का कुनबा और मजबूत, सरकार की राह हुई आसान

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राज्यसभा के 8 सदस्यों ने ली शपथ, NDA का कुनबा और मजबूत, सरकार की राह आसान
Last Updated:June 30, 2026, 07:26 IST
राज्यसभा में आठ नए सदस्यों की शपथ से एनडीए की ताकत 141 तक पहुंच गई है. यह आंकड़ा साधारण बहुमत से काफी अधिक है. भविष्य में एनडीए को बीजद और वाईएसआर कांग्रेस का भी समर्थन मिल सकता है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में फिर से विपक्ष के नेता बने हैं.
राज्यसभा के आठ नवनिर्वाचित सदस्यों के सोमवार को शपथ लेने के साथ ही उच्च सदन में सत्ता पक्ष की स्थिति पहले से अधिक मजबूत हो गई. नए सदस्यों के शामिल होने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का संख्या बल बढ़ गया है, जिससे सरकार को अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में पहले के मुकाबले अधिक सहूलियत मिलने की उम्मीद है. खासकर संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं.
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति के कक्ष में अलग से संविधान की प्रति हाथ में लेकर हिंदी में शपथ ली, जबकि अन्य सात सदस्यों ने सदन में शपथ ग्रहण किया. शपथ लेने वाले अन्य सदस्यों में भाजपा के तरुण चुघ, गुजरात से जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया और मानसिंह मेरामन परमार, कर्नाटक से एम. नागराजा, महाराष्ट्र से राजेंद्र हीरालाल जैन, मणिपुर से अधिकारीमयुम शारदा देवी तथा राजस्थान से अलका सिंह शामिल हैं.
शपथ ग्रहण के दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, सदन के नेता जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी मौजूद रहे. सभापति राधाकृष्णन ने सभी नए सदस्यों का स्वागत करते हुए उन्हें सफल संसदीय कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं. नए सदस्यों के आने के बाद 242 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की संख्या बढ़कर 141 हो गई है. यदि 10 मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों का समर्थन भी जोड़ दिया जाए तो सरकार के पक्ष में 151 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है. यह आंकड़ा साधारण बहुमत से काफी अधिक है और सरकार को सामान्य विधेयकों को पारित कराने में राहत देता है.
बीजद-वाईएसआर कांग्रेस दे सकते हैं समर्थन
हालांकि संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अभी भी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है. इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजू जनता दल (बीजद) और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दल यदि भविष्य में समर्थन देते हैं तो सरकार इस लक्ष्य के और करीब पहुंच सकती है. इन दलों ने पहले भी कई अहम विधेयकों पर सरकार का साथ दिया है. पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव भी सत्ता पक्ष के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं.
बढ़े हुए संख्या बल के कारण केंद्र सरकार भविष्य में महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने तथा लोकसभा की सीटों के पुनर्निर्धारण जैसे बड़े संविधान संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर सकती है. हालांकि लोकसभा में सरकार के सामने अभी भी आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने की चुनौती बनी हुई है.
इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को दोबारा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता मिल गई है. कर्नाटक से लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे खरगे ने शपथ लेने के बाद कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में जनता की आवाज, उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं को पूरी मजबूती से सदन में उठाना उनकी प्राथमिकता रहेगी. उन्होंने सोशल एक्स पर कहा कि वह जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे. साथ ही उन्होंने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस सांसदों, पार्टी कार्यकर्ताओं और ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं का आभार भी व्यक्त किया.
About the Authorसंतोष कुमार
न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें
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