जोड़ों का दर्द, सूजन हो या गठिया…पारिजात की चाय दिलाएगी राहत, एक्सपर्ट से जानिए इस औषधि की ताकत

Last Updated:July 01, 2026, 12:58 IST
Parijat Leaves Tea Health Benefits: बागेश्वर सहित उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में जोड़ों के दर्द और गठिया से राहत पाने के लिए पारिजात (हरसिंगार) की पत्तियों की चाय का पारंपरिक उपयोग किया जा रहा है. आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. एजेल पटेल के अनुसार, पारिजात की पत्तियों को पानी में उबालकर बनाया गया काढ़ा वात और कफ संबंधी समस्याओं में लाभकारी है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है. हालांकि, विशेषज्ञ इसे मुख्य इलाज के बजाय एक सहायक उपाय मानने की सलाह देते हैं और गर्भवती महिलाओं या गंभीर मरीजों को बिना डॉक्टरी परामर्श के इसके सेवन से बचने की चेतावनी देते हैं.
बागेश्वर सहित उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में पारिजात की पत्तियों का उपयोग लंबे समय से घरेलू नुस्खे के रूप में किया जाता है. इसकी पत्तियों की चाय पीने से जोड़ों की जकड़न और गठिया वात से जुड़ी परेशानी में राहत मिल सकती है. आयुर्वेद में भी पारिजात को वात संबंधी समस्याओं में उपयोगी औषधीय पौधा माना गया है. हालांकि वैज्ञानिक शोध अभी सीमित हैं और हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. इसलिए यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे या गंभीर हो तो डॉक्टर से जांच और उचित उपचार जरूर कराना चाहिए.
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. एजेल पटेल ने बताया कि पारिजात की चाय बनाना बेहद आसान है. इसके लिए दो गिलास पानी में पारिजात की कुछ ताजी और साफ पत्तियां डालकर धीमी आंच पर उबालें. जब पानी आधा यानी लगभग एक गिलास रह जाए तो इसे छान लें. इस काढ़े या चाय में चीनी नहीं मिलानी चाहिए. स्वाद के लिए जरूरत हो तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार थोड़ा शहद बाद में मिलाया जा सकता है, लेकिन गर्म काढ़े में नहीं. इसे सुबह खाली पेट या हल्के नाश्ते के बाद लिया जा सकता है.
पारिजात की पत्तियों में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जिनमें सूजन कम करने वाले गुण होने की बात विभिन्न आयुर्वेदिक ग्रंथों में कही गई है. इसी वजह से इसे जोड़ों में सूजन और दर्द से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है. कई लोग नियमित रूप से इसकी चाय का सेवन करते हैं. हालांकि यह किसी दवा का विकल्प नहीं है. यदि किसी व्यक्ति को गठिया, यूरिक एसिड या अन्य गंभीर बीमारी है, तो उसे डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं बंद नहीं करनी चाहिए.
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पारिजात की पत्तियों में कई प्रकार के जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनके कारण इसे आयुर्वेद में स्वास्थ्यवर्धक माना गया है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है. बदलते मौसम में संक्रमण से बचाव के लिए भी कई लोग इसकी चाय पीते हैं. हालांकि यह दावा करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं कि केवल इसकी चाय पीने से रोग नहीं होंगे. संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और डॉक्टर की सलाह के साथ ही बेहतर स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है.
पारिजात का पौधा अधिक जगह नहीं घेरता और इसे घर के आंगन, बगीचे या बड़े गमले में भी लगाया जा सकता है. यह पौधा कम देखभाल में भी अच्छी तरह बढ़ जाता है. बरसात का मौसम इसे लगाने के लिए उपयुक्त माना जाता है. जब पौधा बड़ा हो जाता है तो इसकी पत्तियां और सुगंधित फूल दोनों उपयोगी होते हैं. कई लोग धार्मिक महत्व के कारण भी इसे घर में लगाते हैं. यदि औषधीय उपयोग के लिए इसकी पत्तियां ली जाएं तो केवल साफ और बिना कीटनाशक वाली पत्तियों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. पौधे की नियमित देखभाल से यह लंबे समय तक हरा-भरा रहता है.
हर प्राकृतिक चीज हर व्यक्ति के लिए समान रूप से सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है. गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रहे लोगों को पारिजात की चाय का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए. यदि सेवन के बाद एलर्जी, पेट दर्द, उल्टी या किसी प्रकार की परेशानी महसूस हो तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर डॉक्टर से संपर्क करें. किसी भी औषधीय पौधे का अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है.
आयुर्वेद में पारिजात को अनेक औषधीय गुणों वाला पौधा बताया गया है. इसकी पत्तियां, फूल और कुछ स्थानों पर छाल का भी पारंपरिक उपचारों में उपयोग किया जाता रहा है. इसे वात और कफ संबंधी समस्याओं में लाभकारी माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्ग आज भी पारिजात की पत्तियों का काढ़ा बनाकर उपयोग करते हैं. हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इसके सभी दावों की पुष्टि के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता बताई जाती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से जोड़ों का दर्द, गठिया, सूजन या अन्य स्वास्थ्य समस्या है तो पहले उसकी सही जांच करानी चाहिए. घरेलू नुस्खे शुरुआती स्तर पर कुछ लोगों को राहत दे सकते हैं, लेकिन गंभीर बीमारी का पूरा इलाज नहीं हैं. डॉ. एजेल पटेल के अनुसार पारिजात की पत्तियों की चाय नियमित और सही तरीके से बनाई जाए तो पारंपरिक अनुभव के आधार पर लाभ मिल सकता है. फिर भी यदि कोई व्यक्ति पहले से दवाएं ले रहा है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के उपचार में बदलाव नहीं करना चाहिए.
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