Rajasthan

पक्षियों के बाद अब कछुओं का भी स्वर्ग बना केवलादेव, एक ही जगह मिले 7 प्रजातियों के दुर्लभ टर्टल

Last Updated:June 30, 2026, 08:23 IST

Bharatpur Keoladeo National Park Turtle Survey: भरतपुर के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क में पहली बार हुए टर्टल सर्वे ने जैव विविधता का नया रिकॉर्ड बनाया है. सर्वे के दौरान सात प्रजातियों के कछुओं की पहचान की गई, जबकि डिग्गी क्षेत्र में एक साथ पांच अलग-अलग प्रजातियों के कछुए देखे गए. विशेषज्ञ इसे दुर्लभ उपलब्धि मान रहे हैं. डीएफओ चेतन कुमार का कहना है कि यह पार्क के संतुलित इकोसिस्टम और सुरक्षित वेटलैंड का प्रमाण है. भविष्य में ऐसे सर्वे संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे. कछुओं की अच्छी संख्या जल गुणवत्ता और स्वस्थ पर्यावरण का भी सकारात्मक संकेत मानी जाती है.

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भरतपुर. विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क एक बार फिर अपनी जैव विविधता को लेकर चर्चा में है. इस बार पार्क में पहली बार कछुओं की व्यवस्थित गणना टर्टल सर्वे कराई गई, जिसमें सात अलग-अलग प्रजातियों की पहचान की गई है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि प्रदेश में किसी एक स्थान पर कछुओं की इतनी अधिक विविधता पहली बार दर्ज की गई है. इससे केवलादेव पार्क की पारिस्थितिकी समृद्धि का एक नया पहलू सामने आया है.

घना डीएफओ चेतन कुमार ने लोकल 18 से विशेष बातचीत में बताया कि पार्क में पहली बार वैज्ञानिक तरीके से कछुओं का सर्वे कराया गया. इस सर्वे का उद्देश्य पार्क के वेटलैंड क्षेत्रों में पाए जाने वाले कछुओं की प्रजातियों उनकी संख्या और उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति को समझना था. सर्वे के दौरान यह पाया गया कि यहां कछुओं की मौजूदगी काफी अच्छी संख्या में है, जो इस क्षेत्र के स्वस्थ पर्यावरण का संकेत देती है.

सात प्रजाति के मिले हैं कछुए

डीएफओ चेतन कुमार ने ने बताया कि सर्वे में जिन प्रमुख प्रजातियों की पहचान हुई है, उनमें इंडियन रूफ्ड टर्टल, इंडियन टेंट टर्टल, क्राउन रिवर टर्टल और सॉफ्टशेल कछुए शामिल हैं. इन प्रजातियों का एक ही क्षेत्र में मिलना यह दर्शाता है कि पार्क के जलाशय और वेटलैंड कछुओं के लिए अनुकूल और सुरक्षित आवास प्रदान कर रहे हैं. यह जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से बेहद सकारात्मक संकेत है. सबसे खास बात यह रही कि केवलादेव की डिग्गी क्षेत्र में एक ही स्थान पर पांच अलग-अलग प्रजातियों के कछुए एक साथ देखे गए. इसे दुर्लभ घटना माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर इतनी अधिक प्रजातियां एक ही स्थान पर एक साथ नहीं मिलती. इससे यह साबित होता है कि पार्क का इकोसिस्टम संतुलित और जीवों के लिए अनुकूल बना हुआ है.

सर्वे संरक्षण योजनाओं को प्रभावी बनाने में करेंगे मदद

डीएफओ ने बताया कि इस तरह के सर्वे भविष्य में संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाने में मदद करेंगे. कछुए जल पारिस्थितिकी के महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं, जो जल की गुणवत्ता बनाए रखने में भी भूमिका निभाते हैं. ऐसे में उनकी संख्या और विविधता का बढ़ना पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद अहम है. केवलादेव नेशनल पार्क पहले से ही पक्षियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है. लेकिन अब कछुओं की यह नई पहचान इसे और भी खास बना रही है. आने वाले समय में इस तरह के शोध और सर्वे पार्क की जैव विविधता को और बेहतर ढंग से समझने और संरक्षित करने में सहायक साबित होंगे.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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