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चित्रकूट में कम बारिश से खरीफ फसल संकट में, श्रीअन्न और दलहन की करें बुवाई, जिलाधिकारी ने किसानों को दी सलाह

Last Updated:June 30, 2026, 11:33 IST

चित्रकूट की भौगोलिक परिस्थितियां भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं. जिले का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी और पथरीला होने के कारण यहां बारिश का पानी अधिक समय तक नहीं ठहर पाता है. इससे भूजल स्तर लगातार नीचे बना रहता है,ऐसे में जिले के अधिकांश किसान पूरी तरह प्राकृतिक वर्षा पर ही निर्भर हैं. ताकि वर्षा होने से उनकी अच्छी फसल हो सके.लेकिन इस बार अभी तक चित्रकूट में वर्षा नहीं हुई है.

चित्रकूटः बुंदेलखंड के चित्रकूट समेत आसपास के जिलों में समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ सीजन की खेती प्रभावित होने लगी है. धान, तिल, उड़द, मूंग, अरहर, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों की बुवाई का समय चल रहा है, लेकिन खेतों में नमी की कमी के कारण किसान असमंजस की स्थिति में हैं.कई किसानों ने अब तक खेतों की जुताई भी शुरू नहीं की है, जबकि कुछ किसानों ने जुताई तो कर ली है, लेकिन बारिश न होने के कारण बुवाई नहीं कर पा रहे हैं, लगातार पड़ रही उमस और तेज धूप ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है.यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है.

भौगोलिक परिस्थिति से किसानो की बढ़ती है मुश्किलें

आप को बता दे कि चित्रकूट की भौगोलिक परिस्थितियां भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं. जिले का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी और पथरीला होने के कारण यहां बारिश का पानी अधिक समय तक नहीं ठहर पाता है. इससे भूजल स्तर लगातार नीचे बना रहता है,ऐसे में जिले के अधिकांश किसान पूरी तरह प्राकृतिक वर्षा पर ही निर्भर हैं. ताकि वर्षा होने से उनकी अच्छी फसल हो सके.लेकिन इस बार अभी तक चित्रकूट में वर्षा नहीं हुई है.

इस संबंध में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने लोकल 18 को बताया कि मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस वर्ष चित्रकूट में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है.उन्होंने कहा कि उत्तर-पूर्वी मानसून का प्रभाव इस क्षेत्र में पहले से ही कम रहता है और इस बार एल नीनो के असर के कारण वर्षा और कम हो सकती है, हमारा अनुमान है कि इस वर्ष जिले में लगभग 700 से 750 मिलीमीटर तक ही वर्षा हो सकती है. इस स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग और हम लोगों ने किसानों के साथ गोष्ठियां आयोजित कर उन्हें कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दी है.

श्री अन्न की खेती को बढ़ाएं

उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि किसानों से कहा गया है कि वे धान का रकबा कम रखें और यदि संसाधन उपलब्ध हों तो केवल 120 दिन में पकने वाली धान की किस्मों की ही बुवाई करें. इसके अलावा उड़द, मूंग, तिल जैसी दलहनी एवं तिलहनी फसलों के साथ-साथ श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है, ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी, रागी और सांवा जैसी फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं. इन फसलों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग किसानों को बीज भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि कम वर्षा की स्थिति में भी किसानों को बेहतर उत्पादन और आर्थिक लाभ मिल सके.

About the AuthorRajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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