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PAC Meet on CBSE Row: करोड़ों छात्रों के भविष्य पर सवाल, लेकिन जवाब कौन देगा? संसदीय समिति की मीटिंग में बड़ा बवाल

Last Updated:July 03, 2026, 08:51 IST

PAC Meet on CBSE Row: संसद की पीएसी बैठक में जमकर हंगामा हुआ. शिक्षा सचिव ने कहा कि सीबीएसई प्रमुख संसदीय पैनल को जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं. इससे हंगामा बढ़ गया. विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है. जानिए क्या है पूरा विवाद.छात्रों के भविष्य पर सवाल, जवाब कौन देगा? PAC की बैठक में भारी हंगामाZoomPAC Meet on CBSE Row: इस मीटिंग में पेपर लीक और अन्य विवादों पर चर्चा होनी थी

नई दिल्ली (PAC Meet on CBSE Row). संसद की लोक लेखा समिति की बैठक में जबरदस्त हंगामा मच गया. देश की शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं में हालिया गड़बड़ियों पर चर्चा होनी थी. मीटिंग कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता में चल रही थी. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के अध्यक्ष लोखंडे प्रशांत सीताराम से स्टूडेंट्स से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सवाल पूछे जाने थे. लेकिन इससे पहले कि कोई सदस्य सवाल दाग पाता, शिक्षा मंत्रालय के सचिव विनीत जोशी ने ऐसी दलील दे दी कि विपक्ष नाराज हो गया.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद की वजह शिक्षा सचिव का एक दावा बना. उन्होंने कहा कि सीबीएसई को केंद्र सरकार से सीधा फंड नहीं मिलता है. इसी तर्क के आधार पर उन्होंने दलील दी कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के प्रमुख संसदीय समिति या उसके अध्यक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं. इस बयान के आते ही बैठक का माहौल गरमा गया. इसके बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई.

इस बैठक का एजेंडा क्या था?

गुरुवार को हुई इस बैठक का मकसद स्पष्ट था. इसमें केंद्र सरकार की शिक्षा योजनाओं की समीक्षा होनी थी और हाल की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों पर चर्चा की जानी थी. इसमें शिक्षा मंत्रालय और स्कूली शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मौजूद थे. विपक्ष सीबीएसई प्रमुख को घेरने की तैयारी में था. लेकिन सचिव के ‘नो फंडिंग, नो आंसर’ वाले तर्क ने बहस का रुख ही मोड़ दिया. बीजेपी के कई सदस्यों ने भी अधिकारी की इस बात का समर्थन किया कि जब सरकारी खजाने से पैसा नहीं जा रहा तो जवाबदेही की बाध्यता नहीं बनती.

विपक्ष का पलटवार: ‘यह मिनी पार्लियामेंट है’

इस दलील पर समिति के अध्यक्ष के.सी. वेणुगोपाल ने सख्त ऐतराज जताया और कहा कि लोक लेखा समिति ‘मिनी-पार्लियामेंट’ की तरह काम करती है. अगर देश की संसद को सीबीएसई से सवाल करने का हक है तो इस कमेटी के पास भी वही शक्तियां हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि सीबीएसई से जुड़े मुद्दे देश के करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़े हैं. यह बेहद संवेदनशील और सार्वजनिक महत्व का विषय है. ऐसे में बोर्ड का नेतृत्व अपनी जवाबदेही से बिल्कुल पीछे नहीं हट सकता.

टीएमसी का मिला साथ और बढ़ा दबाव

इस विवाद में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने भी वेणुगोपाल के रुख का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि छात्रों के कल्याण और परीक्षा की शुचिता से जुड़े सवालों को इस तरह तकनीकी बहानों के पीछे छिपकर टाला नहीं जा सकता. विपक्ष के चौतरफा हमले को देखते हुए बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की गई. आखिरकार, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति को सूचित किया कि वे इस पूरे कानूनी पेच और सवालों के जवाब देने की अनिवार्यता को लेकर कानून मंत्रालय की राय मांगेंगे.

संसदीय समिति में टकराव का दूसरा हफ्ता

संसदीय पैनल की बैठकों में टकराव का यह कोई पहला मामला नहीं है. पिछले हफ्ते ही के.सी. वेणुगोपाल की अगुवाई में ‘ग्रेट निकोबार द्वीप’ (GNI) प्रोजेक्ट पर सरकार और विपक्ष के बीच भारी नोकझोंक हुई थी. अब छात्रों से जुड़े इस नए विवाद ने नई बहस छेड़ दी है. सवाल उठ रहा है कि आखिर संसदीय समितियों के पास कितनी ताकत है और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही क्या है. देखना होगा कि कानून मंत्रालय इस पर क्या राय देता है.

About the AuthorDeepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

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