Rajasthan

बागियों की नहीं, अब दुर्लभ पक्षियों की धरती बनी चंबल, 116 इंडियन स्कीमर चूजों ने बढ़ाई रौनक

Last Updated:June 30, 2026, 08:49 IST

Indian Skimmer Conservation Campaign: धौलपुर के राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में वन विभाग के इंडियन स्कीमर संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है. पहली बार वैज्ञानिक तरीके से किए गए संरक्षण प्रयासों के तहत 47 घोंसलों में मिले 164 अंडों में से 116 चूजों की सफल हैचिंग हुई है. करीब 71 प्रतिशत सफलता दर इस संकटग्रस्त पक्षी के संरक्षण के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है. वन विभाग ने तिघरा, गुढ़ा और नगर क्षेत्र में नेस्टिंग स्थलों की सुरक्षा, बाड़बंदी और नियमित निगरानी की. इस अभियान से इंडियन स्कीमर के साथ अन्य नदीय पक्षियों के संरक्षण को भी मजबूती मिली है.

राजस्थान के धौलपुर जिले से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अच्छी खबर सामने आई है. राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में वन विभाग द्वारा चलाए गए इंडियन स्कीमर संरक्षण अभियान को बड़ी सफलता मिली है. इस अभियान के तहत वैश्विक स्तर पर संकटग्रस्त माने जाने वाले इंडियन स्कीमर पक्षी के 116 चूजों की सफल हैचिंग हुई है. इससे चंबल नदी क्षेत्र में इस दुर्लभ पक्षी की संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

इंडियन स्कीमर अपनी अनोखी शिकार करने की शैली के लिए जाना जाता है. यह पक्षी उड़ते हुए अपनी लंबी निचली चोंच को पानी की सतह पर चलाते हुए मछलियों का शिकार करता है. राजस्थान में यह पक्षी केवल धौलपुर जिले में ही पाया जाता है, इसलिए इसे धौलपुर का जिला पक्षी भी माना जाता है. चंबल नदी के रेतीले टापू और सैंडबार इसके घोंसले बनाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान हैं.

धौलपुर वन विभाग ने इस बार तिघरा, गुढ़ा और नगर क्षेत्र को इंडियन स्कीमर के प्रमुख नेस्टिंग स्थलों के रूप में चिन्हित किया. इन संवेदनशील क्षेत्रों की बाड़बंदी कर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई और वनकर्मियों की लगातार निगरानी रखी गई. इसका उद्देश्य अंडों और नवजात पक्षियों को प्राकृतिक शिकारियों तथा मानवीय हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना था. विभाग के इस संरक्षण अभियान का सकारात्मक परिणाम सामने आया है, जिससे इंडियन स्कीमर के प्रजनन और संरक्षण को बढ़ावा मिला है.

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अभियान के दौरान तिघरा, गुढ़ा और नगर क्षेत्र में इंडियन स्कीमर के कुल 47 घोंसले चिन्हित किए गए. इनमें 164 अंडे दर्ज हुए, जिनमें से 116 चूजों की सफल हैचिंग हुई. इस तरह संरक्षण अभियान को करीब 71 प्रतिशत सफलता मिली, जिसे इस संकटग्रस्त पक्षी प्रजाति के संरक्षण के लिए बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है. वन विभाग का मानना है कि प्रभावी निगरानी और सुरक्षा उपायों से इंडियन स्कीमर के प्रजनन को बढ़ावा मिला है, जिससे भविष्य में इसकी संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

वन विभाग के अध्ययन में यह भी सामने आया कि इंडियन स्कीमर के एक घोंसले में सामान्यतः 2 से 4 अंडे पाए जाते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, यह जानकारी इस दुर्लभ और संकटग्रस्त पक्षी की प्रजनन प्रक्रिया को समझने में महत्वपूर्ण साबित होगी. साथ ही भविष्य की संरक्षण योजनाएं तैयार करने, नेस्टिंग स्थलों की बेहतर निगरानी और प्रजनन दर बढ़ाने के लिए भी यह अध्ययन उपयोगी माना जा रहा है. वन विभाग का मानना है कि ऐसे वैज्ञानिक आंकड़े इंडियन स्कीमर के दीर्घकालिक संरक्षण में अहम भूमिका निभाएंगे.

उपवन संरक्षक आशीष व्यास ने बताया कि इस संरक्षण अभियान का सकारात्मक प्रभाव केवल इंडियन स्कीमर तक सीमित नहीं रहा. सुरक्षित नेस्टिंग स्थलों का लाभ रिवर टर्न, लिटिल टर्न, स्मॉल प्राटिनकोल और रिवर लैपविंग जैसी कई अन्य नदीय पक्षी प्रजातियों को भी मिला. इन पक्षियों ने भी बड़ी संख्या में यहां घोंसले बनाए. उनके अनुसार, इससे चंबल नदी के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिली है और नदी किनारे की जैव विविधता के संरक्षण को भी नया बल मिला है.

क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि इस सफल मॉडल को अब चंबल नदी के अन्य संभावित नेस्टिंग क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा. इससे संकटग्रस्त पक्षियों के संरक्षण को और मजबूती मिलेगी. 116 चूजों की सफल हैचिंग इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक तरीके, नियमित निगरानी और स्थानीय स्तर पर किए गए संरक्षण प्रयास दुर्लभ पक्षियों को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

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