Rajasthan

कभी 8 मील दूर तक गूंजती थी घंटी, आज पोस्टरों और गोबर के बीच दम तोड़ रही धरोहर

Last Updated:July 05, 2026, 09:25 IST

Dholpur: धौलपुर का ऐतिहासिक निहाल टावर, जो भारत का सबसे ऊंचा घंटाघर है, आज प्रशासनिक उपेक्षा और गंदगी के कारण अपनी खूबसूरती खो रहा है. इसकी लाल पत्थरों की दीवारों पर कोचिंग संस्थानों और अस्पतालों के विज्ञापन पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं, जिससे इसकी मूल संरचना खराब हो रही है. परिसर में आवारा पशुओं के जमावड़े से चारों तरफ गोबर और गंदगी का आलम है. इतिहासकार अरविंद शर्मा ने इस अनमोल रियासतकालीन धरोहर को बचाने के लिए प्रशासन और आम जनता से तुरंत सफाई और संरक्षण की अपील की है.

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धौलपुर: राजस्थान का धौलपुर जिला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासतों के लिए जाना जाता है, लेकिन आज यहाँ से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है. धौलपुर का ऐतिहासिक निहाल टावर, जो भारत के सबसे ऊंचे ऐतिहासिक घंटाघरों में शुमार है, इन दिनों घोर प्रशासनिक उपेक्षा और जन-जागरूकता की कमी के कारण बदहाली के आंसू बहा रहा है. लाल पत्थरों से निर्मित यह बेजोड़ स्थापत्य कला का नमूना अब अपनी पहचान खोने की कगार पर पहुंच गया है.

धौलपुर की शान माना जाने वाला यह अनमोल स्मारक अब स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों और शिक्षण संस्थानों के लिए केवल विज्ञापन का एक मुफ्त माध्यम बनकर रह गया है. निहाल टावर की खूबसूरत लाल पत्थरों की दीवारों पर विभिन्न कोचिंग सेंटरों, निजी अस्पतालों, स्कूलों और अन्य व्यावसायिक विज्ञापनों के पोस्टर, बैनर और पंपलेट धड़ल्ले से चिपकाए जा रहे हैं. इन पोस्टरों की वजह से न केवल इस ऐतिहासिक टावर की प्राकृतिक और मूल सुंदरता पूरी तरह से छिप गई है, बल्कि रासायनिक गोंद के इस्तेमाल से इसके प्राचीन पत्थरों को भी स्थायी नुकसान पहुंचने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है.

आवारा पशुओं का डेरा और चारों तरफ पसरी गंदगीघंटाघर की बदहाली का आलम यह है कि इसके मुख्य परिसर के आसपास और अंदरूनी हिस्सों में हर समय आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है. इस वजह से पूरी ऐतिहासिक इमारत के चारों तरफ गोबर और भारी गंदगी फैली रहती है. यहाँ आने वाले पर्यटकों को अब इतिहास की खुशबू के बजाय चारों तरफ बिखरी गंदगी और बदबू का सामना करना पड़ता है. स्थानीय प्रशासन और नगर परिषद की उदासीनता के कारण इस राष्ट्रीय स्तर की धरोहर की गरिमा लगातार तार-तार हो रही है.

महाराज निहाल सिंह के काल में गढ़ा गया था इतिहासधौलपुर के प्रसिद्ध इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि रियासत काल में महाराज निहाल सिंह के शासनकाल के दौरान इस अद्भुत घंटाघर का निर्माण करवाया गया था. यह धौलपुर के गौरवशाली इतिहास का सबसे जीवंत प्रतीक है. एक दौर था जब इस भव्य टावर में लगी ऐतिहासिक घड़ी की गूंज करीब आठ मील दूर तक साफ सुनाई देती थी. अपनी अद्वितीय ऊंचाई और धौलपुरी लाल पत्थर की नक्काशीदार बनावट के कारण यह पूरे देश में एक अलग और विशेष पहचान रखता था, लेकिन आज इसकी दुर्दशा देखकर हर इतिहास प्रेमी का दिल कचोटता है.

सामूहिक जिम्मेदारी और कड़े कदमों की दरकारइतिहासकारों और प्रबुद्ध नागरिकों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी ऐतिहासिक धरोहर का संरक्षण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है. यदि समय रहते जिला प्रशासन, नगर परिषद और धौलपुर के नागरिकों ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाली पीढ़ियां अपने ही शहर के इस शानदार इतिहास और पहचान से पूरी तरह महरूम रह जाएंगी. इस ऐतिहासिक अनमोल विरासत को बचाने के लिए पोस्टरों को तुरंत हटाने और परिसर को ‘नो वेंडिंग व नो पोस्टर जोन’ घोषित करने की सख्त जरूरत है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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