Health

ISA tops use of Bupivacaine: बेहोशी की इस दवा का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दें …क्यों ISA ने देशभर के डॉक्टरों को दिए निर्देश

ISA on Bupivacaine:  इंड‍ियन सोसायटी ऑफ एनेस्‍थीस‍ियोलॉज‍िस्‍ट (ISA) ने थेमिस (Themis) कंपनी द्वारा निर्मित ‘ब्यूपिवकेन’ (Bupivacaine) दवा के इस्तेमाल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की सलाह दी है. यह कदम स्पाइनल एनेस्थीसिया के दौरान सामने आई कुछ गंभीर घटनाओं के बाद मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है.

इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि देशभर के सभी एनेस्थीसियोलॉजिस्ट (बेहोशी/एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टरों) को सख्त सलाह दी जाती है कि वे तुरंत प्रभाव से Themis कंपनी द्वारा बनाई गई ब्यूपिवकेन (Bupivacaine) दवा का उपयोग स्पाइनल एनेस्थीसिया और अन्य उद्देश्यों के लिए तत्काल प्रभाव से बंद कर दें.

‘यह एडवाइजरी इसलिए जारी की गई है क्योंकि स्पाइनल एनेस्थीसिया में इस दवा के उपयोग के बाद गंभीर प्रतिकूल घटनाएं (serious adverse events) सामने आई हैं.’

‘इस मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए अगली सूचना तक Themis द्वारा निर्मित Bupivacaine का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है. यह सलाह मरीजों की सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखकर जारी की गई है.’

किन मरीजों को दी जाती है ये दवा

बता दें कि ब्यूपिविकेन एक स्थानीय एनेस्थेटिक (सुन्न करने वाली दवा) है. जिसका इस्तेमाल सर्जरी से पहले शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द महसूस होने से रोकने के लिए किया जाता है. ताकि ऑपरेशन या सर्जरी के दौरान मरीज को किसी भी प्रकार का दर्द महसूस न हो और इलाज आराम से हो सके.

यह दवा आमतौर पर प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं को सी-सेक्शन डिलिवरी से पहले दी जाती है. इसके अलावा हर्निया की सर्जरी, दांतों के इलाज, घुटना या कूल्हे के ऑपरेशन, यूरोलॉजी या पेट की सर्जरी से पहले दी जाती है.

इस दवा का इंजेक्शन पीठ के नीचे, पीछे स्पाइन में दिया जाता है. जिसमें कमर के नीचे का हिस्सा सुन्न हो जाता है और महिलाओं को डिलिवरी के दौरान दर्द महसूस नहीं होता. इसके अलावा नॉर्मल डिलीवरी के दौरान भी एपिड्यूरल के जरिए लेबर पेन कम करने में इसका उपयोग किया जाता है.

कई मरीजों में सर्जरी के बाद तेज दर्द को कम करने के लिए भी इसे दिया जाता है.

कैसे दर्द को महसूस होने से रोकती है ये दवा? यह दवा नसों के दर्द वाले सिग्नल को दिमाग तक पहुंचने से रोकती है, इसलिए मरीज को दर्द महसूस नहीं होता.हालांकि कई मरीजों में यह साइड इफैक्ट्स भी कर सकती है. खासतौर पर हार्ट डिजीज, बीपी, लिवर के मरीजों में यह नुकसान कर सकता है.

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