ये 5 मछलियां जो बच्चों के लिए हैं बेस्ट, कम कांटे, प्रोटीन, विटामिन D और ओमेगा 3 से भरपूर; दिमाग होगा तेज

Last Updated:July 01, 2026, 10:41 IST
These 5 Fish Are Best For Children: आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक बच्चों को हमेशा अच्छी तरह पकी हुई मछली ही खिलानी चाहिए. देने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसमें कोई कांटा न बचा हो. अगर बच्चा पहली बार मछली खा रहा है तो थोड़ी मात्रा से शुरुआत करें और किसी तरह की एलर्जी या परेशानी पर नजर रखें. आइए जानते हैं ऐसी 5 मछलियों के बारे में जिनमें कांटे भी कम होते हैं और पोषण भी भरपूर मिलता है.
रामपुरः बच्चों की अच्छी सेहत के लिए माता पिता दूध, फल और हरी सब्जियों पर तो खूब ध्यान देते हैं. लेकिन मछली की बात आते ही अक्सर घबरा जाते हैं. सबसे बड़ा डर यही होता है कि कहीं मछली का कांटा बच्चे के गले में न फंस जाए. इसी वजह से कई परिवार बच्चों को चिकन तो खिला देते है. लेकिन मछली से दूरी बनाए रखते है, जबकि सही मछली का चुनाव और उसे सही तरीके से पकाकर खिलाया जाए तो यह बच्चों के लिए सबसे पौष्टिक आहार में से एक मानी जाती है. इसमें मिलने वाला प्रोटीन, ओमेगा 3 फैटी एसिड, विटामिन डी, विटामिन बी12 और कई जरूरी मिनरल्स बच्चों के शरीर और दिमाग के विकास में अहम भूमिका निभाते है.
रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक बढ़ते बच्चों को संतुलित आहार की जरूरत होती है और मछली उसमें अच्छा विकल्प हो सकती है. मछली में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमाग और आंखों के विकास में मदद करता है, जबकि प्रोटीन मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करता है. उनका कहना है कि बच्चों को हमेशा अच्छी तरह पकी हुई मछली ही खिलानी चाहिए और देने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसमें कोई कांटा न बचा हो. अगर बच्चा पहली बार मछली खा रहा है तो थोड़ी मात्रा से शुरुआत करें और किसी तरह की एलर्जी या परेशानी पर नजर रखें.
सैल्मन को दुनिया की सबसे पौष्टिक मछलियों में गिना जाता है. इसमें ओमेगा 3 भरपूर मात्रा में होता है जो बच्चों के दिमाग, आंखों और याददाश्त के लिए फायदेमंद माना जाता है. इसका मांस मुलायम होता है और इसमें कांटे बहुत कम होते है. इसलिए छोटे बच्चों के लिए यह बेहतर विकल्प है.
बासा मछली का स्वाद हल्का और मांस बेहद नरम होता है. इसमें कांटे भी काफी कम होते हैं. यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. जिससे बच्चों की मांसपेशियों के विकास में मदद मिलती है. इसे फ्राई, करी या फिश फिंगर्स बनाकर आसानी से खिलाया जा सकता है.
तिलापिया में प्रोटीन, विटामिन डी, विटामिन बी12 और ओमेगा 3 अच्छी मात्रा में पाए जाते है. इसकी खास बात यह है कि इसमें बारीक कांटे बहुत कम होते है और बड़े कांटे आसानी से निकाले जा सकते है. यही वजह है कि इसे बच्चों के लिए सुरक्षित विकल्प माना जाता है.
कॉड का मांस सफेद, मुलायम और आसानी से पचने वाला होता है. इसमें प्रोटीन अधिक और फैट कम होता है. विटामिन-डी, विटामिन बी12 और सेलेनियम से भरपूर यह मछली बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है.
अगर बच्चा पहली बार मछली खा रहा है तो सोल फिश अच्छा विकल्प हो सकती है. इसका स्वाद हल्का होता है और इसमें कांटे बहुत कम होते है. इसे बच्चे आसानी से खा लेते है. इसमें मर्करी का स्तर भी कम माना जाता है.
डॉ. मोहम्मद इकबाल के मुताबिक मछली खिलाने का फायदा तभी मिलेगा जब इसे सही तरीके से बनाया और परोसा जाए. छोटे बच्चों को हमेशा ताजी और अच्छी तरह पकी हुई मछली दें. अगर परिवार में किसी को फूड एलर्जी की समस्या रही है तो बच्चे को मछली देने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहेगा. एक साल से छोटे बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के मछली नहीं देनी चाहिए. साथ ही ऐसी मछलियों का बार बार सेवन करने से बचें जिनमें मर्करी का स्तर ज्यादा हो सकता है. सही मात्रा और सही मछली का चुनाव बच्चों को स्वाद के साथ बेहतर पोषण भी देगा.
About the AuthorManish Rai
काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें
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