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बिच्छू के डंक से लेकर चर्म रोग तक, कई परेशानियों में राहत दिलाता है बेशर्म का पौधा.. जानिए इसके बड़े फायदे

Last Updated:June 30, 2026, 06:24 IST

ग्रामीण इलाकों में बेशर्म (बेहया) के पौधे का उपयोग लंबे समय से सूजन, दर्द, घाव, त्वचा रोग और बिच्छू के डंक जैसी समस्याओं में पारंपरिक घरेलू उपचार के रूप में किया जाता रहा है. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसके औषधीय उपयोग के बावजूद गंभीर बीमारी या विषैले डंक की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से इलाज कराना जरूरी है.

ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बेशर्म (बेहया) के पत्तों का उपयोग सूजन और दर्द से राहत पाने के लिए पारंपरिक घरेलू उपाय के रूप में किया जाता रहा है इसके ताजे पत्तों को हल्का गर्म करके सूजन वाले स्थान पर बांधने से आराम मिल सकता है माना जाता है कि पौधे में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक मौजूद हो सकते हैं जिनमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं. सर्दियों के मौसम में जोड़ों में सबसे अधिक दिक्कतें होती हैं ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग बेशर्म के पत्तों का इस्तेमाल करते हैं हल्का नमक और सरसों का तेल लगाकर गर्म करने के बाद जोड़ों पर बांध लें जिससे राहत मिलती है

बेशर्म का पौधा किसी विशेष देखभाल के बिना भी उग जाता है. यह सालभर हरा-भरा रहता है और सूखता नहीं है. हालांकि यह जहरीला होता है, इसलिए पशु इसे नहीं खाते. इसकी पत्तियां, टहनियां और दूध (सफेद रस) औषधीय उपयोग के लिए खासे प्रसिद्ध हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे घरेलू इलाज का एक आसान उपाय माना जाता है, जो बिना किसी दवा या डॉक्टर के सामान्य बीमारियों में राहत देता है.

बरसात के मौसम में सबसे अधिक समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बिच्छू को लेकर रहती है ऐसे में कई बार बिच्छू डंक मार देता है जिस कारण दर्द तेजी से होने लगती है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग प्राथमिक उपचार के रूप में बेशर्म के पत्तों का दूध उसे स्थान पर लगा देते हैं जिस पर बिच्छू डंक मारता है. उसके बाद धीरे-धीरे राहत मिलने लगती है फिर वह नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपना इलाज करते हैं.

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बेशर्म पौधे में सूजन रोधी गुण यानि एंटी इंफ्लामेटरी गुण पाए जाते हैं. इसकी पत्तियों को गर्म करके सूजी हुई त्वचा पर लगाने से सूजन ठीक हो जाती है. बेहया की पत्तियों से बने लेप को सूजी त्वचा पर लगाने से भी सूजन काम होती है. यह सूजन को 3 से 4 घंटे में ही ठीक करने लगता है. इस तरीके से पुरानी से पुरानी सूजन भी ठीक की का सकती है. सूजन को कम करने के लिए प्राचीन समय से इस पौधे को काफी लाभकारी माना जाता है.

चर्म रोगों में बेशर्म पौधे के फायदे होता है बेशर्म पौधे में मौजूद एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण त्वचा संबंधी रोगों को ठीक करने में मददगार हैं. विटिलिगो जैसे चर्म रोगों में इसकी जड़ को सुखाकर पीसने के बाद कपूर और कोकड़े के तेल में मिलाकर लगाने से आराम मिलता है. यह दाद, खुजली, फोड़े-फुंसी और अन्य त्वचा रोगों में भी प्रभावी है. ग्रामीण चिकित्सक इसे देसी क्रीम के रूप में पहचानते हैं.

बेशर्म की टहनी में मौजूद प्राकृतिक तत्व मुंह की दुर्गंध को भी दूर करते हैं और जबड़ों की हड्डी को मजबूत बनाते हैं ग्रामीण परंपरा में लोग इसकी टहनी से दातून करते हैं. इससे मसूड़ों की सूजन कम होती है और दांतों में कीड़े नहीं लगते है पायरिया और दांतों की सड़न जैसी समस्याओं में भी यह पौधा उपयोगी साबित हुआ है.

बेशर्म के पौधे में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल तत्व पाए जाते हैं, जो घाव को तेजी से भरने में मदद करते हैं. ग्रामीण लोग इसकी पत्तियों का रस निकालकर सीधे घाव पर लगाते हैं. इससे न केवल संक्रमण का खतरा कम होता है बल्कि घाव जल्दी भर जाता है. पुराने या गहरे घावों में भी यह लाभकारी माना गया है.

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