टाइल्स लगाने वाले कारीगर के बेटे ने कर दिखाया कमाल! JEE Advanced पास कर परिवार में पहली बार बनेगा IITian

Last Updated:June 30, 2026, 13:40 IST
Education News Rajasthan: सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों के बीच एक टाइल्स लगाने वाले कारीगर के बेटे ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर JEE Advanced परीक्षा में सफलता हासिल कर परिवार का नाम रोशन किया है. यह परिवार के इतिहास में पहला अवसर है, जब कोई सदस्य प्रतिष्ठित IIT में प्रवेश पाने जा रहा है. पिता की कड़ी मेहनत और बेटे के अटूट संकल्प ने इस सफलता की मजबूत नींव रखी. कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई से समझौता न करते हुए उसने अपने सपने को साकार किया. उसकी उपलब्धि न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है.
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कोटा। सपनों को पूरा करने के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की भी जरूरत होती है. इसका उदाहरण कोटा के डीसीएम इंदिरा गांधी नगर निवासी जय कुमार ने पेश किया है. फ्लोर टाइल्स लगाने वाले कारीगर के बेटे जय ने JEE Advanced में सफलता हासिल कर परिवार का सपना साकार कर दिया. वह अपने परिवार के पहले सदस्य हैं, जिन्होंने यह परीक्षा पास की है और अब IIT में पढ़ाई का रास्ता तय किया है.
जय के पिता ललित किशोर फ्लोर टाइल्स लगाने का काम करते हैं. सीमित आय के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी. अतिरिक्त मेहनत कर पढ़ाई का खर्च जुटाया और हर कदम पर बेटे का साथ दिया. उनका कहना है कि बचपन से ही जय पढ़ाई में तेज था, इसलिए शुरुआत से ही लक्ष्य तय कर लिया था कि उसे इंजीनियर बनाना है. बेटे की सफलता पूरे परिवार के लिए गर्व का पल है.
पढ़ाई के लिए हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराईजय ने दसवीं में 94.3 प्रतिशत और बारहवीं में 94.8 प्रतिशत अंक हासिल किए। JEE Main में उनकी ऑल इंडिया रैंक 19481 और एससी वर्ग में 553वीं रैंक रही. वहीं JEE Advanced में उन्होंने सीआरएल 8313 और एससी वर्ग में 196वीं रैंक हासिल की.जय बताते हैं कि परिवार ने पढ़ाई के लिए हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई. ऑनलाइन लेक्चर देखने के लिए घर में इंटरनेट लगवाया गया और लैपटॉप भी दिलाया गया, ताकि तैयारी में कोई बाधा न आए. निजी कोचिंग संस्थान के सीईओ नितिन विजय का कहना है कि कोटा केवल रैंक बनाने वाला शहर नहीं, बल्कि संघर्ष और मेहनत को सफलता में बदलने वाली धरती भी है. जय की उपलब्धि इसका बेहतरीन उदाहरण है.
पिछले दो वर्षों से जय के पिता की दिनचर्या भी बेटे की पढ़ाई के अनुसार चलती रही. वे रोज सुबह कोचिंग छोड़ने, दोपहर में टिफिन पहुंचाने और शाम को वापस घर लाने जाते थे. अपने काम के साथ उन्होंने बेटे की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी पूरी लगन से निभाई. खुद दसवीं तक पढ़े ललित किशोर आर्थिक परिस्थितियों के कारण आगे पढ़ाई नहीं कर सके, लेकिन उन्होंने अपने बेटे का सपना अधूरा नहीं रहने दिया.
कोचिंग संस्थान ने फीस वापस कर दीजय के परिवार में माता देवंती, जो आठवीं तक पढ़ी हैं, और बहन सलोनी, जो बीकॉम की छात्रा हैं, भी इस सफलता से बेहद खुश हैं. संयुक्त परिवार में जय पहले सदस्य होंगे, जो IIT में पढ़ाई करेंगे. जय की तैयारी में राजस्थान सरकार की अनुप्रति योजना भी सहायक बनी. नौवीं के बाद शिक्षक गिरीश गुप्ता ने उनकी प्रतिभा पहचानकर IIT की तैयारी की सलाह दी. दसवीं के बाद पिता ने कोचिंग में दाखिला दिलाया और फीस जमा की. बाद में अनुप्रति योजना में चयन होने पर कोचिंग संस्थान ने फीस वापस कर दी, जिससे परिवार को आर्थिक राहत मिली.
सेल्फ स्टडी और डाउट क्लियर करने के बाद रात तक पढ़ाईजय का कहना है कि उन्होंने पूरा टाइम टेबल बनाकर तैयारी की. सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक कोचिंग, फिर सेल्फ स्टडी और डाउट क्लियर करने के बाद रात तक पढ़ाई का सिलसिला चलता था. रोज करीब छह घंटे सेल्फ स्टडी और चार से पांच घंटे कोचिंग की पढ़ाई करते थे. मोबाइल का उपयोग भी केवल पढ़ाई के लिए किया, क्योंकि उनका एकमात्र लक्ष्य IIT में प्रवेश पाना था.अनुशासन और निरंतर मेहनततैयारी के दौरान मॉक टेस्ट उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी बने. शुरुआत में अंक कम आते थे, लेकिन गलतियों का विश्लेषण कर शिक्षकों से डाउट क्लियर किए और लगातार अभ्यास किया. धीरे-धीरे प्रदर्शन बेहतर होता गया और वे टॉप विद्यार्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने लगे. तनाव होने पर दोस्तों से बातचीत या थोड़ी देर टहलकर खुद को तरोताजा करते और फिर पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई में जुट जाते. यही अनुशासन और निरंतर मेहनत आज उन्हें IIT तक पहुंचाने में सफल रही.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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